Qabul hai wo ishq
Jo ruhaani ho...!
Inkaar hai wo ishq
Jo jismaani ho....!
Bekaar hai wo ishq
Jisme beimaani ho....!!!-
दे ना सका वो चंद कागज़ के टुकड़े मौत के फरिश्तों को,
ना जाने कितनी बेईमानी से उसने जागीर बनाई थी....!-
Har nakam kosis kar li mene tujhe bhulane ki
Lagata hai Sayed esme b hum behimani kar gaye-
चलो कोई ख़्वाहिश कर ली जाए...
ज़िन्दगी का खर्चा थोड़ा और कर लिया जाए...
यूं तो बेईमानी खुद से ही कि है...
चलो कुछ ज़िन्दगी से भी कर ली जाए।-
बेईमानी पर उतर आती है,
मर्यादा लांघ जाती है,
जब भी तुम्हें लिखती है ये कलम,
कामुक हो जाती है।
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ईमान इतना ही गिराओ कि बाद में संभल सको
वरना यहां तो बेईमानों की बस्ती ही खड़ी है।-
Aasamaani tha
hamaara ishq
Woh jismaani
Samjh bethi
Woh humse
bewafaai katne ki
Galti kar bethi-
बावजूद कमियों के तुम्हें चाहते हैं,
ये नादानी हममें भी है,,
करते हैं मोहब्बत तुम्हें ख़ुद से भी ज्यादा,
ये थोड़ी सी बेइमानी हममें भी है,,
-Swati"Bindaas"
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तुम्ही कहते हो ना..
खुश रहा करो..
चाहे जैसे भी हालात हो..
देखो! कितने खुश हैं हम,
फिर क्यूँ हैं गम..
अपनी बारी आते ही,
मुकर क्यूँ जाते हो तुम..
नुमाइशें तो झूठी ही हैं
हमेशा से..
झूठी मै और सच्चे तुम...
बेईमानी है।-