युँ जो मै लिखती हूँ ,उसमे ना मेरी कोइ कहानी है!
अजी हुज़ुर,कागज़ तो पढ लिया कभी आँखे भी पढो...ये सब आपकी ही "महरबानी" है!-
शाम है पर कोई शमाँ जलाने वाला नहीं
ख्याल है पर कोई ख्याल मे आने वाला नहीं
दर्द है पर कोई दर्द छुपाने वाला नहीं
जिन्दगी जंग-ए-मैदान बन चुकी है पर सामने कोई आने वाला नहीं
प्यार है पर कोई प्यार जताने वाला नहीं
अहसान हैं उस पर बहुत कोई अहसान चुकाने वाला नहीं
अरमान गयें हैं सारे टूट कोई अरमान सजाने वाला नहीं
जिन्दगी जंग-ए-मैदान बन चुकी है पर सामने कोई आने वाला नहीं।-
वो बुलंदी किस काम की "साहब" जिस पर इन्सान चढ़े और इंसानियत से गिरे जाये !
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वो डोर उलझी सी रहती हैं हरदम
जिसे मजबूती से हाथो में पकड़
रखा है हमने
एक न एक दिन गाँठ सुलझेगी
जरूर-
बड़ी ही खुबसूरत है..,
दुनिया की महफ़िल.!
हसते हुए चेहरे,
बिखरे हुए दिल...!-
इसका न ही कोई अन्त हैं,
यह आकाश के समान अनन्त हैं,
यह एक विशाल सागर समान हैं,
जो भी कोई इस में एक बार बह गया,
वो पुनः न वापस लौटा हैं,
प्यार खुशियों भरा संसार हैं,
उसे मृत्यु का भी भय नहीं जो,
एक बार प्यार में पड़ जाऐ.........
प्यार में हम हर हद़ को पार कर जाते हैं,
हम हमारे अपनों से भी लड़ जाते हैं......
प्यार हमें हमारे हक़ के लिए लड़ना
सीखाता हैं......
प्यार बहुत ही खूबसूरत एहसास हैं।-
कई कहानियाँ अधूरी पड़ी हैं,
डायरियों में बन्द,
अलमारियों में कैद।
उन्हें पूरा करने की हिम्मत नहीं है,
या शायद शब्द नहीं हैं।
वह भी सोचती होंगी..
उनका हिसाब किताब कब होगा?
पर यूं तो लगता है कभी कभी,
हर कहानी का अन्त होना ज़रुरी तो नहीं।
कुछ अफ़साने अधूरे ही अच्छे होते हैं,
बिना रफा-दफा बिना बहि-खाता ही सही होते हैं..!!
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" दर्पण "
दर्पण परछाई को देख बोल उठा
चल तूझे छवि निराली दिखाता हूँ
तुम्हें कही दूर तलक ले जाता हूँ
ख़्वाब को तेरे शक्ल बनाता हूँ
कुछ पल के लिए ही सही तेरी परछाई
मैं बन जाता हूँ
तू भी तो जाने हकीकत में कितनी अनोखी और कितनी निराली हैं
समंदर से भी गहरी तेरी आंखें जिसमे मैं खुद को पाता हूँ
होठों पर तेरे मुस्कुराती ललिमा हैं छाई
कुदरत ने ली हैं जैसे कोई अंगड़ाई
मख़मल लिबास में लिपटी तू माथे पर न ख़ौफ़ किसी का
काली घनी जुल्फ़ो में पलको पर हया लिए फिरती हों
अंम्बर को मुठ्ठी में लिए शर्माती चलती हों
कदमों को आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ाती हों
कोई टकराए न तुमसे इसलिए ज़मी को अपना घर बताती हों
शुक्र हैं मैं दपर्ण हूँ इंसां...नहीं
गर होता तो कब का तुझे अपना दिल दे देता
और तेरी स्याही बन गया होता ।
© Pinky
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নিজের ছায়া কে দেখে কখনো ভয় পেও না।
সে তোমার এমন একজন সাথী,
যে তোমাকে ছেড়ে কখনও দুরে সরে যায় না।-