what_ever   (Moni)
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Joined 3 October 2018


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Joined 3 October 2018
what_ever 19 SEP AT 10:01

मन तो बहुत था की ज़िन्दगी के सारे गीले-शिकवे भूल कर एक बार फिर उससे बात कर लू...

(मन भी आखिर क्यों ना होता... चाय की हर चुस्की से ले कर कैफ़े की उस कुर्शी की खरखाहत में वो था)

और फिर कुछ दिनों बाद उसको भी मेरी याद आयी...
खुश तो बहुत थी मैं... लेकिन दोबारा खुद को खो,' उसकी पहचान बना दू, वैसा अब मेरा ज़मीर नहीं।

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what_ever 19 MAY AT 3:32

इस खूबसूरत एहसास के चक्का मे, एक लड़िए ख़ुद से ही हो गए...
अपने सारे उस सपनों में, बाबरी सी हो, तेरा एहसास भारती...
मानो बहती तेरे एहसास के दरया में किनारा तेरे बाहो का ढूंढती...एक लड़िए खुद से ही हो गए...
क्यों तेरे चाह मे मैं नहीं और तुझे ना' चाहना मेरे वश मे नही...।
इस प्यार और एहसाह की दरया में, 'एक एहसास एक प्यार' खुद के लिए ढूंढते, एक लड़िए खुद से ही हो गयी...

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what_ever 14 APR AT 1:28

'रूप' से भी मोहक कोई रिश्ता होता है, उसे "प्यार" कहते हैं।
"और"
'धन' से भी बड़ी कोई जमा-पूंजी होती है, उसे "सम्मान" कहते है।

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Most necessary things for life❤️

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what_ever 28 MAR AT 3:03

वह बेवक्त सा एक वक्त ही था जो बीत गया....
अरे वो राही, क्यों तोड़ता मारोरता हैं ख़ुद को उसके यादों मे...
क्यों कुछ लम्हों के लिये खोता है, खुद का आज और कल...
क्यों ना वो राही तु मान लेता-
"ज़िन्दगी के कुछ पन्ने जो सबसे हसीन थे, वो कभी दाग भी बन सकते है"
क्यों ना वो राही तू मान लेता, वह वक्त बेवक्त ही था जो बीत गया...

क्यों ढूंढ़ता नहीं खुद को वो राही तू आज के पन्नो में...
बेवक्त अगर वह वक़्त, वो राही, वह वक़्त तेरा होता तो आज वो बस यादों मे ना होता बल्कि तेरे आज में भी होता...
क्यों ना खुद को संभाल कर, राह तू आज का चुनता है
"इससे पहले की आज, कल की राह चुन ले"
क्यों ना वो राही तू चुनता है खुद को 'इस वक्त' को
क्यों नहीं तू मान लेता, वह बेवक़्त वक़्त ही था जो बीत गया...
"क्यों ना तू दाग छोर, चाप छोड़ने की ओर बढ़ता है!!!"
क्यों ना वो राही तू अपनी राह चुनता है...!

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On demand- देवनागरी लिपि💕
#findyourself
#findyourpath
#yqbaba

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what_ever 14 MAR AT 16:36

Tasbiro ki hore mein...
(Ye nhi, pahli wali Jada acchi thi)
Wo nadan, ye v nhi smjh paya ki...
Mere pasand bus uski tasbire nhi, wo hai❤️

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what_ever 5 MAR AT 11:12

Haan, manti hu...
khushiya batne se badhte hai...

Par, agar Kahi is dein lein ki duniya mein...
Aapko koi aisa mile jo aapke dukhon mein khushiya dhund ke de de...

Tab, aap smjh Lena ki apko Apne duniya mil gye...aapko apni saathi (MATE) mil gya❤️

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what_ever 1 MAR AT 1:41

Kyu hai ye, 'ye zindagi...'
Kici ka hona aur fir kho Jana...

Àakhir kyu, 'ye zindagi...'
Kal ka milna, aaj ka Durr Jana nhi dekhata...

Agar, kushiya gum ki parchaye Hoti hai toh kyu 'ye zindagi' hota hai kushiya ka he aana...
Agar, 'ye zindagi' tera rit he hai ek din kho jana toh fir kyu hai tera aana...
Kyu, Kici ka hona aur fir kho Jana...

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what_ever 2 FEB AT 2:52

Jahan izzat he nhi...
Aakhir waha Pyar kaise dhunde...!

Bhago mein aise phul Ko he kya khilana, jise koi aur bus Apne matlab ke liye kuchal de...
Aakhir, Kyu Na khaid he rakhe kuch armaan, sayad sab-kuch kho dene se accha toh kuch na pane ki chah acchi hoti hai...

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what_ever 26 JAN AT 11:47

Agar kabhi sari geliyan se Gujar kar v,
wo pahla Makan yaad aaye...
'AUR'
Zindagi ki sari 'baharon aur chamakti tasbiro' Ko chor kar,
agar kabhi un* dhundali yaadon mein khud Ko chamakta hwa pao...

"Toh, Please Laut aana..."
'kyuki', Kahani Abhi v khatam nhi hwe hai...
Kyo tere raahon pe apni negahen chor aaya hai...
Durr bathe tere un* purani 'Yaadon aur tere Waadon' mein,
Apne sapno se, roj naye rang bhar Raha hai...
Tere bus kuch panno se apni puri kittab likh batha hai...

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what_ever 15 JAN AT 11:46

Tere taraf se toh AB kuch v nhi hai na...
"Toh fir kyu"
Agar sochu tera 'Na hona' mere Zindagi mein toh, mujhe khud ka he 'Na hone' ka Ehsas delati hai ye zindagi'

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