मेरे इश्क की फरमाइशें जो एक दराज़ में बंद थीं
तेरी प्यार भरी दस्तक ने वो बन्द पड़ी अलमारी खोल दिए
उजड़ी पड़ी मेरे बंजर ज़मी में प्यार का उपजना नामुमकिन था
तुम्हारी मुस्कान की बारिश ने मेरी घनघोर ज़िन्दगी में रौशनी भर दिए-
होठों का मुस्कान से रिश्ता है उसे निभाना तो पड़ेगा ही
चाहे कितना भी वो रुठे उसे लौट कर हमारे पास आना तो पड़ेगा ही-
मैं गुस्सैल गर्मी हूँ दहकती धूप सा
तुम छाया सा सुकून देती जैसे कोई आइसक्रीम प्रिये
मैं आवारा बादल घूमता फिरता एक पागल सा
तुम ठहराव हो मुस्कान भरी जैसे विचलित मन में शांति प्रिये
मैं पतझड़ में बिछड़ा कोई दर्द भरा एक टूटा फूल सा
तुम भी टूट कर चाहने वाली जैसे सुंदर प्यारी एक तितली प्रिये
मैं दाने दाने को लालहित रहता मांगता भीख भिखारी सा
तुम अन्नपूर्णा प्रेम सी खिलाने वाली जैसे कोई हो दया की देवी प्रिये
मैं "अमर" अबोध हूँ बड़ा हो कर भी एक छोटा बालक सा
तुम मुस्करा कर सबको माफ करती तुम तो दिल से बड़ी भोली प्रिये
मैं अस्तित्वहीन जीवन व्यतीत करता मानो उस वैरागी सा
तुम आस हो मिलन की जैसे कान्हा के बंसी सी मधुर धुन प्रिये-
अब और रहा नही जाता बग़ैर तेरे
वक़्त बेवक़्त बस तेरी फ़िकर का पहाड़ है सर पर
की सुनो तुम अब मान भी लो मेरी बात
तेरी धड़कनें मैं सुन सकूँ मेरे इतने पास आओ न
अब ना रहे कोई दरमियाँ तुम इतने पास आओ न
दिल करता है हर वक़्त तेरे क़रीब रहूँ
साँसों में घुल कर तेरी रग रग में बस जाऊँ
की तुम सुन लो मेरे दिल की बात
अब दिन रात मैं निहारूँ तुम्हें मेरे इतने पास आओ न
पलकों पर बिठा कर रखूँ तुम इतने पास आओ न
धड़कनें तेज़ हैं मेरी कोई पता भी करो ज़रा
कहीं उनके लौट आने की ख़बर कोई इशारा तो नही
मेरी जान को देखे एक अरसा हो चला कि सुनो
तेरी लबों से अपना नाम सुनूँ मेरे इतने पास आओ न
मखमली होठों को मैं अब चुम लूँ तुम इतने पास आओ न-
तेरे साथ लिए मुझे हर वादे याद हैं
अँगड़ाई में लिए वो तेरी बाहें याद है
इंतेज़ार में बीती वो हर दिन रात याद है
बादलों में तकते इन्तेज़ार के वो हर पल याद है
तेरी आँखों की गहराई में मेरा इन्तेज़ार याद है
कुछ न कह कर मुझसे हर बात कहना याद है
तेरी आँसुओं में वो दर्द भरी मेरी छवि याद है
तेरी प्यारी मुस्कान में नरम होठों की नमी याद है
रो कर मुझसे तेरा हर बात मनवाना मुझे याद है
तेरे नख़रे देख मुझे तेरा नटखट बचपना याद है
तेरे साथ मेरी बिती वो हर सुबह हर शाम याद है
प्यार से हाथ थाम कर मेरे कन्धे पर सर रखना याद है
मुझे देख तुम्हारा प्यार से मुस्कुराना याद है
तेरी मासूम सी निगाहों में मेरा प्यार याद है-
आता है मुझे भी हँस कर बात टालने का हुनर
बस आखिरी मुलाकात में "माँ" की भीगी आँखें भुलाए नही भुलता-
जिनके एक मुस्कान पटल में सोलह श्रृंगार सजती सँवरती उनके सूरत में क्या बात है
देख फलीभूत ये सृष्टि की हँसी फूलों सा हँसना मानो मिलती सबको जीने की नई आस है
वो हँस कर मोहे सबका मन सलोनी नज़रों की क्या बात है
मासूम सी भोली उनकी प्यारी मुस्कान जैसे चौदहवीं का वो चाँद है
श्रेयष्कर है जब उनका यूँही मुस्कुराना ग़र हँस दे तो क्या बात है
सभी दुःखों का हनन हो ऐसे जैसे सुखों का अबतो बिन बादल बरसात है
रूपवान रूपवती भी उनके काया से प्रेरित जानलो उनके भस्म की क्या बात है
सहस्त्र श्रृंगार एक तरफ़ और बिभूति में दमकता वो भोला बदन जैसे सामने बैठा पूरा संसार है
उनका हर शब्द गहन चिंतन करता मनमोहक प्यारे भोले की पूरी बात में के क्या बात है
उनके हर दिव्य बातों में छिपा सृष्टि का सार जैसे हर शब्द में बसा अमर जीवन का वरदान है-
तेरी ये जो सिसकियाँ हैं
अब मुझे भी सुनाई देता है
तु बैठी तन्हा मायूस हो
तेरी तन्हाई महसूस होता है
तेरी नयन आश्रु से भरे हुए हैं
मुझको भी अश्रु से भींगा रही
दूर हो कर हमसे तुम तो
फिर भी तस्वीर देख निहार रही
तु सितारों में तन्हा चाँद अकेली
मैं भी बादल बन भटक रहा हूँ
तेरी ओठों से मुस्कान चली गई
तेरे बिन मैं भी बिखर रहा हूँ
तुम भी रह रही हो तन्हा
तेरे बिन मैं भी अकेला हुँ
तेरे बिन बागों में रौनक नहीं
अब तेरा इंतजार कर रहा हूँ
नई किरणें फिर से खिलेंगे
फिर से नई सवेरा लायेंगे
ये वक्त जो ठीक नहीं चल रहा
फिर से नई शुरुआत कर पायेंगे
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लोग चेहरा देखते है,
चेहरे पर मुस्कान देखते हैं
पर उस मुस्कान के पिछे छिपे दर्द को कोई नहीं देखता...
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एक मेरा प्यारा सा दिल,
जो कभी तुमसे नफरत नही करता..
एक प्यारी सी तुम्हारी मुस्कान,
जो कभी फीकी नही पड़ती..
एक मेरे प्यार का एहसास
जो कभी कम नही होता...!-