Vaidehi Rajput   (@_उन्मुक्त_चित्त..)
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कलम की नोक हूँ
शब्दों की तोप हूँ
जरा बचके जनाब
पूरे करती हूं हिसाब..
Joined 20 January 2019


कलम की नोक हूँ
शब्दों की तोप हूँ
जरा बचके जनाब
पूरे करती हूं हिसाब..
Joined 20 January 2019
Vaidehi Rajput AN HOUR AGO

कार्तिक कृष्ण पक्ष दशमी हुआ प्रीतम आहट
राधिका-गोपिण सहित आ पहुंची जमना तट

महारास का विहंगम सदृश्य अनुभव करें
अनुशीर्षक में पढ़ें

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Vaidehi Rajput 3 HOURS AGO

शीत-वयार पुरवा-पवन मन-तन तन-मन अगन अगन
प्रतीत-अपार नभ घनन-घनन घन-घन घटा घोर सघन
प्रीत मन-तन अंग-संग अति विहंग हित नीत स जतन
मनन सघन हनन जतन हर्ष सहर्ष रीत निज परिवर्तन
तमम-तमम शमम-शमम वयम-अयम धरम आवर्तन
चन चन घन घन नभम नभम तमस सौदामिनी गर्जन
तन-मन हिय-उत्कंठित शीत-प्रीत अवशोषित अर्जन

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Vaidehi Rajput 5 HOURS AGO

मैं भारतीय अर्थव्यवस्था में ग़रीब मजबूर असहाय कुम्हार
मिट्टी में लोट-पोट कर प्रदान करता हूँ भिन्न-भिन्न-आकार
दिवाली हमारे यहाँ हो साहब दीपक बनाया अनेक प्रकार
आपकी आधुनिकता में चीन लूट लेता है हमारा अधिकार
मिट्टी में लोट-कर मर जाती है हमारी उत्कंठा यूँ निर्विकार
हाँ साहब तुम आधुनिक-दिवाली-मनाओ-चीनी से अपार
छोटी-आँखों वाले लूटेरों ने ठप्प कर दिया हमारा-व्यापार
बस-नाम-मात्र की परंपरा किसी को नहीं है मिट्टी से प्यार

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Vaidehi Rajput 6 HOURS AGO

भूख और ग़रीबी में मित्रता-होती है बहुत-करीबी।
अत्याधुनिक-सुविधाओं के साथ जीती है अमीरी।।१
जात-पात धर्म मजहब नहीं जीवन मात्र-तंगहाल।
उस-पर से वस्त्र हैं मेरे कतरन-जोड़कर-फटेहाल।।२
दाना-दाना को मोहताज दिन-रात है हमें-कमाना।
तुम कचरा फेंकना हम चुन बेचकर खाएंगे खाना।।३
कुछ वस्त्र फेंक देना ठंड में हमारे प्राण यूँ न लेना।
हम जैसे को पड़ता है ठंड में ठिठुरकर प्राण देना।।४

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Vaidehi Rajput 8 HOURS AGO

देदऽ दानी देदऽ दान
घट घट निकलल जाये पराण
देदऽ दानी देदऽ दान
जिनकर दान उनकर सम्मान
देदऽ दानी देदऽ दान
अन धन घर भर जाये समान
देदऽ दानी देदऽ दान
दान समान नाही दोसर काम
देदऽ दानी देदऽ दान
दुखिया के करऽ मदद अपार
देदऽ दानी देदऽ दान
भूखल के भरऽ पेट अनाज
देदऽ दानी देदऽ दान
दान करऽ दानी तोहे परणाम
देदऽ दानी देदऽ दान

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Vaidehi Rajput 12 HOURS AGO

उसके गठीले बांह पर्वत और चट्टान समान नज़र आते हैं
हिमालय है या विंध्यांचल के उसमें प्रमाण-नज़र-आते हैं
मुख श्यामल घनघोर घटा जैसे आकाश में नज़र आते हैं
भूमि पर पग अडिग जैसे सारे समुद्र साथ नजर आते हैं

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Vaidehi Rajput 13 HOURS AGO

घट-घटी नट-नाट्य कण-कण शिव-शंभू।
गंगा तटी द्वीप शीप भरत खंड द्वीप जंबू।।१
हिमगिरि अविनाश संन्यास कैलाश-वास।
नटाधीश नटराज अहम्-परम् लेख आस।।२
सुंदर-कुटुंब अति भूत-पिशाच गण-साथ।
तात-भ्रात मात-पितृ मित्र सर्व सृष्टि-नाथ।।३
गञ्ज-विजया मातुल-कंद पीसकर-खाय।
कालों के काल महाकाल वशीभूत समाय।।४

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Vaidehi Rajput 22 HOURS AGO

सकुचाई-छुईमुई वैदेही कमलनयन श्रीराम
सुमंगलम्-सम-बेला में गणपति को प्रणाम
जानकी शनै: शनै: चलैं जयमाला पहनाऊँ
मुखारबिंद-श्रीराम देख के बलिहारी-जाऊँ
सुमन-महुरत धवल साज्य सपदारथ आज
हरि-लोचन सीया-नयन सहस प्रीत सुसाज
सीय-हे धीरे-धीरे जाऊँ जयमाला-पहनाऊँ
नवल किशोर दशरथनन्दन बलिहारी जाऊँ
पग पंकज मोती रचिर रुचिर-सुचिर श्रीराम
हे सीता अब करहूँ गिरिजा कुलदेवी प्रणाम
जनकनंदिनी रुक जाऊँ जयमाला पहनाऊँ
कौशल्या-पुत्र अवध-कुमार बलिहारी जाऊँ

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Vaidehi Rajput YESTERDAY AT 18:31

कण कण में वास है अंग अंग निवास है
क्षण-क्षण समास है मन-मन विश्वास है
गोकूल का छोरा बरसाने की गोरियां है
छलिया-सलोना गोपियां-दम-दमात है
मिलन आधा-आधा प्रीति की श्वांस है
शतदल-समिधा हर-पल में वयास है
उर्ध्यपूंड्र तितक कमलनयन साथ है
ढोलक मृदंग-संग बाजत यंत्रतंत्र है
राधारानी-झूमें-कृष्णा-जी-पास-है
नभ-सभ दिव्यम्-पुष्प-बरसात है
ब्रह्मा-शिव नतमस्तकम्-आज है
नारद सारद पधार मधुर साज है
यही महारास है यही महारास है

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Vaidehi Rajput YESTERDAY AT 16:57

अयि शिव-शंकर जंतर-मंतर कंठन-रुंड-मुंड धारयते
शिखर-शिरोमणि तुंग हिमालय कैलाश निजालय गते।
भगवन् हे प्रभू कुटुंब-समाहित पार्वती सहस्थ रासरते
जय जय हे शिवम शिवोहम नमः शिवाय कृतार्थ कृते।।१

भक्तसंगमम् दृश्यविहंगम् भूत-पिशाच गण सहस रते
काल महाकल हाल समाकल विकल सकल उमापते।
भक्तपोषित तक्तविमोषित सहससमोषित विपुलसते
जय जय हे शिव-शंभु वृतांति आदि-अनादि सतिपते।।२

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