People don't like good Thoughts they like good Looks.
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ये सुनो सतरंज में माहिर हूँ मैं, चाल मुझे मत समझाना, अक्सर लोग चलने से पहले मुझे देखा करते है, वो वजीर हूँ मैं I
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Tum the, tum ho aur tum rahoge khaas
Chahe tum raho ya na raho mere paas-
वो इश्क होता है ना जो सच्चा होता है,
वही जो सच्चा होकर भी अधूरा रह जाता है।
हाँ बस वही हुआ था तुमसे।-
LONG BAREFOOT WALK!
It was the time of midnight,
The moon was shining so bright.
We were walking on the sea shore,
Nobody was there,just we four.[He,me,our love and the moon]
There was peace all around,
so that we could hear night's musical sound.
The blowing wind was whispering in my ear,
Hey dear!your love is with you and you don't need to fear.
While walking on the sand,
Our hands were locked in each other's hand.
And we were lost in each other's eyes,
which seemed like we have entered in some paradise.
With our every step,
some footprints followed us, which our barefeet had created.
Soon they disappeared,as a wave arrived,
But I was happy my love was there by my side.
The cool sand was busy in tickling our barefeet,
but it helped to release our stress and our feet's heat.
We were enjoying our long barefoot walk
as it was full of love and our stupid talk[s].
Our feet were dancing on the rhythm of beautiful romantic weather,
and stars were twinkling to see us together.
It was a beautiful view,-
*ज़िन्दगी*
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सांस चलने से लेकर, साँस रुकने तक आती है।
ये एक सफर है, जो ज़िन्दगी कहलाती है।
कभी खामोशी, तो कभी कहर ढाती है।
एक तमाशा है प्यारे, जो ढोल पे नचाती है।
किस्मत की लकीर कह दो, या पुरकशिश मेहनत,
बन जाये तो जन्नत, नही तो क़हर बन जाती है।
ज़िन्दगी में सुकून पाने को, हर सुबह निकलते हैं लोग,
रात में लौटने पर भी, चैन की नींद नही आती है।
रेत की तरह हर पल, फिसलती रहती है ये ज़िन्दगी,
पर लोग हैं, जो सोने के क़ब्र का ख्वाब सजाती है।-
कभी कभी बेवज़ह ही मुस्कुराती हुँ मैं,
ना जाने कितने ग़मो को छुपाती हुँ मैं..!!
राधिका🔥
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कविता,कहानियों के पाँव नहीं होते ,चुपचाप फिसल कर आ जाती है मस्तिष्क के दालान में........और नागफनी सी फन फैलायें सरकती रहती है मेरे पीछे.........अंततः मैं दबोच के बंद कर लेती हुँ इन्हें,अपने लफ्ज़ो के पिटारे में...........और फिर सम्मोहित सी ये .......थिरकती हैं मेरी धुन पे।........ #sakhi
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