Deepak Shah   (दीपक शाह - 'ਸ਼ਾਹ')
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Joined 5 November 2017


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Deepak Shah 11 NOV AT 8:07

हमारी नज़र देखे
दो धर्म
मेरा धर्म
तेरा धर्म
लेकिन!
धर्म होता है बस
धर्म!

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Deepak Shah 10 NOV AT 14:57

अपने धर्म को
उसका हक़ दिलाने को
धर्म का बेड़ा पार लगाने को
दो धार्मिक
झगड़े, बहाई ख़ून की धार
लो, चले धार्मिक
करने धर्म का उद्धार
मसला धार्मिक!
दे हल सरकारी दरबार
झगड़े से लहू-लोहान
लिए बदन पर धार्मिकों के वार
अदालत की चौखट
से बहार खड़ा
धर्म गया हार!

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Deepak Shah 9 NOV AT 18:05

'धर्म' पर 'अधर्म' से नहीं 'धार्मिकों' और 'अधार्मिकों' से संकट आता है।

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Deepak Shah 9 NOV AT 9:33

लाखों सफ़ें
पढ़ के आया
लफ़्ज़ों के बीच
इक चुप को
सुनना!

तितली सीखे
फूल के हुस्न से
शहद चुनना!

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Deepak Shah 9 NOV AT 9:26

ਲੱਖਾਂ ਸੱਤਰਾਂ
ਪੜ੍ਹ ਕੇ ਆਇਆ
ਲਫ਼ਜ਼ਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਦੀ
ਇਕ ਚੁਪ ਨੂੰ
ਸੁਣਨਾ!

ਤਿੱਤਲੀ ਸਿੱਖੇ
ਫੁੱਲ ਦੇ ਹੁਸਨ 'ਚੋਂ
ਸ਼ਹਿਦ ਚੁਣਨਾ!

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Deepak Shah 4 NOV AT 18:43

हमको ऐसे न सता दिल्ली
यूँ हमको न रुला दिल्ली!
वो तेरे
पैरों के मज़हबी छाले
हाथों में सियासी काटें
आँखों में मतलबी डोरे
और अब, सिर पर ये धुआँ दिल्ली
कभी वक़्त पर कभी ख़ुदा पर
डालते रहे तेरे हाल का जिम्मा
अब जो खुलेआम तू
हुई है अपनी जान की दुश्मन
बता किसके सिर डालेंगे 
तेरा ये गुनाह दिल्ली?

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Deepak Shah 1 NOV AT 15:42

मैं मेरा ख़ुद-निगाह, मैं मुझसे बेपरवाह
मैं मेरा हमअस्र, मैं मुझसे बेख़बर
मैं मेरा मुर्शिद, मैं मेरा मुरीद
मैं मेरा राज़दान, मैं मुझसे अनजान
मैं मेरा हबीब, मैं मेरा रक़ीब
मैं मेरा यार, मैं मुझे अग़्यार
मैं मेरा सबात, मैं मेरा ख़िराम
मैं मेरा नहीं नाम, मैं मेरा अनाम!

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Deepak Shah 30 OCT AT 18:04

हवा के सीने में
संगीत जज़्ब है जो
बाँसुरी और लब
मिल कर ही
पा सकते हैं वो

रह जाता है बस
संगीत ही मिलन में
बाँसुरी और लब
मिट जाते हैं
दो के दो

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Deepak Shah 27 OCT AT 6:31

....

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Deepak Shah 26 OCT AT 17:15

जिस तरह मेंढ़क अपनी टर्र से बता दे देता है कि बरसात आ गई है। उसी तरह भारत का पढ़ा लिखा वर्ग दफ़्तरों में भारतीय परिधान पहन कर बता देता है कि कोई भारतीय त्यौहार आ गया है।

#निराले_नियम 30

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