अस्पताल से लौटी
एक बार फिर वो
सूनी गोद लेकर-
"कोरोना विशेष"
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जीवितों को अस्पताल नही मिल रहा है,
तो मृतकों को शमशान नही मिल रहा।।
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"अच्छे दिन आ गए।।"
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जब तुम सोच रहे थे,
डॉक्टर ,इंजीनियर, कवि,
प्रेमी और नेता बनना.............
तब मैं अस्पताल का एक बिस्तर,
बनना चाहता था,
जो मरने वालो को जिंदा रहने की,
एक आस बाँधे रखता हैं।-
मैने अस्पताल देखा है
मौत से जूझते इन्सान देखें हैं
परिजनो का बुरा हाल देखा है
दर्द का अंबार देखा है
शून्य सा माहौल देखा है
मैने अस्पताल देखा है
यहाँ फूकी जाती है जान
शरीर मेंं मशीनो से
हसती खेलती जिन्दगी को
होते जंजाल देखा है
मैने अस्पताल देखा है
स्ट्रेचर पर वेसुध पड़े इन्सान देखे हैं
एम्बुलैंस से उतरते मरीज लहुलुहान देखे हैं
आखों में आंसू देखे हैं
विलखते अपनो को बेहाल देखा है
मैने अस्पताल देखा है
गरीब की वेबसी देखी है
चेहरों से गायब हसी देखी है
दुआएँ मांगते हाथ देखे हैं
पीड़ाओ का कोलाहल देखा है
जी हां..मैने अस्पताल देखा है।।-
सर्वसुविधायुक्त था
वो बड़ा सा अस्पताल।
पर आते नहीं थे पुत्र कभी
पूछने माता का हाल।
फिर अचानक एक दिन
हुआ कुछ ऐसा कमाल।
आने लगे पुत्र सभी
पूछने माता का हाल।
रहा न गया माता से
किया डॉक्टर से सवाल।
डॉक्टर ने कहा युवा नर्स ने
मचाया है यह बवाल।-
सुना है बीमारी का कोई इलाज नही,
दवाइयां और अस्पताल भी महंगे है।
मेरे शहर में,
कामाल है साहब जान ही एक,
सबसे सस्ती चीज है आज।-
// आख़िरी कश //
अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं फ़िर वक़्त हो जाएगा एक नींद का इंतज़ार करने का जिसके पहले और दौरान दर्द कुछ वैसा होता है जिसे बयां करने के लिए मेरे पास कोई साधन नहीं होगा।
(अनुशीर्षक पढ़ें)-
दिन गुज़ारे है कुछ ऐसे
तकलीफो के साथ
मैं था मसलनो के साथ और
वो खटमलों के साथ।-