Abhishar Ganguly   (अभि:एकतन्हामुसाफ़िर)
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Joined 2 December 2017


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Joined 2 December 2017
26 JUN AT 11:24

Creating a new You.

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22 JUN AT 17:41

"Loving you".

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22 JUN AT 6:49

Then how would we shine?

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20 JUN AT 22:00

तुमसे दूर चले जाएँगे, आज दिखते हैं तो खटकते हैं न सनम, देखना एक दिन तुमको हम नज़र नहीं आएँगे।
तुम्हारी आँखों में हम अपनी निग़ाहें छोड़ जाएँगे, कोई भी
जो देखें तुमको, तो हमनशीं बस हम नज़र आएँगे।
बड़ा तड़पाया हैं आज हमको जीते जी, देखना एक दिन
हम सच में मर जाएँगे, फिर कभी न वापस आएँगे।
तड़प क्या होती हैं एक रोज़ हम तुमको बताएँगे, आएँगे तुम्हारी यादों में और अगले ही पल आ के लौट जाएँगे।

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18 JUN AT 22:56

ख़ामियाँ किसमें नहीं है तो क्या हम प्यार करना छोड़ दें।
क्या हुआ जो दिल टूट गया था लड़कपन में इश्क़ करने में।
तो क्या हम अब कभी भी किसी पर ऐतबार करना छोड़ दें।
सच है कि ये इश्क़ तड़पाता हैं हर बार बार-बार तन्हाई में।
ऐसा थोड़ी कर सकते हैं हम कि इस दिल को फिर तोड़ दें।
आती हैं याद जब-जब उस की, सताती है भरी महफ़िल में।
हमसे न हो सकेगा उसके जाने के बाद यादों को छोड़ दें।
दिल को ये यकीन कि वो हमसफ़र मिल जाएगा मंज़िल में।

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18 JUN AT 22:45

अगर मगर क्या करते हो 'अभि' गर मंज़िल पानी हैं तो लगातार मेहनत करते जाओ।
छोड़ो, आरामकुर्सी में बैठकर लोगों को ताना देना, अब तुम भी कुछ कर के दिखाओ।
कोई काम कितना मुश्किल या आसान है ये कह कर बतलाना तो बड़ा ही मुश्किल है।
सुनो! मेरी मानो तो तुम सब को कर के ही दिखलाओ, आओ एक मिसाल बन जाओ।
कोई तुम्हें कुछ कहें तो हाथ मत चलाओ, मुँह तो बिल्कुल मत चलाओ, सुनते जाओ।
बस अपने काम से, अपनी सफलता से, अपनी प्रतिभा दिखाओ, लोकप्रिय बन जाओ।
वो जो तुम्हें कहते थे कि "तुमसे कुछ नहीं हो पाएगा, 'शायरी' करने से 'क्या' होगा?"
उन सबको 'दिखाओ', उन सब को 'सिखाओ', बस ऐसे ही 'अभि' आगे बढ़ते जाओ।

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18 JUN AT 22:30

सिर्फ़ एक मुस्कुराहट से हम सारा जहां जीत सकते हैं फिर लड़ के क्या करना।
चाहें तो हम मेहनत से सब कुछ ही हासिल कर सकते हैं, बेईमानी क्यों करना।
कोई भी नहीं है ऐसा इस जहां में जो एक मेहनतकश इंसान को हरा दे 'अभि'।
फिर तुम बस चुपचाप मेहनत करते जाओ फिर मेहनत करने से तुम्हें क्या डरना।
आज समय हैं तो जी तोड़ कर मेहनत करो, बाद में पड़ेगा तुम्हें ठंडी आहें भरना।
आज जो भी बुराई करते हैं तुम्हारी उन्हें शुक्रिया कहो, कल उन्हें सलाम करना।
जो आज चापलूसी करते हैं तुम्हारी वो आस्तीन के साँप हैं, उनसे दूर ही रहना।
लगातार चलते जाओ, बढ़ते जाओ, तन्हामुसाफ़िर को कारवाँ मिलेगा देखना।
जो अब भी दिल में दर्द है इश्क़ की तो सुनो कुछ भी करना पर इश्क़ न करना।
अब के जो ज़ख्म मिला तो सह न सकोगे 'अभि' फिर बेमौत मर जाओ वरना।
अब के हो जाए दीदार उनका तो ज़रा दूर ही रहना, उन पर ऐतबार मत करना।
सब कुछ करना पर सुनो, अब के उनसे तुम प्यार मत करना, इक़रार मत करना।

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16 JUN AT 23:22

जिनको लिखना आता हैं 'अभि' उनको सब कुछ आता हैं।
क्योंकि वो कुछ भी कर सकते हैं जिनको 'सृजन' आता हैं।

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12 JUN AT 19:19

तुमने कब चाहा कि खुशमिज़ाज़ रहूँ मैं, बोलो
ज़माने वालों तुमने कब माँगा कि आबाद रहूँ मैं।
मैं तो अंधेरों में भटकता रहता था, आख़िर में
फिर मैंने चाहा कि मजलूमों का आफ़ताब रहूँ मैं।
कि दिमाग़ से पढ़े तो समझ न पाए कोई मुझे,
वहीं दिल से समझा जाऊँ वो किताब रहूँ मैं।
चाहें काट दें ईर्ष्या से कोई हर एक शाख मेरी
पर मेहनत करता रहूँ और शादाब रहूँ मैं।

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12 JUN AT 19:05

मेरे ज़ख्म का मरहम तू, मैं जिसे सोचता हूँ हरदम वो ख़्याल तू।
जिसके जवाब जानने के लिए मैं हर लम्हा तैयार वो सवाल तू।
जो बदलना चाहता हूँ मैं तुझे पाने के बाद तड़पता हुआ हाल तू।
जिस दिन मिल जाओगे तुम हमको जो होगा जहां में वो बवाल तू।
'आज' जिसे कोई समझता नहीं पर 'कल' जब तू मिल जाएगा तो।
सब यकीन करने लगेंगे हमारी रूहानी मोहब्बत पर वो अंतर्जाल तू।
कोई नहीं पूछता है आज मुझे पर पूरा यकीन है कि पाकर के तुझे।
मुझ पे और इश्क़ पर भरोसा करेंगे कि वो तिलिस्मी कमाल हैं तू।

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