अहंकार से बचना, इसकी आग में कभी भी मत जलना।
बस मेहनत करना और उसी को अपनी "दौलत" कहना।
बाक़ी सब कुछ कोई चुरा लेगा, छीन लेगा, इसको नहीं।
इस बात को सोचकर के अपनी मेहनत पर "गर्व" करना।
"मेहनत" से इंसान इस जीवन में कुछ भी पा सकता है।
"मेहनत और लगन के दम पर" तुम आगे ही बढ़ते रहना।
लक्ष्य कोई भी हो कैसा भी हो मिल ही जाएगा एक दिन।
तुम बस लगन के साथ डटकर बढ़ते रहना, चलते रहना।
इस बात की चिंता मत करो कोई कितना आगे बढ़ गया।
तुम को "अपनी राह चलनी है", चलते रहना, मत रुकना।
अपने अंदर तुम सहजता को कूट-२ कर भरकर रखना।
लाख समृद्ध हो जाओ लेकिन अपने में सहजता रखना।
तुम्हारे धन-दौलत से किसी का "पेट नहीं भरने वाला है"।
तुम्हारी मीठी बोली से मन ख़ुश हो सकता है, याद रखना।
आख़िर अहंकार किस चीज़ पर और किस बात का करना।
आज़ जो है पास तुम्हारे कल चला जाएगा, फिर क्या करना।
इस जीवन का खेला ऐसे ही चलते रहता है, याद रखना।
आज़ जो तेरा है कल किसी का हो जाएगा, ध्यान रखना।
अपने आप में मिठास और मेल-मिलाप लाना है "अभि"।
उसके बाद "सब तेरे हो जायेंगे" एक दिन फिर तू देखना।-
तुमने जो दर्द दिये हैं
उसे दफ़्न करके
हम तुम्हे सदा के लिये
अलविदा कहते हैं...!
...
और..अब तुम जैसा
कोई भी ज़िन्दगी
में न आये ये दिल
से दुआ करते हैं...!-
गुनहगार रहेगा तू उसकी ज़िंदगी का ,
चाहें कितने भी तू पर्दा गिराये।।
अपनी गलती मानना बस की नहीं है तुम्हारे ,
चाहे अब तू चाहे कितना खुदा को बीच में लाए।।-
संस्कारांचे खुन झाले की,
मानवाचे गुण उधळले जातात.
अहंकारी पाश जखडला की,
पुर्वजांचे ऋण कुदळले जातात.-
ना बोलो उनको कुछ
वो मुरझा जाएँगे
बात हो सयानी
वो घबरा जाएँगे
ऐसे हि जी लिए उन्होंने
वो हज़ार पल
ना ली सीख किसी से
ना है इन्मे दम
अहंकार से भरे हुए
ग़ुस्से का पिया जाम
ग़लतियों से ना सीखे कुछ
ख़ुद पे ही है उनको क्रूरता का घमंड।
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स्व अहंकार का बोध नहीं
व्यर्थ सबपे आरोप लगाए
बिगड़ गई सो तेरी तेरी
बनी तो अपने ही गुण गाए-
ऐसे मनुष्य जो चल, अहंकारी, बुरी दृष्टि वाले, खराब विचार करने वाले, लालची, मूर्ख और सदैव अपनी दुःख की बाते बताने वालो से दूरी बनाकर रहना चाहिए क्युकी वो साथ होंगे तो कभी भी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है.
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अहंकारी और ज़िद्दी व्यक्ति किसी और का नहीं बल्कि स्वयं का नुकसान ज्यादा करता है ।....
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न रिश्तों में तपिश न भावनाओं का समंदर है
जहां में बस बोझ वहन कर रहे हैं आज लोग
भागती दौड़ती जिंदगी में हो रहा इच्छाओं का पतन
चमकदार पत्थर के पीछे भाग रहे हैं आज लोग
दीमक खा गयी घर की चारदिवारियाँ खाली हैं
रिश्तों की मुट्ठी खुल गयी अहंकारी हैं आज लोग
खो गयी वो शायरियाँ जहाँ कल्पनायें जवां होती
इश्क़-मुश्क दो दिन के नज़र फेर लेते हैं आज लोग
आँधियों के बवंडर पर खड़े हैं सब अहसासी रिश्ते
किथ जाऊँ "मीता"औकात दिखा रहे हैं आज लोग-