अंग है अधूरा,तन है अधूरा, हमारा संग है अधूरा
अधूरी है नाम,अधूरी है शान,,
अधूरी ही है हमारी पहचान।
रीत में बुलाते है,पर घर में अधूरी पैदा लेने पर समाज से अलग फेक आते है,,
माँ के दिल के टुकड़े को उसके स्तन से दूर कहीं छोड़ आते है
अधूरी है अंग,हाँ अधूरी है तन हमारी
पर इस सोच ने कर दिया है अपंग इस दुनिया को सारी,,
इस दुनिया की रीत समझ के बाहर है,
सोच अधूरा तो चलता है,तन अधूरा तो किन्नर समझता है,,
अधूरी अंग तो हमारी है,पर इस अधूरे सोच से विभोर ये दुनिया सारी की सारी है।।
- libran
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To Save the Birth Girl Child is to save the Existence of life on the Earth
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(~~पक्षपात~~)
आज फिर मैं एक सोच से टकरा गई,
वो कपड़ों से लड़कियों को जज कर गई।
कहने के लिए वो हमें समानता का पाठ पढ़ाती हैं,
पर वो लड़के-लड़कियों में भेद याद करवा देती हैं।
कहती हैं वो जेण्डर में पक्षपात नहीं करती,
लेकिन उन्हें लड़कियों के जींस दिख जाती,
पर लड़कों के शर्ट के खुले बटन नहीं।
उनकी सोच की क्या बात करू,
लड़कें शर्ट-जींस पहने तो वो सही,
लड़कियां शर्ट-जींस पहने तो वो महापाप,
क्यो है पढ़ें-लिखे होकर ये सोच आपकी।
एक फौजी/IPS चाहे लड़का हो या लड़की,
उनकी वर्दी एक समान होती बिना पक्षपात की।
ये सामने वाले की सोच की अश्लीलता है,
जो लड़की को कपड़ों से चरित्र के तराजू में तोलते है
आदि-मानव नंग/अद्र्ध नग्न होते हुए भी सुरक्षित महसूस करती थी,
आज हम पूरे कपड़े पहनकर भी असुरक्षित महसूस करती है।
इसलिए सोच बदलने की कोशिश करें कपड़ों को नहीं,
कपड़ों में खराबी नहीं होती सोच खराब होती है।।
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Wherever we are....
We are under the same sun same moon same stars and also on the same planet
So we r all equal .-
जब एक लड़का पढ़ता है, तब एक घर रौशन होता है;
मगर जब एक लड़की पढ़ती है, तब दो घर रौशन हो जाते हैं।।-
#Antifemism #equalityofgender #hatefeminazis #internationalmen'sday
Agar shadi k baad mard ka koi parayi aurat k sath sambandh ho toh wo dhokebaaz...
Lekin wahi koi aurat ka ho toh, mard usse santusth nahi kar sakta, napunsak kehlata hai....
Agar kisi ladke ki dosti uske premika k alava uski ladki bestie se ho toh ladka chep hai...
Magar yahi koi ladki kare tob ladko ki soch buri kehlayi jati hai, hamara nazariya kharab hai...
Agar ladke apas me hi sahi kisi ladki k khubsurti ka mazak udaye toh ladke badtamiz...
Lekin jab ek ladki sab k samne ek ladke ka proposal reject karte hue uski sari izzat ki dhajjiya udati hai toh kuch nahi....
Ladkiya galiya de, nasha karna chahe aur ham mana kare toh equality ka issue ban jata hai....
Agar wahi chize ek mard tension mitane kare toh asabhya,nashedi kehlata hai...
Are mai kehta hu kyu ladkiya ladko se apne aap ko kam aakti hai aur phir apne aap ko sabit karne ki koshis me hame nicha dikhati hai...
Agar tumhe khud pe hi bharosa nahi toh apna dosh hamare pe kyu daal rahe hao,
Agar khud bhed bhav me mante ho toh samanta ki itni lambi chaodi baate kyu...-
Today while talking to myself a question arises in my mind.
Why I can't accept boys and girls equally?
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Abusive language and usage of smoking and drinks doesn't mean liberation of women. This is just adopting the wrong things of men. Liberated should be the mind and thoughts. If you are copying someone else then you are still trapped by them. How can it be called liberty?
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अगर कोई लड़की अपने घर की जिम्मेदारी पूरी करे
तो लोग ये क्यों कहते हैं
तुम तो लडके के जैसे सब निभा रही हो
"काश तुम लडका होती"
कोई उनको ये समझाये कि
जिम्मेदारियो के लिये सब समान है,इसे भेद भाव नहीं करना आता
तो फिर ये समाज क्यों नही समझता ये????-
"Equality " will be met, only
when all the genders in society are treated equally-