Aakriti Singh   (ΔLҒΔΔZ)
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Joined 22 November 2020


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Joined 22 November 2020
28 DEC 2021 AT 22:42

चलो कुछ कठिनाईयां बाटे,
कभी शाम कि थकान मैं मिटा दिया करुँगी,
तो कभी तुम मुझे देर तक सोने दिया करना,

कभी तुम शाम कि चाय कि प्याली आगे बढ़ाना,
तो कभी मैं सुबह का नास्ता पैक कर दिया करुँगी,

व्यस्त सी ज़िंदगी में,
दो पल ही सही, कभी तुम साथ वक़्त बिता लेना,
तो कभी मैं तुम्हारा मन बहला लूंगी,

मंज़िल पहुंचने के रास्ते में कभी हारा महसूस करो तो,
मुझे बता देना,
मैं हिम्मत बाँध दिया करुँगी,
तो कभी तुम इन लडखड़ाती राहों में मेरा हाथ थाम लेना,,

कभी मेरी नादानगी पर तुम हँस लेना,
तो कभी मैं तुम्हारे गुस्से पर रूठ लिया करुँगी,,,
 
पर जब बमुश्किल सी ज़िंदगी में नामुमकिन लगे सच्चा प्यार ढुंढना,
तो कभी मेरी आँखों में झाँक लेना,
मैं तुम्हारी मुस्कान पर शर्मा दिया करुँगी।।।


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4 OCT 2021 AT 18:27

वो दिशा सूरज को खा गई?,
या कहो तो सूरज ही डूब गया,,,
वो तारा चमक उठा,
या कहो तो आसमाँ ही अँधेरा हो गया,,,
वो नदी थम गई?
या कहो तो किसी बाँध ने रोक दिया,,,
रुको, देखो वो चाँद निकला
या तुम कहो तो मान लूँ,,
चाँद नहीं, धरती ही अँधेरे मे चली गई।।

-अल्फाज

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15 AUG 2021 AT 0:36

'स्वंतत्र भारत' ,,
मेरठ की गलियों से गूंजी गोलियों की आवाज़ है,
गाँधी की खादी, सरदार वल्लभभाई पटेल कि रणनीति और तिलक का स्वराज है,
'स्वंतत्र भारत' ,,
महारानी लक्ष्मीबाई, हज़रत महल और अनेक शुरवीरो के देशभक्ति का परिणाम है।   

किसानों का स्वाभिमान और फ़ौजियों का अभिमान है,
ना जाने कितने माँओं के लालो का परित्याग है,,
'स्वंतत्र भारत'
तन पर वर्दी, संसद मे आवाज, और पूरे दुनिया में देश का नाम रौशन करने वाली महिलाओंं का पहचान है।।

'स्वंतत्र भारत'
अंग्रेजो को धूल चटाने से लेकर कोरोना से निडर होकर लड़ने तक की कहानी है,
ना सिर्फ प्रेमचंद के कथाओं में परन्तु इस देश के हर एक लोगो को स्वंत्रता संग्राम जुबानी है,
आज इस आज़ादी के दिन को और भी यशस्वी तरीके से मनानी है।।



 
             
             
            

             
            
 
              

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26 JUL 2021 AT 20:06

नीली चादर ओढ़े आसमा भी सोयी है,,,
इंतज़ार है काली चांदनी की, पता नहीं आज किस रास्ते खोयी है,,,,,
उस दूर कोने में लालिमा जो बिखरी........
हाय! ये छटा देखकर मेरी मेहंदी की लाली और भी गहराई है!!!

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20 JUL 2021 AT 13:53

I'm starting to fade...
May be your colour filling in my space...

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3 JUL 2021 AT 0:31

सूरज तो है आसमां में पर दिन नहीं,
पानी से भीगी तो है धरती पर बरसात नहीं,
नजरों के सामने भीड़ तो बहुत है.....
पर इंसान कहलाने वाला शरीर एक भी नहीं!!!

शब्दों के समूहों से भरा पन्ना पड़ा है पर एक भी कविता नहीं,
ज़िंदगी के आखिरी पहर में भी इंसान को आत्मदर्शन का वक़्त नहीं,
खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखाने वाले इंसान तो बहुत है.....
पर सर्वश्रेष्ठता पर इंसानियत चुनने वाला इंसान एक भी नहीं!!!
-ΔLҒΔΔZ

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30 JUN 2021 AT 22:26

Online love has it's own beautiful love story...
We first meet online,,,
Fall in love online,,,,,
You kissed me with imogis,,,,
In my period days,Make me laugh with craziest texts,,,
In days of my resentment,your funniest face on video call,,,,,
When i'm not in mood of text,you call me just to hear my breath....
Online love teaches us how to love instead of distance....
No matter whether it is offline or online,
Love is love,no less or more,no far or close....

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25 JUN 2021 AT 16:50

हवाओं और बादलों कि लड़ाई को किसी ने थमते देखा है क्या कभी?
धैर्य रखने वालों को ज़िंदगी से हारते देखा है क्या कभी?
चलो, चलती हूँ अब दूसरे पन्ने की ओर.....
क्यों? लेखनी को एक जगह रुकते देखा है क्या कभी?

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22 JUN 2021 AT 22:14

तू मिला मुझे,मैं खुद को मिल गई..
जैसे घने अँधेरे को रौशनी मिल गई..
तू करीब आया मेरे, ना जाने मैं क्यों सहम गई..
पर कैसे बताऊँ तुझे,
तेरे दूर जाते ही मैं फिर थम गई...

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22 JUN 2021 AT 2:11

आशियां मिले ना मिले काफिरों को...
रास्ते काट लेते है!
इश्क़ मिले ना मिले हम जैसे आशिक़ो को...
रातें, तेरे ख्यालातों में काट लेते है!

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