उस दिन वो ब्रा स्ट्रिप को देखकर ,
वक्षस्थल का अंदाजा लगा बैठा ,
उसी दिन से वो हमारे लिए,
आदमी से जानवर बन बैठा !-
22 MAY 2020 AT 18:56
25 MAY 2021 AT 23:42
मेरी देह
तुम्हारी विश्रामस्थली है
जिसे तुम बरतते हो
सुख के मौसम की तरह...
पर मेरी आँखें
पीड़ा का वक्षस्थल है
जिसे तुम छू भी नहीं पाते....
@समृद्धि मनचंदा-