Deepak Shah   (DEEPAK शाह - 'ਸ਼ਾਹ')
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Joined 5 November 2017


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15 HOURS AGO

धर्मान्धता दुर्साध्य रोग है,
राजनैतिक अन्धापन अक्षम्य रोग।

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20 JUL AT 13:49

इश्क़ के मकतब का
अजब है ये दस्तूर पिया
उसको सबक न अगला मिला
जिसने सबक पहला
न दिल किया,
और दिल किया
तो यूँ दिल किया कि
ज़िन्दगी को
सबक में ढ़ाल लिया,
इश्क़ के मकतब का
अजब है ये दस्तूर पिया

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19 JUL AT 22:49

इश्क़ के मकतब का
अजब है ये दस्तूर पिया
उसको सबक न अगला मिला
जिसने सबक पहला
न दिल किया,
सिर्फ़ न दिल किया बल्कि
जब तक ज़िन्दगी को
सबक में न ढ़ाल लिया,
इश्क़ के मकतब का
अजब है ये दस्तूर पिया

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16 JUL AT 13:39

इश्क़ न ढूँढ़े कोई कामिल
इश्क़ के लिए नहीं
क़ाबिलियत कोई सवाल,
इश्क़ चुन ले जिसे
कर दे उसको कामिल
बना ले अपने क़ाबिल
यही है इश्क़ का कमाल

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21 JUN AT 18:36

वो! जो मेरा दिवस मनाता है,
वो भूल गया है मुझे,
वरना क्या बात थी
कि वो ख़ुद को
मेरी याद दिलाता है
और ठीक-ठीक
याद मेरी आने से पहले ही
वो मुझे भूल जाता है,
वो! जो मेरा दिवस मनाता है

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18 JUN AT 12:32

मुमकिन कहाँ है कभी
कि ऐन एहसासों से मिले
सूरत अल्फ़ाज़ों की
तू मेरे हर हर्फ़,
मेरी ख़ामोशी को,
मेरा शुक्रिया जान

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18 JUN AT 9:18

पढ़ लेगा ज़माना
हर्फ़-हर्फ़ ख़याल मेरे,
जो दर्ज़ किए हैं
मैंने इस काग़ज़ के सीने में,
इश्क़ मेरा
ख़ामोश ही गूँजता रहेगा
अज़ल तक
जो दर्ज़ हुआ है
इस वक़्त के सीने में

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15 JUN AT 13:49

....

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14 JUN AT 17:04

ले आई होगी इस तरफ़ ज़ुरूर ही उसको
कोई वक़्त की ही भूल
वरना रुख़ ज़माने का
वो करता है कब भला?
गड़ा हो जिसके सीने में बिरहा का सूल

लाख आसमान खींचे ऊपर
मगर, बाँधे रखती है नीचे को
उसका जी, उसकी नज़र सदा
सींचने वाली धूल
सूरज लाख बरसाए रंगीनियाँ
सिर उठा कर भी कभी
उधर देखता नहीं है मधुमालती का फूल

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14 JUN AT 14:04

लाख आसमान खींचे ऊपर
मगर, बाँधे रखती है नीचे को
उसका जी, उसकी नज़र सदा
सींचने वाली धूल
सूरज लाख बरसाए रंगीनियाँ
सिर उठा कर भी कभी
उधर देखता नहीं है
मधुमालती का फूल

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