916
Quotes
7.1k
Followers
410
Following

Supriya Mishra (Whitebird)

Assistant Operations Manager at YourQuote.

Writer, Poet, Performer and sketch artist.

Follow me on Insta: Whitebird_7
Supriya Mishra 18 JAN AT 23:53

गले से गिरती शराब
छाती से उतरते हुए
रूप लेती हैं
नदी का
जिसकी हर लहर
टकराती है
यादों के
सुनसान टापुओं से।
टापू से टकराकर
लौटने वाली हर लहर
बन जाती है आंसू,
जो तोड़ देते हैं
ढांढस का बांध
और डूबा ले जाते है
अपने साथ
एक इंसान का
सबकुछ।

- सुप्रिया मिश्रा

-


110 likes · 10 comments · 2 shares
Supriya Mishra 18 JAN AT 11:18

इश्क़ को उद्धार का एकमेव मार्ग समझ उसमे डुबकी लगाने वालों का प्रेम मात्र एक समय तक सीमित रह जाता है।
प्रेम के अनंतकाल तक अमरता के लिए आवश्यक है उसमे डूब जाना। या तो प्रेम आपको अपने बहाव में बहा ले जाए या आप स्वयं तत्पर हो दुनिया में सब छोड़ बह जाने के लिए।

डुबकी ले कर घाट पर पुनः आने वाले साधु हो सकते हैं, प्रेमी नहीं।

- सुप्रिया मिश्रा

-


96 likes · 9 comments · 1 share
Supriya Mishra 17 JAN AT 13:15

Being republic to me means having the liberty to express myself. To me It's also a duty, to bring a change through my words.

Writing for the sake of pleasure is a leisure that we enjoy as a freedom to us, for which we ought to be thankful to our motherland and our countrymen.

And hence I believe, as the owner of words, it's our prime duty to help our country grow better with the power of our words.

-


Show more
75 likes · 2 comments · 2 shares
Supriya Mishra 16 JAN AT 8:48

अपना हाथ जीन्स की जेब में डाल
तुम रच देते हो
स्वावलंबन का एक चक्र
और इस तरह पूरा हो जाता है
तुम्हारा पुरुषत्व का ब्रह्माण्ड।
मैं तुम्हारे हाथों के बीच
अपना हाथ डाल
टांक देती हूं
एकादशी का एक चांद
तुम्हारे ब्रह्माण्ड में
और इस तरह
पूरा करती हूं तुम्हारा संसार।
दो ब्रह्माण्ड के होने से अच्छा है
एक संसार का होना।

- सुप्रिया मिश्रा

-


209 likes · 14 comments · 11 shares
Supriya Mishra 10 JAN AT 8:03

एक उम्र गुजर गई देखे, मगर हर्फ दर हर्फ तू ज़बा पर है
यानी दराज़ में रखी मेरी कोई पसंदीदा किताब हो जैसे

- सुप्रिया मिश्रा

-


186 likes · 16 comments · 1 share
Supriya Mishra 3 JAN AT 20:56

वो उलझी रहती है अपनी ही शाखों में
माँ को सबके भूख की चिंता सताती है।
काँच के कप में छान सूरज की किरणें
माँ हौले से कमरे का पर्दा उठाती है।

- सुप्रिया मिश्रा

-


175 likes · 9 comments · 2 shares
Supriya Mishra 26 DEC 2018 AT 22:54

मेरा कमरा बहुत ही बिखरा हुआ है
कमरे के इक कोने में आराम कुर्सी पर
पड़े हुए हैं नए पुराने यादों के ढ़ेर।
आइने के सामने खुला रखा है ज़मीर
बिखरा, गिरता हुआ।
खुशियां, ख़्वाब, सपने
सब अस्त व्यस्त हुए हैं।
बगल की एक टूटी मेज़ पर रखी है
एक बन्द घड़ी, कुछ दवाई की शीशियां और
और एक एकदम नई किताब
जिसे कभी मैंने खोलना ही ना चाहा,
किताब का शीर्षक- जीवन।
मन की दीवारों में सीलन हो गई है
अधूरेपन के जाले हर जगह नजर आ रहे हैं
आंखें बहने लगी हैं।
बिस्तर पर हर तरफ बिखरी पड़ी है
तन्हाई, बेवफाई, खौफ़, नाकामयाबी
यहां सोने को कोई जगह नहीं।
फर्श पर पड़ा दिल का एक टुकड़ा
सीने में चुभ गया है।
कोई मुझे यहां से बाहर ले चलो
मेरी ज़िन्दगी का कमरा बिखरा पड़ा है।

-


Show more
213 likes · 33 comments · 5 shares
Supriya Mishra 16 DEC 2018 AT 22:13

मैं पुरे से ज़रा सी कम हूँ,
मगर इतनी की पूरे की ज़रूरत
पूरी तरह से ना ही महसूस हो।
मेरी शुभ्रता, परिचय है मेरे धैर्य का।
मेरा आकार, प्रमाण, मेरी शून्यता का।
मैं सब नहीं हो कर भी बहुत कुछ हूँ
मैं बहुत कुछ हो कर भी सब नहीं हूँ।
मैं चाँद हूँ एकादशी का
और तूम चतुर्थी का चाँद हो।
पूजा होगी, तुम्हारी और मेरी,
व्रत भी, तुम्हारे और मेरे।
हम साथ हो कर पूनम हो सकते थे।
व्रत व पूजा हो सकती थी हमारी भी।
मगर तुम्हें मंज़ूर नहीं अपना पक्ष बदलना,
और मुझे मंज़ूर नहीं अपना पक्ष बदलना।

-सुप्रिया मिश्र

-


571 likes · 54 comments · 12 shares
Supriya Mishra 27 NOV 2018 AT 20:52

अपनी ही इक ग़ज़ल से कुछ यूँ ख़फ़ा हूँ मैं,
था ज़िक्र जिस बेवफ़ा का, वही बेवफ़ा हूँ मैं।
मुझपे भरोसा करके गलत किया बहुत
जब्र-ए-हालात के हाथों बिक गया हूँ मैं।
थी खबर ये शायद कि कहीं डूब गया वो
सब सोचते हैं इस घाट पर क्योंकर खड़ा हूँ मैं।
वो साँप से डरते रहे सुबह-ओ-शाम इस कदर
मैंने जो डस लिया है तो खुद मर गया हूँ मैं।
तू मुझसे बैर रख सज़ा-ए-जान दे मुझे
रख मुझे रकीबों में मुजरिम तिरा हूँ मैं।

-


452 likes · 27 comments · 4 shares
Supriya Mishra 25 NOV 2018 AT 13:30

अपनी ही एक ग़ज़ल से कुछ यूँ ख़फ़ा हूँ मैं
ज़िक्र था जिस बेवफ़ा का, वही बेवफ़ा हूँ मैं

-


709 likes · 45 comments · 10 shares
YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App