Deepak Shah   (दीपक शाह - 'ਸ਼ਾਹ')
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Joined 5 November 2017


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Joined 5 November 2017
Deepak Shah 2 HOURS AGO

युद्ध! राजा करते हैं
दंगे! जनता करती है

युद्ध! लालच करवाता है
दंगे! बेवक़ूफ़ी करवाती है

लेकिन!
मुआवज़ा भरती है
बस जनता,
युद्ध और दंगे करने का,
ग़लत राजा चुनने का,
अपनी इंसानियत मरने का,
युद्ध और दंगे कर के!

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Deepak Shah YESTERDAY AT 12:40

दिल दिया, दीं दिया
वक़्त दिया, जाँ दी
हर एक हसरत
ज़ाहिर और पिन्हाँ दी,
जो भी मिलता है गिरहा में,
अब भी, लुटाते चलते हैं,
और! दिल कहता है, लुटाता चल!
बचा कर कहीं न हो जाए ख़सारा

तेरे इश्क़ से ही
खुलते जाते हैं इश्क़ के हज़ार रंग,
इक बार हुआ तो होता ही जाऐ
हर रंग में नया है इश्क़!
इश्क़ में होता नहीं, दोबारा!

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Deepak Shah 12 JUL AT 22:17

हमने सीखा,
उन! आँखों से,
होता है, इक लहजा
तारीफ़ का,
लाख कोशिशें कीं
मगर अफ़सोस!
वो सलीक़ा,
अल्फ़ाज़ों को
नहीं आता

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Deepak Shah 12 JUL AT 15:46

Rarely a poet is born.
Commonly people have Verbal Diarrhea.

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Deepak Shah 9 JUL AT 21:21

वो! हैरान हैं
कि क्यों मैं
लीक पर नहीं चलता?
मैं! परेशान हूँ
कि चलती हैं
पटरियों पर तो
गाड़ियाँ!

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Deepak Shah 9 JUL AT 11:52

Thinker analyses,
Lover realises.

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Deepak Shah 8 JUL AT 11:33

लाज़िम है,
मेरी हर बात का
मआनी निकले
तू!
सूरत हो कोई,
उबरता है उस पर
वक़्त ही तो
आख़िर!

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Deepak Shah 28 JUN AT 9:26

में रचयता अपना व्यक्तित्व रखता है।
में पाठक अपनी सोच ढूँढ़ लेता है।

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Deepak Shah 26 JUN AT 19:35

लाखों फूल निचोड़े, ज़िंदा!
बूँद भर इत्र बनाया
फूल महके
इत्र होने तक!
इत्र, तन लगा
एक दिन न महकाया

इश्क़!
जीता-जागता दरिया
तरानों में
कैसे ले उछालें?
लफ़्ज़ों में
कब इश्क़ समाया?

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