Deepak Shah   (DEEPAK शाह - 'ਸ਼ਾਹ')
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Joined 5 November 2017


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Joined 5 November 2017
Deepak Shah 3 HOURS AGO

I am you or
you are me,
When I look in past,
I see thou!
When you look into mirror
you say,
I saw thee!

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Deepak Shah YESTERDAY AT 13:12

Listen audios of my work on Instagram:
@deepak_shah09
Page name: ShahNama by Deepak Shah

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Deepak Shah 1 APR AT 16:11

चिट्ठियाँ खो गईं,
लेकिन
उनका पैग़ाम नहीं खोता,
न हों तेरी सोहबत के
लम्हे नसीब,
दिल से तेरा नाम नहीं खोता

वो मुलाक़ातें तुझसे
चिट्ठियाँ थीं इश्क़ की,
मेरे नाम,
ये तेरा नाम!
है मुझे इश्क़ का पैग़ाम

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Deepak Shah 1 APR AT 13:06

, लेकिन
उनका पैग़ाम नहीं खोता,
न हों तेरी सोहबत के लम्हे नसीब,
दिल से तेरा नाम नहीं खोता

वो मुलाक़ातें तुझसे
चिट्ठियाँ थीं इश्क़ की, मेरे नाम,
ये तेरा नाम!
है मुझे इश्क़ का पैग़ाम

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Deepak Shah 28 MAR AT 21:06

खाने के वक़्त पर,
आवाज़ करता है ग़रीब का घर,
मुझे भूख लगी है!

खाने के वक़्त पर,
आवाज़ करता है अमीर का घर,
मुझे भूख नहीं है!

ज़रूर! भूख की ही सीख है,
ये सभी संक्रमणों को,
कि, बस कमज़ोर को पकड़ो!

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Deepak Shah 28 MAR AT 15:05

हर इक हर्फ़
अपनी दास्तान का
बड़े ग़ौर से पढ़ रहा हूँ,
जाने किन
हर्फ़ के दरमियाँ
ख़ुद को पा जाऊँ

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Deepak Shah 27 MAR AT 18:32

अपने ही घर में,
अपनों के बीच,
ख़ुद को, क़ैद
महसूस कर रहें हैं वो,
जानवरों को,
परिन्दों को,
अपने घर में
पालने के शौक़ीन हैं जो!

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Deepak Shah 25 MAR AT 21:18

आज अपने ही घर में,
महसूस कर रहे हैं
क़ैद सी घुटन जो,
क्यों कभी अपनी
मज़हबी, सियासी, सरहदी
क़ैदों में
घुटन महसूस करते नहीं वो?
क्या ज़ुरूरी है कि बस
क़ैदखाना उसी को जानें
ईंट, पत्थर की दीवारें जिसमें हो?
अक़्ल को जो बांध ले
क्या क़ैद नहीं है वो?

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Deepak Shah 22 MAR AT 23:56

" " लेटे रहे रात भर
पीठ से पीठ जोड़ कर मेरी नींद और मैं,
गुज़रते लम्हों को गिनते रहे,
खींच लक़ीरें अपनी-अपनी
रात की दीवार पर

मेरी नींद की ज़िद्द कि ख़्वाबों पे मेरा इख़्तयार न हो,
मुझे नमंज़ूर वो नींद जिसके ख़्वाबों में भी तेरा दीदार न हो

आख़िर! मेरे इंतेज़ार में
मेरी नींद ने अपनी रात की दीवार को
लक़ीर-लक़ीर कर लिया,
तेरे इश्क़ ने, मेरी रात की दीवार को
तेरी तस्वीर कर लिया!
और यूँ ही, लेटे रहे रात भर
पीठ से पीठ जोड़ कर मेरी नींद और मैं!

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Deepak Shah 20 MAR AT 11:52

वो कहते हैं,
बाहर न निकलो,
बीमारी मार देगी

मैं जानता हूँ,
घर में रहा,
तो भूख मार देगी

मरने के सिवा चुनने को
कुछ न हो अगर, तो
भूख से मरने से बेहतर होगा
बीमारी से मरना

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