Supriya Mishra   (Whitebird)
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Supriya Mishra 19 HOURS AGO

ऊंची पहाड़ी से छलांग लगाती हुई
टूट कर बूंद बूंद हुई नदियां देखी हैं।

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 16 SEP AT 18:28

इक हिस्सा साहिल के सहारे छोड़ कर
दरिया डूब जाता है किनारे छोड़ कर

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 10 SEP AT 17:17

किसी की टूटी थाली के छेद
किसी के रोटी के टुकड़े हैं

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Supriya Mishra 7 SEP AT 15:48

जो आवाज़ें
दूर से मीठी सुनाई देती थी,
आज शोर हैं।
ये शहर बहुत शोर करता है।
सोना मुश्किल है,
जागना और मुश्किल।
सुन पाना, नामुमकिन।
मगर देखोगे तो जान पाओगे
ये शहर बातें करता है,
कहता है
" नहीं है
धूप में नहीं, बरसतों में नहीं।
थकना नहीं है
रास्तों में नहीं, मंजिलों पर नहीं।
डरना नहीं है
अंधेरों में नहीं, रातों से नहीं।
खोना नहीं है
झूठ में नहीं, खाबों में नहीं।"
ये शहर कहता है,
सब शोर है।

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 5 SEP AT 18:57

मेरा मानना है कि रेल यात्राएं विमान यात्राओं से बेहतर होती हैं। वो हमें एक पहर से दूसरे पहर जाने का वक़्त देती हैं। वो हमें ठीक उतना ही वक़्त देती हैं, जितना सुबह को शाम होने के लिए चाहिए होता है।
विमान यात्राएं बहुत ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाती।
उनके पास हमें देने के लिए बस उतना ही वक़्त होता है जितना कपूर को हवा हो जाने में लगता है या लगता है जितना देह को लाश हो जाने में।

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Supriya Mishra 29 AUG AT 0:17

और मोहब्बत ने आखिर किया क्या है
वजह दे दी है, बेवजह मरने वालों को

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 27 AUG AT 0:37

औरत ढूंढ रही है
साथ देने वाला आदमी
उस समाज में जहां
आदमी
सिर्फ 'छूूट' देना जानता है।

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 21 AUG AT 13:59

उस से उसे मांगा मैंने हज़ारों बार ऐसे
तनख्वाह चाहता है कोई बेरोज़गार जैसे

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 19 AUG AT 20:50

रात जी भर के रोना, सुबह खिलखिलाना
ये आसमानों ने मुझसे क्या-क्या सीख लिया

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 14 AUG AT 18:23

नदी, पहाड़, छत, गली, घर बन जाओ
बन जाओ वो जगह जहां मैं गुनगुना सकूं

- सुप्रिया मिश्रा

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