अगर मगर नहीं करो,
डराओ मत नहीं डरो.!
है रिक्त भाग्य का घड़ा,
लगाओ दम उसे भरो.!
है मृत्यु एक बार ही,
प्रत्येक दिन नहीं मरो.!
गलत है जो गलत कहो,
सही हो जो वही करो.!
स्वतंत्र हो स्मरण रहे,
है धर्म युद्ध तो लड़ो..!
सिद्धार्थ मिश्र
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कर्म युद्ध हैं, धर्म क्षत्रिय हैं,
हार हो या जीत तू लड़,
चाहे विजय हो, या मिले वीरगति,
तू अपने कर्मक्षेत्र से मत डर,
उठा गाण्डीव और हो जा तैयार,
पर करने दे उनको पहला प्रहार,
क्योंकि इतिहास ना कहे कभी,
कि पहला प्रहार सत्य ने किया,
असत्य को करने दे पहला वार,
इस युद्ध का अब तू कर इंतज़ार,-
जो लोग आपको खडा करेंगे वह लोग आपके सामने खड़े होंगे ( विपक्ष ) के रूप में । यही धर्म युद्ध (२४) है।
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"धर्म युद्ध"
चल पड़ी ललकार सी
आंधियों की धुंध है।
निर्बुद्ध हैं जो बुझते
ये गति अभी मंद है।
बनकर घटा सी छा रही हैं,
ये नीरज इतने तब रही हैं,
कृपाण की चमक इसे...
खुद में समाहित कर रही है।
कौरवों की नीति का ना,
ये एक तरफा द्वन्द है।
निर्बुद्ध हैं जो बुझते
ये गति अभी बंद है।-
🌷 सांवरे की मनशा 🌷
धर्म युद्ध No_3280
केशव अपनो से हारकर किसने जग को जीता मेरा जीवन अपनो मे है बीता
अर्जुन मेरे गीता उपदेशो से तुमने अब तक क्या सीखा
हे अर्जुन मैं ही हूं सर्व व्यापक वेद पुराणो मे मै ही हूं गीता
इस सृष्टि के कण कण मे मेरा वास युद्ध मे जीतता वही जिसे खुद पर हो विश्वास
जय पराजय को छोड़कर कर्तव्यो पर दो ध्यान विजय के साथ बढ़ेगा तुम्हारा यश कीर्ति मान
हे अर्जुन तुम्हारे हाथ लगा यह मौका एक बार देखो धर्म युद्ध मे तुम्हारे अपनो ने ही दिया धोखा
अर्जुन समय को ना करो व्यतीत द्रौपदी के चीर हरण का याद रखो अतीत
मनशा धर्म अधर्म मे सब जायज बस इतना याद रखो हे मीत स्वार्थ के रिश्ते स्वार्थ के सब मीत
याद होगी तुम्हे वो पीर हे अर्जुन धनुष उठाओ लक्ष्य भेद चलाओ तीर
परिवर्तन से क्या डरना तुम्हे संघर्ष है करना एक दिन सभी को मरना
जीवन का सबसे होता बड़ा वक्त गुरु
अपना पराया भूल शंखनाद और धनुष पर बाण की टंकार करो शुरू
अब सशंय ना करो ना करो कोई विचार
धर्म अधर्म के युद्ध के लिए अपने सहयोगी वीरो मे भरो हुंकार
पापियो का अंत करने का है तुम्हे अधिकार
अगर आज युद्ध ना लड़े तो इस जीवन को धिक्कार
हे केशव आपके ज्ञान से मिट गया मेरा अज्ञान
हे सांवरे धन्य हुआ मै आज अर्जुन के सारथी बनने की मनशा को किया स्वीकार
तुम्हारे रहते धर्म युद्ध मे अर्जुन की जीत होगी हर बार
12/6/23
स्वरचित_सुरमन_✍️-