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माँ सब कहते है, मैं थोड़ा बहुत लिख लेती हूँ।
सबको शब्दों में पिरो देती हूँ।
कल सूर्य की लालिमा से आज साँझ होने को आई,
लिख-लिख कर मेरी कलम भी थकने को आई।
आप को शब्दों में पिरोना..ऐ कला अभी मुझमे ना समाई,
माँ आप अदभुत हो, आप बिन दुनियां
स्वयं खुदा को भी ना भायी।
तभी कृष्ण जी ने भी दो-दो मैया पायी।-
Mumma,
Aap toh parchayi ki tarah ho jaanti hu har wakt paas nhi hote lekin aapka sath,pyar aur aashirwad marte dum Tak hota hai✨✨-
बाबुल मैं तुम्हारी ही बिटिया हूँ
मइया के आँचल की नन्ही गुड़िया हूँ
आई जो तेरे अाँगन क्यों दुखी होते हो
मेरे आने की आहट को क्यों आँसुओं में भिगोते हो
ऐसा क्या माँगा जो तुम न दे पाते हो
क्यों बाबुल तुम मुझको बोझ बताते हो
छोड़ कर आँगन जिस दिन तेरा जाऊँगी
बनकर नेह तेरी अँखियों से बरस जाऊँगी
आज तुझसे दूर सही पर उस दिन तेरे
दिल में रह जाऊँगी............-
मैने आपका नाम लेके ही ,
सारे काम किए है मैया।
और लोग समझते है,
बंदी किस्मत वाली है।।😃😃-
माँ आज कितने भी पैसे कमा लिए, बहुत दौलत देख ली,
पर माँ
मैं आज भी वो सुकून नही खरीद पाया जो तेरी गोद मे सोकर मिलता था।-
जी ले अपने हक की हर खुशी
तेरे लिए लड़ने के लिए मैं हूँ न
डरने की जरूरत नहीं है तुझे
तेरे हर डर का सामना करने के लिए मैं हूँ न-