Vandana Jangir   (वन्दना)
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लिखना सुँकून है और अब आदत है।
Joined 6 February 2020


लिखना सुँकून है और अब आदत है।
Joined 6 February 2020
29 NOV AT 19:17

मेरे हालातों पर रहम करिएँ
मुझ पर तरस ना खाईएँ । ।

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28 NOV AT 13:30

केवल
उस व्यक्ति से
हम अपने सपने
साझा करते हैं,
जिन्होंने
हमारे दु:खों
को आधा
बाँटा है।

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26 NOV AT 20:27

ये सब मुझे रूसवा करके जाएंगे ।
किसी को सच नहीं कहना मुझसे।।

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25 NOV AT 16:31

लड़ा केवल
उस व्यक्ति
के लिए जाता है
जिसने
आपके प्रेम का
अपमान
नहीं किया।

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24 NOV AT 14:33

ये सारे मसलें उसके साथ क्यों हैं
कोई हमारा भी टूटा दिल देखें ।।

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24 NOV AT 1:17

अज़ाब बने हुए कुछ हर्फ़
रूह में गढ़े हुए
ना रिसता लहूँ
ना पकती मवाद
इलाज़ बस एक
प्रेम में डूबे शब्द ।

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24 NOV AT 0:57

उसकी आँखों का क्या क़सूर कहूँ
मैंने एक दफ़ा तारीफ़ की थी । ।

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24 NOV AT 0:49

बता दूँ सारी हक़ीक़त तो इरादें अपने बेआबरू कहाँ छुपाओंगे ।
कुछ नहीं रक्खा इन बातों में तुम आदमी बहुत बुरे बताएँ जाओंगे।

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24 NOV AT 0:32

जिनको लिखना आता है,
उन्होंने लिखना छोड़ दिया।
वो सबसे बड़े अपराधी है।

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12 NOV AT 12:22

उसे चाय पसंद है बिलकुल मेरी तरह। रंग सारे पसंद है लेकिन सफेद रंग ज़्यादा पसंद है मेरी तरह। कभी-कभार मेरा लिखा पढ़ लेता है। वो ख़ुद भी लिखता है।
मेरी हिन्दी साहित्य की टीचर कहती हैं,"हमें तो कहते हैं लिखों मत। दिल की बात दिल में छुपाकर रखों। सबको 'चेतन भगत' नहीं मिलतें।

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