Vely.....
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"Buddhi aur apan karm sa brahmin paig hoie chaie
Ekta brahmin jataie sabgote lel sochai chai tate kio nai
Aur haan brahmin ka ee baat kakhno nai dimag ma aabai chai ki hom uchh chi ya paig chi
Ee jawaab hunka sabka lel je kahai chatin brahmin ma ki khas baat chai
Brahmin sabde apne aap ma bhot khas chai
Aahan yadi authority position ma chi ta aahan bas apna jati ka log par dhyan dabai
Par ekta brahmin sabka lel sochai chai
Jaativad sa bhot upar soch chalai chai brahmin ka
Ta brahmin bhelai na shresta"
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Brahmin families don't eat meat. They love to eat others' freedom as dessert.
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हे विप्र सनातन परशुधर, भूतल पर पुनः प्रयाण करों।
चित्कार रहा हैं वंश तुम्हारा ब्राह्मण श्री कल्याण करो।
यह एक पक्षी समरसता वाला आरक्षण स्वीकार नहीं।
जहाँ कथित शोषित सुपात्र, द्विज को वैभव अधिकार नहीं।
हे भृगु वंशज हे महावीर, संतों के त्रास की सीमा हैं।
निरपेक्ष रहोगे कब तक, विप्रों के विनाश की सीमा है।
इन यत्र तत्र बिखरे संघों से महासंघ निर्माण करो।
चित्कार रहा हैं वंश तुम्हारा, ब्राह्मण श्री कल्याण करो।
निज त्रुटियों पर भी सुध्यान हो, भ्रष्टों पर भी प्रतिबन्ध करें।
न दहेज़ लेंगे, न देंगे, निष्ठा पर पाबंद करें,
हैं अतीत साक्षी, बाधा का, सदा निर्वाण होता है।
हर समाज अपने विनाश का स्वयं कारण होता हैं।
ब्रह जनों की ओर आ रहा निष्फल हर पाषाण करो।
चित्कार रहा हैं वंश तुम्हारा ब्राह्मण श्री कल्याण करो।
स्रोत -अज्ञात-
Jo izzat se bole asal mein vahi sriman h,
Boli kutto ki tarah ho fir kaisaa insaan h,
Pyar se mango to hatheli par Jann hai,
Hum brahmin Hain humare liye sabse pehle swabhiman h!!-
If u suffer for your nobality and helpingness,
Believe me you are on right track....
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