Vandana Jangir   (वन्दना "निर्मोही")
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🌺No copy paste
Joined 6 February 2020


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15 JAN AT 18:22

सबको अपना दिल, दिल लगा,
और हमारा दिल, लगा पत्थर।

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11 JAN AT 9:39

इससे ज़्यादा मेरा क्या बुरा करेगा।
तू मरहम ना कर,वक्त ज़ख़्म भरेगा।।
कैसी बातें सुन रखी है तूने मेरे बारे में,
हर कोई कहता है,तू सिर्फ़ मेरी सुनेगा।।

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10 JAN AT 21:24

नहीं सँभलना मुझे, बिख़रा ही रहने दो।
सुना है,
टूटे हुए लोगों को ये दुनियाँ ज़्यादा प्यार करने लगती है।

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5 JAN AT 16:21

बद्दुआ लग जाती है दिल दुखाने की।
भीड़ लगी है झूठे ज़ज़्बात जताने की।।
कोई नहीं समझता यहाँ हाल-ए-दिल...
हर किसी को आदत है दिल बहलाने की।।

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4 JAN AT 20:16

कुछ बंदिशें लगा दी हमने ...
जो इश्क़ में है,वो दूर रहे हमसे ।।

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3 JAN AT 14:10

तोहमतें लगती रही है मुझ पर,
तुम एक और इल्ज़ाम दोगें तो कौन-सा गुनाह है।
सबब पूछते हैं सब तेरी बेवफ़ाई का,
मैं मेरा नाम ले दूँ तो कौन-सा गुनाह है ।।

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31 DEC 2021 AT 18:26

ज़िस्मों की तिज़ारत में ख़ुलूस ढूँढते हैं।
यार मेरे आँखों में सच्चाई तलाशते हैं ।।

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29 DEC 2021 AT 12:13

अज़नबियों पर भी ऐतबार करने की आदत रही ।
धोख़ा खाने के बाद फ़िर मौंका देने की आदत नहीं।।

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28 DEC 2021 AT 18:39

नाज़ुक दिल वाले रो देगें,सब ये सोचकर दिल दुखाते हैं।
हर दर्द का हिसाब है उस ख़ुदा के पास, ये भूल जाते हैं।।

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28 DEC 2021 AT 12:47



फ़क़त तुम-सा कोई ना देखा रियाकार ......
लोग तो बहुत देखें एक से बढ़कर एक अदाक़ार ।।


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