Swapnil Tiwari   (Swapnil Tiwari)
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Poet, lyricist, script writer
Joined 31 March 2018


Poet, lyricist, script writer
Joined 31 March 2018
Swapnil Tiwari 8 APR AT 12:42

ये दिल हज़रते-इश्क़ की रहबरी से
निकाला गया जिस्म की नौकरी से
یہ دل حضرت عشق کی رہبری سے
نکالا گیا جسم کی نوکری سے
मेरी सब गुनहगार रातें हैं इसमें
निकलते हैं जुगनू मेरी डायरी से
مری سب گنہگار راتیں ہیں اس میں
نکلتے ہیں جگنو مری ڈائری سے
अब इक ख्व़ाब उजरत हो इन रतजगों का
तेरी दीद हो आँखों की सैलरी से
اب اک خواب اجرت ہو ان رتجگوں کا
تیری دید ہو آنکھوں کی سیلری سے
मैं अपने परों को ही करने दूँ बातें
या ख़ुद बढ़ के बातें करूँ उस परी से
میں اپنے پروں کو ہی کرنے دوں باتیں
یہ خود بڑھ کے باتیں کروں اس پر سے
मेरी नींद- नगरी की सूनी ज़मीं पर
तिरा ख़्वाब उतरे उड़नतश्तरी से
میری نیند نگری کی سونی زمیں پر
ترا خواب اترے اڑنطشتری سے
कहानी सुनाएगी साहिल पे आ कर
अलाव न मांगो मगर जलपरी से
کہانی سنائیگی ساحل پہ آ کر
الاؤ نہ مانگو مگر جلپری سے

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Swapnil Tiwari 9 JAN AT 19:31

प्रोटेस्ट में शामिल हो रहे तमाम स्टूडेंट्स की नज़्र

इन्हीं की आह से इनकी सुरीली तानों से
बची रहेगी ये दुनिया इन्हीं दीवानों से
انھیں کی آہ سے انکی سریلی تانوں سے
بچی رہیگی یہ دنیا انھیں دیوانوں سے
इसी तरह से सितारा भी बन सकोगे तुम
सवाल करते रहो यूँ ही आसमानों से
اسی طرح سے ستارہ بھی بن سکوگے تم
سوال کرتے رہو یوں ہی آسمانوں سے
हवा का काम तो रफ़्तार बख़्शना था इन्हें
हवा झगडने लगी नन्हे बादबानों से
ہوا کا کام تو رفتار بخشنا تھا انہیں
ہوا جھگڑنے لگی ننھے بادبانوں سے
इन्हें बताओ किताबों में गोलियां नहीं हैं
डरे हुए हैं ये कमबख़्त कुतुबख़ानों से
انہیں بتاؤ کتابوں میں گولیاں نہیں
ڈرے ہوئے ہیں یہ کمبخت کتبخانوں سے
शिकार भी बनो उनका तो उस जगह से, जहाँ
शिकारियों को उतरना पड़े मचानों से
شکار بھی بنو انکا تو اس جگہ سے، جہاں
شکاریوں کو اترنا پڑے مچانوں سے

#InSolidarityWithStudents

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Swapnil Tiwari 5 DEC 2019 AT 17:14

तो क्या शजर ने अब इक आदमी उगाया है
ये जंगलों की तरफ़ कौन लौट आया है

ये शख़्स कैसे हरा है इसे भी काटो अब
बनों की ओर से ये बात करने आया है

ये जंगलों का हरा रंग... बादशाह ए रंग
धनक हसीन बहुत है मगर रियाया है

तमाम जंगल इन आसेबों से डरे हुए हैं
हरेक पेड़ पर अब आदमी का साया है

शजर- सराए में ही अब ठहर सकेंगे हम
हमारे पास न साया न ही किराया है

हमीं पे धूप उठाने का सारा ज़िम्मा है
हमीं ने रंग बनाने का काम उठाया है

कोई तक़ाज़ा करे, जंगलों से आए कोई
हरेक शख़्स पे क़ुदरत का कुछ बक़ाया है

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Swapnil Tiwari 26 NOV 2019 AT 16:12

तुम्हारी सिम्त से किसने अभी पुकारा मुझे
तुम्हीं थे गर तो पुकारो ज़रा दुबारा मुझे
تمہاری سمت سے کس نے ابھی پکارا مجھے
تمہیں تھے گر تو پکارو ذرا دوبارہ مجھے
ये और बात हमारे मआनी एक हैं पर
उसे बनाया गया लफ़्ज़ और इशारा मुझे
یہ اور بات ہمارے معانی ایک ہیں پر
اسے بنایا گیا لفظ اور اشارہ مجھے
न जाने कौन सी ख़्वाहिश अधूरी है इसकी
मैं टूटता हूं तो तकता है ये सितारा मुझे
نہ جانے کون سی خواہش ادھوری ہے اس کی
میں ٹوٹتا ہوں تو تکتا ہے یہ ستارہ مجھے
भंवर को देख रहा हूं मैं इस तरह जैसे
बुला रहा हो कोई तीसरा किनारा मुझे
بھنور کو دیکھ رہا ہوں میں اس طرح جیسے
بولا رہا ہو کوئی تیسرا کنارا مجھے
मैं इक थका हुआ काफ़िर हूं, और घड़ी भर को
ख़ुदा से पीठ टिका कर मिला सहारा मुझे
میں اک تھکا ہوا کافر ہوں اور گھڑی بھر کو
خدا سے پیٹھ ٹکا کر ملا سہارا مجھے

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Swapnil Tiwari 15 NOV 2019 AT 9:09

नदी की लय पे ख़ुद को गा रहा हूँ
मैं गहरे और गहरे जा रहा हूँ
ندی کی لے پہ خود کو گا رہا ہوں
میں گہرے اور گہرے جا رہا ہوں
वो सुर में सुर मिलाना चाहती है
मैं अपनी धुन बदलता जा रहा हूं
وہ سٌر میں سٌر ملانا چاہتی ہے
میں اپنی دُھن بدلتا جا رہا ہوں
चुरा लो चाँद तुम उस सिम्त छुप कर
मैं शब को इस तरफ़ उलझा रहा हूँ
چرا لو چاند تم اس سمت چھپ کر
میں شب کو اس طرف الجھا رہا ہوں
यही मौक़ा है ख़ारिज कर दूँ ख़ुद को
मैं अपने आप को दोहरा रहा हूँ
یہی موقع ہے خارج کر دوں خود کو
میں اپنے آپ کو دوہرا رہا ہوں

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Swapnil Tiwari 29 SEP 2019 AT 11:06

उससे पहले भी गुम हुआ हूं मैं
उस ने इस बार खो दिया है मुझे

اسی سے پہلے بھی گم ہوا ہوں میں۔
اُس نے اس بار کھو دیا ہے مجھے۔

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Swapnil Tiwari 10 SEP 2019 AT 12:14

ज़मीं दुबारा बने और ख़ुदा का नाम न हो
के ' कुन ' के बाद फिर उस से दुआ सलाम न हो
زمیں دوبارہ بنے اور خدا کا نام نہ ہو
کہ ' کن' کے بعد پھر اس سے دعا سلام نہ ہو
भटकता फिरता हूं बेघर जो इन दिनों हर शाम
ये इक उदास परिंदे का इंतक़ाम न हो
بھٹکتا پھرتا ہوں بےگھر جو ان دنوں ہر شام
یہ اک اداس پرندے کا انتقام نہ ہو
वबा ए इश्क़ में शहरों पे शहर मिटते जाँय
कोई मसीहा न हो कोई रोकथाम न हो
وباے عشق میں شہروں پہ شہر مٹتے جائیں
کوئی مسیحا نہ ہو کوئی روکتھام نہ ہو
भुला चुका हूं तिरा नाम पर ये मुमकिन है
सिवा ए इश्क़ तिरा और कोई नाम न हो
بھلا چکا ہوں ترا نام پر یہ ممکن ہے
سوا ے عشق ترا اور کوئی نام نہ ہو
ये क्या कि एक ज़रा ख़ुदकुशी का दिल जो करे
तो घर में मौत का थोड़ा भी इंतेज़ाम न हो
یہ کیا کہ ایک ذراخودکشی کا دل جو کرے
تو گھر میں موت کا تھوڑا بھی انتظام نہ ہو

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Swapnil Tiwari 12 AUG 2019 AT 9:09

जिस्म मेरा है ठहरे पानी का
है मगर पैरहन रवानी का 
جسم میرا ہے ٹھہرے پانی کا
ہے مگر پیرہن روانی کا
तुम हो सूरजमुखी में बंद कहीं 
और मैं  क़ैदी हूँ रातरानी का 
تم ہو سورج مکھی میں بند کہیں
اور میں قیدی ہوں راترانی کا
नींद ! अब आ  थकन की राहों से  
रास्ता बंद है कहानी का 
نیند اب آ تھکن کی راہوں سے
راستہ بند ہے کہانی کا
ये मुहब्बत में तुम जो रोती हो 
ये ही झरना है जाविदानी का
یہ محبت میں تم جو روتی ہو
یہ ہی جھرنا ہے جاودانی کا
मेरे माशूक़ हो गए हैं गुम
हो बुरा दिल की बेकरानी का 
میرے معشوق ہو گئے ہیں گم
ہو برا دل کی بیکرانی کا

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Swapnil Tiwari 25 MAY 2019 AT 22:36

टेबल पर इक ग्लोब रखा है
ग्लोब पे इक दरिया रहता है
प्यास ग्लोब को पढ़ नहीं सकती

ٹیبل پر اک گلوب رکھا ہے
گلوب پہ اک دریا رہتا ہے
پیاس گلوب کو پڑھ نہیں سکتی

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Swapnil Tiwari 15 MAY 2019 AT 19:12

टेबल लैंप जला रहता है
कोना एक जगा रहता है
ٹیبل لیمپ جلا رہتا ہے
کونا ایک جگا رہتا ہے
थमता नहीं है दर्द का ट्रैफ़िक
मेरा ज़ख़्म हरा रहता है
تھمتا نہیں ہے درد کا ٹرافک
میرا زخم ہرا رہتا ہے
हर दस्तक बेकार हुई है
क्या इस घर में ख़ुदा रहता है
ہر دستک بیکار ہوئی ہے
کیا اس گھر میں خدا رہتا ہے !
दो लोगों के भी घर में मुझ से
कोई न कोई ख़फ़ा रहता है
دو لوگوں کے بھی گھر میں مجھ سے
کوئی نہ کوئی خفا رہتا ہے
हादसे भी होते रहते हैं
मेरा दिल भी लगा रहता है
حادثے بھی ہوتے رہتے ہیں
میرا دل بھی لگا رہتا ہے

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