तुम्हारा दिल मेरे दिल के बराबर हो नहीं सकता,
वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता।
-दाग़ देहलवी-
Gar marz-e-ishq ho to tauba tauba
Kare koi,marne wale dard-e-dil ki dawa
Kare koi.-
Rukh- e- yaar ke zer- o- zabar
se mere rukh pe Shikan- o- shaan hai.
Dil ka ek hissa hai woh islye
dil-e-muztar bhi Pareshan hai.-
तुम ने बदले हम से गिन गिन के लिये
हमने क्या चाहा था इस दिन के लिये
वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसर
दिन गिने जाते थे इस दिन के लिये
वो नहीं सुनते हमारी, क्या करें
माँगते हैं हम दुआ जिन के लिये
चाहने वालों से गर मतलब नहीं
आप फिर पैदा हुए किन के लिये
बाग़बाँ, कलियाँ हों हलके रंग की
भेजनी हैं एक कमसिन के लिये
- दाग़ देहलवी
-
Ishq ka marj ho jaaye to duaa na kare koi
Mar jaaye ishq me uski nazaro me dawa kare koi-
Le chala jaan meri ruth ke jana tera
Aise aane se to behtr tha na aana tera
(Daag Dehlvi)-
मुझ सा न दे किसी को परवरदिगार दिल,
आशोफता दिल, फरेफता दिल, बेइख़तियार दिल...-
आपका एतबार कौन करे,
रोज़ का इंतजार कौन करे...
हिज्र में ज़हर खा के मर जाऊं,
मौत का इंतजार कौन करे...
अपनी तस्बीह रहने दे ज़ाहिद,
दाना-दाना शुमार कौन करे...
ज़िक्र-ए-महर-ओ-वफा तो हम करते,
फिर तुम्हें शर्मसार कौन करे...
'दाग़' की सूरत देखकर वो बोले,
एसी सूरत को प्यार कौन करे...-
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
-