Abhishar Ganguly   (अभि:एकतन्हामुसाफ़िर)
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Joined 2 December 2017


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13 NOV AT 0:26

बड़ा आसान होता हैं 'अभि' अपनी पुरानी ज़िंदगी में लौट जाने में।
जबकि एक पूरी ज़िंदगी लग जाती हैं हमें एक नई ज़िंदगी बनाने में।

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4 NOV AT 0:23

इसलिए मैं तुमसे प्यार नहीं करता हूँ कि तुम मुझे अच्छी लगती हो।
बल्कि इसलिए क्योंकि जान तुम मेरा बड़े अच्छे से ख़्याल रखती हो।

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1 NOV AT 23:34

कल तलक मेरी इबादत करता था वो आज मेरा भगवान बन गया।
कल तक मेरे लिए जीता था वो देखो आज वो मेरी जान बन गया।
कल तक मुझसे अनजाना था वो और आज मेरी पहचान बन गया।
कल मुझसे सीखता था जीने का सलीका आज मेरी शान बन गया।

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31 OCT AT 1:35

मैं अरसे से "हमरूह" की एक क़ायनात लिख रहा हूँ 'अभि',
और सब लोग पूछते हैं कि मैं आजकल लिखता क्यूँ नहीं।

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24 OCT AT 22:39

आप सभी चाहनेवालों को दिल से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं,
आप सभी सुखी व भयमुक्त रहें, कभी पास न आए आप सबके बलाएँ।

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20 OCT AT 3:19

तुमसे किसने कहा कि मैं अब तुमसे प्यार नहीं करता, बस अब दिखाता नहीं हूँ।
तुमसे किसने कहा कि मुझे तुम्हारी परवाह नहीं है, बस अब जताता नहीं हूँ।
अब भी कहने को हज़ार बातें होती हैं पास मेरे लेकिन अब तुम्हें मैं बताता नहीं हूँ।
दिल मेरा आज भी तड़पता हैं सोचकर कुछ तुमसे मिलने को पर तुम्हारे पास आता नहीं हूँ।
आज भी नज़्म बन जाते हैं तुम्हारी नज़र करने को यकायक पर लिखकर बतलाता नहीं हूँ।
जानता हूँ कि अब हमारा मिलना बस ख़्यालों में मुमकिन है इसलिए मिलने आता नहीं हूँ।
जानता हूँ आज भी तुम हमारी बातें याद कर के मुझे याद करती हो इसलिए तुम्हें भुल पाता नहीं हूँ।

(बाकी की रचना कैप्शन में)

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18 OCT AT 11:05

जब कोई पुरूष कृष्ण बनने की सोचता है तो
सबसे पहले वो अपने अंदर त्याग को ढूँढता हैं।

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15 OCT AT 2:44

ऐसा नहीं है कि मुझे नींद नहीं आती लेकिन मेरे ख़्वाब इतने बड़े हैं कि मुझे सोने नहीं देते।
आते हैं ऑंसू मेरी भी आँखों में ज़रा-ज़रा सी बात पर, पर मेरे जज़्बात मुझे रोने नहीं देते।

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15 OCT AT 2:39

"फिर से अच्छा लग रहा है, फिर से........

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13 OCT AT 0:03

जान! एक बात बताए आपके साथ की न एकदम से आदत सी हो गई हैं। आजकल हर पल आपके ही साथ रहते हैं न शायद इसलिए साथ रहने की कभी न मिटने वालो चाहत हो गई हैं। कल तक इश्क़ बस ख़्वाबों की मजलिसों का जैसे कोई मेला था आपसे कल तक मोहब्बत थी न सनम सच बताए तो आज मेरे लिए पाक मेरे ईश्वर की ईबादत हो गई हैं। सच कहता हूँ जान इस "अभि:एकतन्हामुसाफ़िर" को तुमसे ए मेरे हमनशीं बेइंतहा वाली मोहब्बत हो गई हैं। और जब से हुआ है ये ख़ूबसूरत सा हादसा लगता हैं जैसे साथ हमारे एक मुकम्मल क़यामत हो गई हैं। हमें तुमसे बेइंतहा मोहब्बत हो गई हैं, हमें तुमसे बेइंतहा मोहब्बत हो गई हैं। हाँ, मेरे हमसफ़र हमें तुमसे मोहब्बत हो गई हैं।

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