UTKARSH KRISHNA   (Manyavar writing:-$)
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Joined 25 June 2018


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UTKARSH KRISHNA 13 AUG AT 20:57

💞💞

In this past year
Something changed
Some remained same

Sometimes we sacrificed
Sometimes we compromised
Sometimes we fought
Most times we loved

But this past year
Taught me the
Actual form of love...❤️

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UTKARSH KRISHNA 11 AUG AT 10:58

ऐसी कश्ती में नौका हम अपनी चलाते हैं ना हक में हवाएं हैं ना ही कर पाते हैं
अलग ही मज़ा है इस जर्जर सफर का जिंदगी जी नहीं पाते हैं बस काट ले‌ जातें हैं

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UTKARSH KRISHNA 24 JUL AT 17:43

संभल कर चलना पड़ता है उन रिश्तों में जो होते हैं अनमोल
नहीं पता कब मांग बैठें अपने अनमोल होने का मोल...

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UTKARSH KRISHNA 14 JUL AT 12:35

Respect with trust is the soul of relationship..
You need to be very mature to handle any
kind of difficult and long distance relationship..

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UTKARSH KRISHNA 28 JUN AT 8:58

उस रस्ते पर मेरी जिंदगी संग जिम्मेदारी हो आप

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UTKARSH KRISHNA 25 JUN AT 10:49

बिन‌‌ बताये सजाकर ख्वाब दिल ने की कुछ ख्वाहिशें पूरी
आपको पलकों पर बैठाने की खातिर ना ली किसी से मंजूरी..
आये हैं जबसे जिंदगी में आप से हैं जिंदगी के मायने मेरी
रूह से लेकर जिस्म तक कहे यही है गूरुर-ए-जमीं तेरी...

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UTKARSH KRISHNA 15 JUN AT 10:09

नज़रों में सभी के आपका अच्छा हो जाना वैसे है जैसे सीप के मोती ले आना
सोच की गहराइयों में जिंदगी बिताना सबके बस में नहीं होता ऐसा कर पाना

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UTKARSH KRISHNA 28 MAY AT 12:17

हो जाओगे गारत सभी खुद की नजर में , अना के फरेबी पर्दे हटा कर तो देखो
रिश्ता है रूह से गहराइयों की ना सोचो , बचा दी सर की पगड़ी संभालो सहेजो

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UTKARSH KRISHNA 20 MAY AT 15:15

खुदा ने बख्शी नेमतें पर ना जाने क्यूं वो इम्तिहान ले बैठे
जब तक सम्भालते हम खुद को वो दर्द-ए-तमाम दे बैठे...
थी ख्वाहिश गटकायेंगे पिंकी वोडका उनके साथ में कभी
पर हम तो होंठों को छलकते आंसूओं का खारा जाम दे बैठे...

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UTKARSH KRISHNA 4 MAY AT 10:45

एहसान मान ए जिंदगी जो रखते हैं खुद को गिरवी तेरी जिम्मेंदारी के बाजार में.
वर्ना करूं हिसाब तो तू कर्जदार है हमारी खड़ी नजर आयेगी नीलामी के कतार में..

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