Supriya Mishra   (Whitebird)
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Joined 29 October 2016


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Supriya Mishra 20 MAR AT 14:36


Women's Day Special

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Supriya Mishra 12 MAR AT 21:15

मेरे ऑफिस की छत

(कैप्शन में पढ़ें)

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Supriya Mishra 12 MAR AT 19:13

Happy Anniversary to Me.

( Read caption)

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Supriya Mishra 9 MAR AT 23:37

किसी का दिया हुआ तोहफा किसी और को दिया नहीं जाता
मियां! इतने बड़े हो गए हो, क्या तुम्हें इश्क़ करना नहीं आता

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 9 MAR AT 0:57

आदम ने खोजा लौह
उससे तलवारें और तीर बनाए,
फिर बनाई बेड़ियां
और औरत को बांध दिया।
स्त्री ने उगाया कपास
उससे चादर और रुमाल बनाए
फिर बनाया आंचल
और आदम को ढांक दिया।

- सुप्रिया मिश्रा




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Supriya Mishra 8 MAR AT 1:34

घर की किवाड़ें, झरोखें, खिड़कियां
बंद क्यों, क्या घर की ये है लड़कियां?
बस दीवारें, दीवारें, दीवारें ही हैं
घुट घुट के मरते अब सारे ही हैं।
खुला घर ना बरसों, वो खंडहर हुआ
ना लगी धूप जिसको, ना पानी हवा।
खोल दो खिड़की, ठंडी हवा आने दो
लगे जाले बरसों के झड़ जाने दो।
झांक कर देखो फैला अनंतकाल नभ
ये आज़ाद पक्षी, निरंत चाल सब।
झांक कर देखो, खिलती हुई क्यारियां
झांक कर देखो, फल से लदी डालियां।
झांक कर देखो बहुत खूबसूरत है जग
यहां लड़की का होना, कहां और कब।
झांक कर देखो, गीरेबा गन्दी क्यों है
खिड़कीयों में लड़कियां बंधी क्यों है।
ये समाजों में बंधी, डरी लड़कियां
खोल दो इनको, घर की ये है खिड़कियां।

- सुप्रिया मिश्रा


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Supriya Mishra 7 MAR AT 19:10

कभी फुर्सत मिले तो
सूर्यास्त के बाद के
आसमान को देखना।
नीला रंग धीरे धीरे
नारंगी से गुलाबी
और फिर पीला होते हुए
क्षितिज की ओर
काला हुआ जाता है।
उत्तर और दक्षिण की ओर
रह जाते हैं मात्र
नीले और गुलाबी रंग,
एक भंगुर पीले रंग की रेखा से
विभाजित हुए।
जिस दिशा में प्रभातकाल का सूर्य
कुछ ही देर पहले उदय हुआ था,
वहां का आसमान अब अकेले ही
नीला रह जाता है।
इस आसमान को ध्यान से देखोगे
तो जान पाओगे
विभक्ति की दिशा
सदा अस्त होने की दिशा है।

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 28 FEB AT 12:59

And it's been continuously raining since last night.
I miss how we used to sit by the window side, cuddling, kissing, drenching into each other. It's funny how we craved for us to be together earlier every time it rained. Planning and plotting our future rain plans, like how we would stop on a late night lonely Lonavala road while it rained heavily, to kiss each other deeply, passionately. Or how, we would just dance on the terrace of 'Our Home'.

Our home, ah! Such a warmth the word already had. So many dreams, that crashed with the structure of our dream home.

Poor long distance relationship and its incomplete desires.

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Supriya Mishra 19 FEB AT 17:43

भीड़ में बैठी मैं
तुम्हें कहती हूं
'तुम्हारी कविता अच्छी नहीं
तुमने नहीं सीखा
इसे कैसे पढ़ा जाना चाहिए।
मैं कहती हूं
'आओ मैं सिखाऊं तुम्हें
कैसे लिखी जानी चाहिए
एक अच्छी कविता।'
तुम्हें देखती
क्रोध और आक्रोश से भरी
मेरी दोनों आखें
झपकती हैं,
देखती हैं एक भीड़
सोशल मीडिया पर
तब भीड़ में बैठी मैं
फिर भीड़ की हो जाती हूं।

- सुप्रिया मिश्रा

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Supriya Mishra 18 FEB AT 17:47

हुआ यूं कि मैंने
तुम्हें देने को
बोया प्यार
उसको सींचा, इतना सींचा
कि इस पागलपन से सड़ गया प्यार।
फिर मैंने मोहब्बत की बेल लगाई
उसको सहारा दिया, बांधा, इतना बांधा
कि बंदिशों में घुट, मर गई मोहब्बत।
अंततः मैंने उगाया इश्क़
इश्क़ अभी छोटा था
कि उसको खा गए शक के कीड़े।
प्यार, इश्क़, मोहब्बत
पूरी तरह जी नहीं पाते।
यहां होना तो ये था कि
मुझे बोना था तुम्हें,
सींचना था तुम्हें
जगह और सहारा देना था
फिर फैलती तुम्हारी बेलें
फिर तुम देते मुझे प्रेम
और मेरी मेहनत सफल हो जाती।

- सुप्रिया मिश्रा


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