हम बड़ है #पीपल है हरदम जीवट है
हमसे ही वन है हमसे उपवन हैं।
पक्षियों के उदर तले बीजरूप हम हैं
जलाऊं हैं इमारती है भोजन में हम हैं।
अदृष्ट ज्ञान भांति जड़ मूल हम हैं
और कभी यज्ञ की आहुति रूप हम हैं।
शिलाओं पर उग जाए हम हठयोगी हैं
यदाकदा दरारों में भी अपना अस्तित्व है।
विस्तार कर जाए तो चहुओर वन है
उखाड़े जाए तो खतम सजीवन है।-
कौन कहता है मैं कविता करता हूँ?
सरस शब्दों में नीरसता भरता हूँ।
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हाँ, बहुत इंतजार करना पड़ा है मुझे,
तुझसे मिलने में 28 बरस जो लगे....
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तेरी कमी खलने लगी है मुझे हर पल,
तेरी मौजूदगी दिल मे उतरी है गहराई तक!-
क्या कहें हम रखते ही नहीं खबर कौन कैसा है…
कर लेते हैं भरोसा हर एक पर अपना तो दिल ही ऐसा है।-
जिसके ख्यालो मे रह के...
मैं दुनिया भूल जाता हूँ........
मेरी एक ऐसी ही कठिन तपस्या है ।।वो।।-
तसव्वुर में तेरी,शमा जलाये बैठे हैं, याद में जिसकी परवाने बने बैठे हैं,
वो अपनी ही उल्फ़त में मदहोश हैं लेकिन,एक न एक
दिन मुलाक़ात होगी उनसे,ये जज़्बा लिए बैठे हैं।।
सनम नाराज़ है हमसे,फिर भी चाँद में चहरा दिखाई देता है,
मीठी सी यादों के सहारे जी लिया हमनें,
ये काश!उनको भी महसूस हो जाये,कि,वो अपनों से गिला किये बैठे हैं।।-
खूबसूरत नजारो की कमी नहीं थी नजरों को,
बात और है कि ये नजरें ठहर गयी तेरी नजरों पर..-
जाति- पाती, धर्म ,
रशम- रिवाज
हर भावना से परे हूं मै,
कड़वी जुबां वालों
के लिए जहर,
दोषियों के लिए कहर
और जो बरसाते है
अपनत्व की धारा,
उन सभी अपनों के
लिए सिर्फ सरस हूं मैं..
सिर्फ सरस हूं मैं.♥️✍️-
प्रभु मिलें तो गले से लगा लेना,
गुरु मिलें तो सिर चरणों में झुका देना,
संत मिलें तो कान खोल लेना, जिव्हा को लगाम देना।-