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!!صابن رگڑا ہے لفظوں پر یا نسخہ کویٔ سرف
میی گھولتے ہو !!
!! زبان ہے کی پوچھا تمہارا ؟ بری صفایٔ سے جھوٹ بولتے ہو !!
!! साबुन रगड़ा है लफ्ज़ों पर या नुस्ख़ा कोई सर्फ में घोलते हो !!
!! ज़बान है कि पोछा तुम्हारा ? बड़ी सफ़ाई से झुठ बोलते हो !!
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सहिफ़ा__صحیفہ-
Kisi bhi rishte ki shuruaat
Sach se honi chahiye...
Jhut ki buniyaad par
Rishte nahi tikaaye jaate...!!!-
सत्य का हमेशा साथ देती हूं l
झूठ का पर्दाफाश करती हूं l
मैं हूं कलम
मैं इस दुनिया पर राज करती हूं l✍🏻✍🏻-
हर एक सत्य जानना
भी ज़रूरी नहीं था,
ये भरी हुई दुनियां बहुत
ख़ाली सी लगती है!-
जिंदगी में कभी कभी सच भी झूठ लगता है l
इसीलिए शायद सच भी झूठ के आगे झुकता है l l-
"झूट और फ़रेब की बुनियाद पर किए गए फ़ैसले हों या बनाए गए रिश्ते दोनों ही खोखले साबित होते हैं..!!"
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Yunhi aadhi adhuri jeene lagi hun,
tumse umeed chodne lagi hun.
Kash tumne ek bar baat karliya hota,
jhuta hi sahi pyaar karliya hota.
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कभी वक़्त था कि हमारे आसुओं पर भी कसम की बंदिशें होती थी ,,
आज दरिया उफान पर है आंसुओ का ,,
सिर्फ ये सोचकर अगर रोते भी थे हम
तो हमारे साथ उनकी भी आंखें रोती थी!!
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आँचल खून से माँ का फिर भिगाया गया...
पूत - कपूत हुआ, एक किस्सा फिर दोहराया गया...
कसर नही छोड़ी बहू को बेटी बनाने में उन्होंने,
बेगुनाह माँ पर भरी सभा में सासपने का झूठा इल्जाम लगाया गया..
कमी बहू में भी हो सकती है, ये मानता नहीं कोई,
दलील पुरानी कथाओं की सुनाकर, चुप उन्हें ही कराया गया...
तिनका तिनका कर बांधा था परिवार को, हर किरदार बखूबी निभाकर जिसने,
बहू के खातिर हुआ बेटा भी अलग, माँ को वृधाश्रम का रास्ता दिखाया गया...
परिवार एक रहे इसकी कोशिश कई बार की उन्होंने,
पर कलयुगी ज़माने में सच्चाई को बेइज्जत कर रुलाया गया...
जितनी सिद्दत से बेटी, पत्नी, बहू फिर माँ का रिश्ता निभाया जिसने,
उसे हर रिश्ते के द्वारा, कई बार सताया गया....
गलती हो या गुनाह, माफ़ करके प्यार लुटाती रही अबतक,
आगमन पर बहू के माँ के प्यार को भुलाया गया...
कभी न पूछा न समझा क्या हाल हुआ ममता की चाहत का,
बस कह दिया ज़माने ने की बहू पर जुल्म ढाया गया...
फिर भी अपनी किस्मत को दोष देकर शांत बैठ जाती है वो,
मना लेती है कहकर खुद को की मेरे खुशहाल परिवार पर शायद कोई टोटका कराया गया..-
झूठ अक्सर वो ही नहीं होता जो हम दूसरों से बोला करते हैं,
अक्सर हम "खुद" से भी कई झूठ बोला करते हैं।-