YQ Sahitya  
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Joined 28 June 2018


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YQ Sahitya AN HOUR AGO

चित्र में प्रस्तुत गायक का नाम बताएं?

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YQ Sahitya YESTERDAY AT 19:55

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YQ Sahitya 15 SEP AT 19:15

तुम खा लो भले प्लेटों में
लेकिन थाली की और बात,
तुम रहो फेंकते भरे दाँव
लेकिन खाली की और बात।
तुम मटके पर मटके पी लो
लेकिन प्याली का और मजा,
पत्नी को हरदम रखो साथ,
लेकिन साली की और बात।

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YQ Sahitya 15 SEP AT 12:53

जन्मतिथि विशेष

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YQ Sahitya 12 SEP AT 10:00

कितनी आसानी से शायर ने बता दिया कि चादर की ज़रूरत ग़रीबों को है और आडंबर से ज़्यादा ज़रूरी इंसानियत है।

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YQ Sahitya 11 SEP AT 9:40









महादेवी वर्मा 
(२६ मार्च १९०७ —
११ सितंबर १९८७)

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YQ Sahitya 10 SEP AT 12:13

जातवाला : (ब्राह्मण)।-जात ले जात, टके सेर
जात। एक टका दो, हम अभी अपनी जात
बेचते हैं। टके के वास्ते ब्राह्मण से धोबी हो
जाँय और धोबी को ब्राह्मण कर दें टके के
वास्ते जैसी कही वैसी व्यवस्था दें। टके के
वास्ते झूठ को सच करैं। टके के वास्ते
ब्राह्मण से मुसलमान, टके के वास्ते हिंदू से
क्रिस्तान। टके के वास्ते धर्म और प्रतिष्ठा
दोनों बेचैं, टके के वास्ते झूठी गवाही दें।
टके के वास्ते पाप को पुण्य मानै, बेचैं,
टके वास्ते नीच को भी पितामह बनावैं।
वेद धर्म कुल मरजादा सचाई बड़ाई
सब टके सेर। लुटाय दिया अनमोल
माल ले टके सेर।

- भारतेंदु हरिश्चंद्र

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YQ Sahitya 8 SEP AT 15:40

आइए, आज पढ़ते हैं वह पत्र
जो राष्ट्रपति लिंकन ने अपने पुत्र के अध्यापक को लिखा था।

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YQ Sahitya 6 SEP AT 11:53

साल-भर सांप दिखे तो उसे भगाते हैं. मारते हैं. मगर नागपंचमी को सांप की तलाश होती है, दूध पिलाने और पूजा करने के लिए. सांप की तरह ही शिक्षक दिवस पर रिटायर्ड शिक्षक की तलाश होती है, सम्मान करने के लिए, सफल कार्यक्रम आयोजित करने के लिए

सफल कार्यक्रम तो बन्दर का खेल दिखाना भी होता है- जिसमें बन्दर लाठी लेकर ससुराल अपनी दुलहन बंदरिया को लेने जाता है. बन्दर के बंदरिया दुलहन लाने और शिक्षक के सम्मान में कोई फर्क नहीं है. न कोई बन्दर की शादी को गम्भीरता से लेता है और न शिक्षक को. दोनों ही खेल हैं. बन्दर, बन्दर ही है. और गुरु वही दो कौड़ी का 'मास्टर-वास्टर’ है.

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YQ Sahitya 5 SEP AT 11:31

हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवि शमशेर बहादुर सिंह, निराला को अपना काव्य गुरु मानते थे।
आज शिक्षक दिवस के दिन उनकी निराला को समर्पित "निराला के प्रति" कविता प्रस्तुत है।

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