Sleeping with eyes open,
nodding confidently
to everything teacher says,
taught me to daydream.-
कुछ बच्चे स्कूल की छुट्टियों के ख़त्म होने के इंतजार में हैं। छुट्टियों में उन्हें भरपेट भोजन नहीं मिल पाता।
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Like all of us... Prakash too missed his School Days..
The reason... Friends?? Crush?? Learning?? Playing?? Nah... Slightly different from Yours and Mine...
...Mid-Day Meal...
Unfortunately... His only source of Food
#Rishta_Wahi
#Soch_Reality-
मिड डे मील तो सब बच्चो का हक़ था।
शिक्षा के साथ खाना भी मिलता,
इसमें क्या कोई शक़ था।
काँधे पर बस्ता हो,
हाथों में किताब मिले
हर माँ बाप का बस यही तो स्वपन था।
पीने को स्वच्छ पानी,
बैठने को साफ़ वातावरण मिले
बस इतना ही तो सोचा था।
कुशल अध्यापक, अध्यापिका मिले
क्या ये भी मुश्किल था ?
सारे ख्वाब मुमकिन से थे जब तक
ये गरीब भ्रष्टाचार से अवगत ना थे ।
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ध्यान बोर्ड की जगह
घड़ी की तरफ..
उसकी निगाह भी टंगी थी
दीवार पर,
इंतज़ार में दोपहर के
जब घंटी बजती थी
दोपहर भोजन की
जो विद्यालय में ही मिलती थी उन्हें
और तब तक
डाँट खाने की आदत थी उन्हें....
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("ଥକାମନ ଚାଲଯିବା" ବୃତ୍ତେ)
ଆସ ସାଙ୍ଗ ଚାଲ ଯିବା
ସ୍କୁଲ୍ ଆଡେ ବୁଲି ଯିବା
ଆଜି ପରା ଶନିବାର ଖୁସିରେ ଅଣ୍ଡା ଖାଇବା
( ପୂରା କବିତାଟି ଅନୁଶୀର୍ଷକରେ ପଢନ୍ତୁ)-
'' MID DAY MEAL''
For lakhs of children, it's still the only meal of the day.-
Eating lunch of buddies
Instead of own lunch
And..
Class bunks with buddies
Was the best time of dull school-
क्या जरूरत थी मुझे इतनी जल्दी पढ़ने की
क्या आफत थी यूँ बचपन से आगे बढ़ने की,
ना मोहब्बत मिली, ना काम मिला
बेरोजगारी का लम्बा सिलसिला,
गर होता आज भी किसी "सरकारी" स्कूल में
ज्ञान ना सही, मुफ्त "खाना" और "दूध" तो मिलता।-