*जीवन मूल्य*
हमारे जीवन मूल्यों की कहानी हमारे काम बता देते हैं!
मूल्यों की समझ नहीं होने से संबंध खतरे में पड़ जाते हैं!
जो मूल्यों को महत्व नहीं देते,अनीति करने से नहीं डरते हैं!!!
मूल्य गुणों को कहते हैं और यही चरित्र का निर्माण करते हैं!
जीवन में ईमानदार,आशावादी होने की वेद भी शिक्षा देते हैं!!
हम जिन परिस्थितियों में रहते हैं उन्हीं से मूल्य तय होते हैं!
मूल्य उन्हीं से प्रभावित होते हैं,जिन कामों में तल्लीन होते हैं!!
ये बात तय हैं कि हम मोबाईल पर काफी वक्त जाया करते हैं!
स्व-परीक्षण से मूल्य पता चल जाते हैं,जो अपने आप आजाते हैं!!
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शरीर की कई अवस्थाएं होती है
पर "मन" की एक!!
जिसे कि शायद...
भटकना ही मंजूर था।
यही सोचकर बस...
भाव गिर गए मूल्यों के
और वजन बढ़ गया शरीर का-
प्रिय अमोली,
आज घर के चिराग की चाह के लिए मुझे घर की रोशनी बुझानी पड़ रही हैं।
वैसे भी भूल तुम्हारी ही है...
क्यों आना चाहती हो जन्नत से जहन्नुम मे?
क्या तुझे पता नहीं अपने सम्मान का मोल?
तुम्हारा मूल्य इतना ही है कि
पोते को श्रीखंड खिलाने वाली दादी से तुम सिर्फ़ सूखी रोटी ही पा सकोगी
तुम्हारे शरीर की शुद्धि दुनिया के लिए अशुद्धि ही होगी
गुनाहगार तुम्हें घूरती वहशी आंखें नहीं तुम्हारा स्लीवलेस टॉप और फटी जीन्स होगी
पिया के आंगन में तुम्हारा प्यार, काबीलियत नहीं, दहेज दिलाएगा दिलों में जगह
पंख तो पाओगी आज़ादी के जिनका हर कोना कई चुहों ने कुतरा होगा
शायद तुझ पर भी नौबत आए ऐसे ही किसी अमोली से उसका "मूल्यहीन" जीवन छीनने का
डरती हूँ मैं तुझ पर इतना बड़ा कहर ढहाने के लिए
कि कहीं इसके लिए तू मुझे कोसे ना
दुनिया के जैसे..
माफ कर दे मुझे ए मासूम शख्स....
पर खुदाई तुम्हारी खुदा के पास ही महफूज़ हैं,इन जल्लादों मे नहीं.....
-तुम्हारी गुनहगार,
तुम्हारी कातिल,
तुम्हारी मां-
ये जो दर्द है मेरे सीने वो तेरा ही उपहार है
मेरे आशिकी का मूल्य तो अब भी तुम पे उधार है।-
अपने सिद्धांतों और मूल्यों में बने रहकर जिन्होंने सफलता प्राप्त किये वो ही अमर है.....
........शेष सब नश्वर-
माँ की ममता का मूल्य तुम कभी चुका नही सकते, कितना भी प्रयत्न कर लो
माँ के बिना एक पल भी तुम मुस्कुरा नही सकते।
कितनी भी मूल्यवान वस्तुएं क्यू न खरीद लो।पर माँ के बिना तुम ये जीवन सज़ा
नही सकते।-
# मूल्य #
साँसों का मूल्य पूछिए
दिल के मरीज से
अन्न का अर्थ समझिए
भूखे-गरीब से-
मूल्य जो होता तेरे साथ का तो उसे मैं चुका देता
जाते जाते मैं तेरा सारा कर्ज उतार देता-
मेरे घर की छत औ दीवार है बुज़ुर्ग,
हां मेरे घौंसले की नींव है बुज़ुर्ग,
बाहर जाते हुए,दुआ आशीर्वाद है बुज़ुर्ग,
घर आने पर सुकूं की मुस्कान है बुज़ुर्ग,
सुबह की गीता अज़ान है बुज़ुर्ग,
बाजू पर बांधा हुआ मन्नत का धागा है बुज़ुर्ग,
निराशा में कंधे पर रखा हुआ हाथ है बुज़ुर्ग,
खुशी में मंद मुस्कान है बुज़ुर्ग,
एक मासूम सी पोपली हंसी है बुज़ुर्ग,
ज़िद्दी होते हुए भी हारा हुआ मुसाफिर है बुज़ुर्ग,
जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर पहुंचा हुआ राहगीर है बुज़ुर्ग,
हमारे प्यार, थोड़ी दुलार, कुछ सेवा के अभिलाषी हैं बुज़ुर्ग,
धरती पर ईश्वर का आशीर्वाद है बुज़ुर्ग।।
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बन जाओ तुम भी ।
उस शून्य जैसे ।
और ।
जिससे भी जा मिलो ।
उसका मूल्य बढ़ा दो ।-