Zohaib Baig (Ambar Amrohvi)   (امبر امروہوی)
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Joined 17 August 2018


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Joined 17 August 2018
Zohaib Baig (Ambar Amrohvi) YESTERDAY AT 20:18

उसकी तस्वीर खींच कर क्या हो?
मेरा महबूब मेरे दिल में है..!!

اُسکی تصویر کھینچ کر کیا ہو؟
میرا محبوب میرے دل میں ہے۔۔!!

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Zohaib Baig (Ambar Amrohvi) YESTERDAY AT 17:14

जो मुसाफ़िर को कोई याद सुहानी दे दे,
या ख़ुदा दश्त को वो रात की रानी दे दे..

جو مُسافِر کو کوئی رات سُہانی دے دے،
یا خُدا دشت کو وہ رات کی رانی دے دے۔۔

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Zohaib Baig (Ambar Amrohvi) YESTERDAY AT 17:07

पर्ची वो जिस पे लिक्खा हुआ है पता तिरा,
रख कर कहां मैं भूल गया, सोचने तो दे..!!

پرچی وہ جس پے لکّھا ہوا ہے پتا تِرا،
رکھ کر کہاں میں بھول گیا سوچنے تو دے۔۔!!

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Zohaib Baig (Ambar Amrohvi) YESTERDAY AT 11:42

किस से हम शिकवा करें कौन सुनेगा नाले,
ये ज़माने के सभी लोग हैं देखे-भाले..!!

کس سے ہم شکوہ کریں کون سنےگا نالے،
یہ زمانے کے سبھی لوگ ہیں دیکھے بھالے۔۔!!

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जान जानी है एक दिन सब की,
और उसको मैं जान कहता था..!!

جان جانی ہے ایک دِن سب کی،
اور اُس کو میں جان کہتا تھا۔۔!!

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उनके झूँठे वादों से ही दिल अपना बहलाया है,
वो क्या हम को धोका देते हम ने ख़ुद ही खाया है..

कौन अचानक सामने आया कौन अभी मुस्काया है,
ख़ैर हो या रब दिल का शीशा पत्थर से टकराया है..!!

ان کے جھوٹے وعدوں سے ہی دل اپنا بہلایا ہے،
وہ کیا ہم کو دھوکا دیتے ہم نے خود ہی کھایا ہے۔۔

کون اچانک سامنے آیا کون ابھی مسکایا ہے،
خیر ہو یا رب دل کا شیشہ پتھر سے ٹکرایا ہے۔۔!!

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मीम मुहब्बत देकर सब ने शीन से शायर बना दिया,
वरना जाहिल “अम्बर” तुम बस रटते रहते अलिफ अलिफ..!!

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یہ کس جانے تمنّا کا تصّور ہم سفینہ ہے،
چلی آتی ہے استقبال کو ہر موج ساحل کی۔۔

مجھے بیگاناِ منزل سمجھتے ہو! ادھر آؤ،
میرے نقشِ قدم میں دیکھ لو تصویر منزل کی۔۔!!

ये किस जाने-तमन्ना का तसव्वुर हम-सफ़ीना है,
चली आती है इस्तक़बाल को हर मौज साहिल की..

मुझे बेगाना-ए-मंज़िल समझते हो, इधर आओ!
मिरे नक़्शे-क़दम में देख लो तस्वीर मंज़िल की..

_अम्बर अमरोहवी

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मालूम है मुझ को कि वफ़ा तुम न करोगे,
जो ज़ख़्म ना भर पायें मुझे ज़ख़्म वो दोगे..

मंज़िल है बहुत दूर तो रस्ता भी कठिन है,
क्या चार क़दम भी ना मिरे साथ चलोगे..!!

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मिरे दिल को तसल्ली देने वालों,
सुकूँ मिलता नहीं लाऊँ कहाँ से..

सियःबख़्ती का ये आलम है 'अम्बर',
बिछड़ कर रह गया हूँ कारवाँ से..!!

میری دل کو تسلّی دینے والوں،
سکوں ملتا نہیں لاؤں کہاں سے۔۔

سیاہ بختی کا یہ عالم ہے امبر۔
بچھڑ کر رہ گیا ہوں کارواں سے۔۔!!

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