Anuup Kamal Agrawal   (A.AG.)
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9 वर्ष का हुआ एक ललना
सिखाया जिसने हम सब को चलना

दिखायी इसी को हमने हर चोट
भावनाओं की बाढ़ में यही एक बोट

इसी से बाँटे सारे हर्ष-विषाद
कभी सोने से पहले तो कभी जागने के बाद

यही चाय की टपरी, यही मदिरालय
यहीं ढलती रात, यहीं सूर्योदय

यहीं फूँके हमने वीड्स के जॉइन्ट
यही है लेखकों का लवर्स पॉइंट

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20 HOURS AGO

consistency.

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27 AUG AT 21:44

बची बस आखिरी तीली थी
डिबिया भी हो चुकी गीली थी

मैंने कलम निकाली
और आग लगादी

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27 AUG AT 21:41

darkness
through the prism
of my thoughts.

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27 AUG AT 21:39

कैसे देखता तुम्हारी ओर,
तुम जब मुझे ही देख रही थी

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26 AUG AT 21:37

किसी की गाड़ी किसी को कुचल जाती है

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25 AUG AT 0:35

Sometimes we can't say them whom we like, so we just like their quotes.

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24 AUG AT 23:14

अंदर के दानव से डर लगता है
खाली दिमाग जिसका घर लगता है

देखा तो नहीं है उसका चेहरा
करतूतों से ही भयंकर लगता है

रहता है दिन में जाने कहाँ वो
प्रकृति से वो निशाचर लगता है

मरता ही नहीं जितना मार लो फिर भी
हो चुका वो अमर लगता है

रचता है रोज नया मायाजाल वो
जैसे हो कोई जादूगर लगता है

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24 AUG AT 23:07

अचानक एक समस्या घिर आयी है
वो ख़यालों में फिर आयी है

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23 AUG AT 4:04

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