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#nazm

2606 quotes

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Deepak Talab
7 AUG AT 9:25

इक नज़्म
जो नहीं चाहती
किसी मंच पे आना
इक ग़ज़ल
जो नहीं चाहती
किसी तरन्नुम में बंध जाना

इक एहसास
जिसको गँवारा नहीं
किन्हीं अल्फ़ाज़ में गढ़ना
इक रंग
जिसका मुमकिन नहीं
बाहर से आँखों पे चढ़ना

ये जो दे रहा चुपचाप
इंद्रधनुषी रंग
इस बूँद को
वो तेरा इश्क़ है

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पीयूष मिश्रा
28 NOV 2016 AT 21:04

रात-रात भर
जाग-जाग कर
नज्मों की शक्लों में तुमको
कितने ही ख़त लिखता था

कितना अरसा गुज़र गया अब
नज्में कहना भूल गया हूँ
ख़त लिखना अब छोड़ दिया है
पता तुम्हारा बदल गया है!

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Anshul Nagori
28 MAR AT 9:25

ज़हन में मिला था एक हर्फ़ ऐसे
समंदर में तैरता हुआ बर्फ़ जैसे


(poem in caption)

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Asad Noori
29 DEC 2017 AT 22:34

शराब ए मेहफ़ील में

भर लो प्याले को तुम जाम से जितना भर सकते हो,
पी लो प्याले तुम जाम के जितना पी सकते हो।
फिर कहना मत की शराब यूही बदनाम हे,
नज़्म मैं उसके सुनाने जा रहा हूँ।
......................
सुन ले ए इश्क़ नज़्म तेरी सुनाकर मैं, ×2
शराब इनकी छूटवा रहा हूँ।
...........
बिकेंगे फ़िर नज़्म मेरे हर शराब ए खाना में,
ज़िक्र तुम्हारे आँखो का मैं करने जा रहा हूँ।

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Ashish Awasthi
28 DEC 2017 AT 18:10

कब जाना है दफ़्तर को, किस वक़्त घर को आना है
सुखा देना है आंखों में या अश्कों को बहाना है
कहाँ पर बाग है गुल का, कहाँ पर क़ैद-ख़ाना है
फासला रख के मिलना है या उनसे लिपट जाना है

हाँ, मैं अक्सर भूल जाता हूँ।।

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Ashish Awasthi
26 DEC 2017 AT 21:25

सफ़र में चलते रहना है या थक कर ठहर जाना है
फ़लक से बात करनी है, चाँद लेकर के आना है
उसे दिन भर याद करके फिर, शाम को भूल जाना है
हर शब में उसको लिखना है, सहर होते मिटाना है

हाँ, मैं अक्सर भूल जाता हूँ।।

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Shivam Tiwari
10 AUG 2017 AT 18:48

तुम्हारी हँसी की आवाज़ें,
मेरे कानों में क़ैद हैं जो।
कभी कभी सुनते सुनते रो पड़ता हूँ।

वो जो इन्हें रोज़ सुनता होगा अब,
उसे तुमसे बिछड़ने का डर नहीं है क्या।

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Ashish Awasthi
24 DEC 2017 AT 2:15

कहाँ जाना है रातों में कहाँ पे दिन बिताना है
यहीं पे रह के हँसना है या कहीं रोने भी जाना है
कौन से ख़त को रखना है और किसको जलाना है
उजाले में ही रहना है या चराग़ों को बुझाना है

हाँ, मैं अक्सर भूल जाता हूँ।।

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Ashish Awasthi
24 DEC 2017 AT 14:12

किसी की बात सुननी है या उसको कुछ सुनाना है
शमा के संग जीना है या उस पर मर ही जाना है
करनी है मोहब्बत फिर या अबके डर भी जाना है
राहों में भटकना है या वापस घर को जाना है

हाँ, मैं अक्सर भूल जाता हूँ।।

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Buddu sa man
17 JUL AT 11:36

एक नज़्म ♥️

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