Swapnil Tiwari   (Swapnil Tiwari)
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Poet, lyricist, script writer
Joined 31 March 2018


Poet, lyricist, script writer
Joined 31 March 2018
Swapnil Tiwari 29 SEP AT 11:06

उससे पहले भी गुम हुआ हूं मैं
उस ने इस बार खो दिया है मुझे

اسی سے پہلے بھی گم ہوا ہوں میں۔
اُس نے اس بار کھو دیا ہے مجھے۔

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Swapnil Tiwari 21 SEP AT 14:53

By considering it a myth. I just need to be in the zone, at peace with the idea of what I want to write and that's it. For me it works.

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Swapnil Tiwari 10 SEP AT 12:14

ज़मीं दुबारा बने और ख़ुदा का नाम न हो
के ' कुन ' के बाद फिर उस से दुआ सलाम न हो
زمیں دوبارہ بنے اور خدا کا نام نہ ہو
کہ ' کن' کے بعد پھر اس سے دعا سلام نہ ہو
भटकता फिरता हूं बेघर जो इन दिनों हर शाम
ये इक उदास परिंदे का इंतक़ाम न हो
بھٹکتا پھرتا ہوں بےگھر جو ان دنوں ہر شام
یہ اک اداس پرندے کا انتقام نہ ہو
वबा ए इश्क़ में शहरों पे शहर मिटते जाँय
कोई मसीहा न हो कोई रोकथाम न हो
وباے عشق میں شہروں پہ شہر مٹتے جائیں
کوئی مسیحا نہ ہو کوئی روکتھام نہ ہو
भुला चुका हूं तिरा नाम पर ये मुमकिन है
सिवा ए इश्क़ तिरा और कोई नाम न हो
بھلا چکا ہوں ترا نام پر یہ ممکن ہے
سوا ے عشق ترا اور کوئی نام نہ ہو
ये क्या कि एक ज़रा ख़ुदकुशी का दिल जो करे
तो घर में मौत का थोड़ा भी इंतेज़ाम न हो
یہ کیا کہ ایک ذراخودکشی کا دل جو کرے
تو گھر میں موت کا تھوڑا بھی انتظام نہ ہو

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Swapnil Tiwari 12 AUG AT 9:09

जिस्म मेरा है ठहरे पानी का
है मगर पैरहन रवानी का 
جسم میرا ہے ٹھہرے پانی کا
ہے مگر پیرہن روانی کا
तुम हो सूरजमुखी में बंद कहीं 
और मैं  क़ैदी हूँ रातरानी का 
تم ہو سورج مکھی میں بند کہیں
اور میں قیدی ہوں راترانی کا
नींद ! अब आ  थकन की राहों से  
रास्ता बंद है कहानी का 
نیند اب آ تھکن کی راہوں سے
راستہ بند ہے کہانی کا
ये मुहब्बत में तुम जो रोती हो 
ये ही झरना है जाविदानी का
یہ محبت میں تم جو روتی ہو
یہ ہی جھرنا ہے جاودانی کا
मेरे माशूक़ हो गए हैं गुम
हो बुरा दिल की बेकरानी का 
میرے معشوق ہو گئے ہیں گم
ہو برا دل کی بیکرانی کا

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Swapnil Tiwari 25 MAY AT 22:36

टेबल पर इक ग्लोब रखा है
ग्लोब पे इक दरिया रहता है
प्यास ग्लोब को पढ़ नहीं सकती

ٹیبل پر اک گلوب رکھا ہے
گلوب پہ اک دریا رہتا ہے
پیاس گلوب کو پڑھ نہیں سکتی

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Swapnil Tiwari 15 MAY AT 19:12

टेबल लैंप जला रहता है
कोना एक जगा रहता है
ٹیبل لیمپ جلا رہتا ہے
کونا ایک جگا رہتا ہے
थमता नहीं है दर्द का ट्रैफ़िक
मेरा ज़ख़्म हरा रहता है
تھمتا نہیں ہے درد کا ٹرافک
میرا زخم ہرا رہتا ہے
हर दस्तक बेकार हुई है
क्या इस घर में ख़ुदा रहता है
ہر دستک بیکار ہوئی ہے
کیا اس گھر میں خدا رہتا ہے !
दो लोगों के भी घर में मुझ से
कोई न कोई ख़फ़ा रहता है
دو لوگوں کے بھی گھر میں مجھ سے
کوئی نہ کوئی خفا رہتا ہے
हादसे भी होते रहते हैं
मेरा दिल भी लगा रहता है
حادثے بھی ہوتے رہتے ہیں
میرا دل بھی لگا رہتا ہے

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Swapnil Tiwari 4 MAY AT 15:21

नज़्म

कुछ शोख़ इशारों से
दरिया के किनारों से
इन चाँद सितारों से
कोई नज़्म नहीं बनती

कुछ शोख़ इशारे.. तुम
दरिया के किनारे तुम
ये चाँद सितारे...तुम
लो नज़्म हुई जानाँ

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Swapnil Tiwari 16 APR AT 11:07

हम इंतज़ार में हारे हुओं से क्या बनता
सो बस निढाल पड़े इक घडी बनाते हैं

ہم انتظار میں ہارے ہوؤں سے کیا بنتا
سو بس نڈھال پڑے اک گھڑی بناتے ہیں

तेरी तलाश में निकले हैं तो तुझे ढूंढें
ये लोग कौन हैं क्यों रौशनी बनाते हैं

تری تلاش میں نکلے ہیں تو تجھے ڈھونڈھیں
یہ لوگ کون ہیں کیوں روشنی بناتے ہیں

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Swapnil Tiwari 30 MAR AT 18:27

Earth Hour (नज़्म/نظم)
(To night 8:30-9:30)

मेरी ख़ाहिश है हर महीने में
रात इक इस तरह की हो जिसमें
शह्र की सारी बत्तियां इक साथ
एक घंटे को चुप करा दी जाएँ
शह्र के लोग छत पे भेजे जाएँ
और तारों से जब नज़र उलझे
तब अँधेरे का हुस्न उन पे खुले
कहकशाँ टूट कर गिरे सब पे
सब की आँखों के ज़ख्म भर जाएँ….

मुझ को गर इंतेख़ाब करना हो
मैं अमावास की रात को चुन लूँ
चाँद की ग़ैरहाज़िरी में ये बात
साफ़ शायद ज़ियादा हो हम पे
‘अपना नुक़सान कर लिया है बहुत
हमने ईजाद रौशनी कर के’`

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Swapnil Tiwari 20 MAR AT 20:07

इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग

कब तक चुनरी पर ही ज़ुल्म हों रंगों के
रंगरेज़ा ! तेरी भी क़बा पर बरसे रंग

खाब भरें तेरी आँखें मेरी आँखों में
एक घटा से एक घटा पर बरसे रंग

इक सतरंगी ख़ुशबू ओढ़ के निकले तू
इस बेरंग उदास हवा पर बरसे रंग

ऐ देवी तेरे रुख़सार पे रंग लगे
जोगी की अलमस्त जटा पर बरसे रंग

मेरे अनासिर ख़ाक न हों बस रंग बनें
और जंगल सहरा दरिया पर बरसे रंग

सूरज अपने पर झटके और सुब्ह उड़े
नींद नहाई इस दुनिया पर बरसे रंग

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