Deepak Shah   (दीपक शाह - 'ਸ਼ਾਹ')
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Joined 5 November 2017


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Deepak Shah YESTERDAY AT 17:43

is,
Being in love.

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Deepak Shah 22 MAY AT 14:03

तेरी दास्तान में
मेरी बात!
चली ऐसे,
उठ्ठी हो कोई मौज
कहीं दरिया में जैसे

ये मौज
किसी रोज़ फिर!
दरिया ही में
खो जाएगी

मेरी बात,
किसी पल आख़िर!
तेरी ही दास्तान हो जाएगी

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Deepak Shah 20 MAY AT 15:20

गहरी बातों में इश्क़
समा सकता है उतना,
पीस कर फूल
कोई सिल्ल!
महका सकता है जितना

हर बात में अपनी,
ये इश्क़,
छू ले उतनी गहराई,
जितनी हर नज़र में
नाप लें दीद
आसमान की खाई

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Deepak Shah 18 MAY AT 9:09

कोई बोल नहीं
इश्क़ में!
कोई इश्क़ की
ज़ुबाँ नहीं,
इश्क़ ख़ुद है
दास्ताँ!
कोई इश्क़ की
दास्ताँ नहीं

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Deepak Shah 12 MAY AT 16:00

बचपन हो, शोख़ी देखे
बुढ़ापा आऐ और फिर
मौत मेरे अफ़साने को

अफ़साना कहता रहे सदा ही
और हों सुनने वाले भी
तब!
बहरा है ज़माना, या फिर!
ये कह न पाया बात
ज़माने को

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Deepak Shah 11 MAY AT 19:41

अफ़साने का तेरे!
इक किस्सा हूँ
मैं भी!
ये इक एहसास, मुझे
अफ़साना बना देता है

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Deepak Shah 9 MAY AT 20:41

एक फूल,
जिस तरह,
किसी बीज को,
ज़मीन के अन्धेरों से निकाल,
आसमान की झोली में डाल,
अपने खिलने के लिए,
बना लेता है जगह

उसी तरह,
मुझे मेरी हस्ती के
अन्धेरों से निकाल,
हुस्न की झोली में डाल,
खिल जाना चाहता है
ये इश्क़!

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Deepak Shah 9 MAY AT 11:18

तेरी आँखों से पी कर हुआ है ये अदब हासिल,
'शाह' हमे अब ज़माना रिन्द नज़र आता है

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Deepak Shah 3 MAY AT 19:23

Coming soon...

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Deepak Shah 3 MAY AT 15:22

लफ़्ज़ों की ज़िद्द में जैसे
जकड़े रहते नहीं म'आनी,
इक रोज़! ऐसे ही,
तेरी आरज़ू को
इस दिल के हाथों से
निकलते देखा है

जैसे! किसी सूरज की कमी मनाती,
अपने चेहरे पर
बैठी लाखों तारे पोत रही हो
कोई रात
वैसे! तेरी हसरत के ब’अद,
इस दिल को लाखों ख़्वाहिशों पर
मचलते देखा है

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