Yansi Keim   (Yansi Keim)
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Joined 7 December 2016


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16 HOURS AGO

एक शायरा बड़ी, खुश-बाश नहीं
मगरूर कहीं, जज़्बात नहीं,
इल्म सही, पर बात नहीं,
बस कलम चली और रात हुई
कुछ टीस बही, कुछ राख हुई,
तकलीफ सही, कुर्बान हुई,
शायरा बनी, नामुराद नहीं ||

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14 JAN AT 7:25

तू खुशबू है जिस बाग की
मैं उसी बाग का माली हूं |
सिर्फ उतना ही ध्यान रखता हूं
जिसमें ना शर्मिंदा, ना सवाली हो ||

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10 JAN AT 3:08

जो चुप रहूं तो खूब हूं
संस्कार की मूरत लगूं |
यदि बुलंद है आवाज़ मेरी,
पर्दाफाश करें कायरों की सभी,
तो बर्बाद कहें संसार मुझे,
ढालें तलवों के तले,
चुप बनाएं, चुप कराए
इंसान, ईमान सबको मुर्दा बनाएं ||

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8 JAN AT 8:46

To face your gaze might yet be the
shyest thing.
Four years distant me is still clueless when the
truth rings.

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8 JAN AT 8:37

Those who depart do they really get apart?
They sow the affection and forget to rip it apart.
But the sown eventually comes to the surface.
One good look could tell something underneath is ablaze.

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5 JAN AT 14:39

A hybrid product that I have become,
Of Indian and American education system.

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5 JAN AT 14:31

I like to be sophisticated.
It is a means to my dissertation purpose.

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6 DEC 2021 AT 7:10

हर शाम कुछ लिखकर तेरे करीब आ जाना,
फुर्सत में मिले लम्हों को पढ़कर सुनाना,
दफ्न है जो यादें वो कभी मिटती तो नही,
हर ज़ख्म हरा हो जाता है, ज़िक्र पर तुम्हारा ||

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17 NOV 2021 AT 10:48

ज़हन में दफ्न,
हर याद तुम्हारी है |
पन्ने हो या स्याही,
फिर हर शाम तुम्हारी है ||

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17 NOV 2021 AT 8:58

जज़्बातों के रेशे,
कुछ तेरे कुछ मेरे |
ना आज, ना कल
यह उमड़े हर सवेरे ||

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