इंतज़ार के बाद भी इंतज़ार किया है मेने..
नफरत के बाद भी तुम्ही को याद किया है मेने,
चेहरे बदलने की आदत नही थी शायद मेरी..
इसीलिए बदलते चेहरों में भी उसी चेहरे से प्यार किया है मेने।-
आख़िरी खत...
दिल मे तुम्हारे एक ओर रिश्ते की जगह है क्या..
हमारे बीच जो हुआ,
तुम्हारे पास उसकी कोई वाजिब वजह है क्या...
में इस कहानी को इस तरह तो अंजाम नही देना चाहती थी,
में थोड़ा वक्त ओर ज़रूर लेना चाहती थी..
पर तुमने भी तो ये सब बहुत खामोशी से होने दिया..
में रो रही थी तन्हा वहा,
ओर तुमने रोने दिया.
फैसले सारे तुम्हारे थे,ओर इल्ज़ाम मुझपे लगाया..
हर जगह तुमने मुझे कितना गलत ठहराया,
पर सफाइयों से बहतर में अब चुप रहना चाहूंगी,
ओर तुम ही सही थे में सबसे ये कहना चाहूंगी..
वैसे बात दु...,
इस खेल में मैने बहुत कुछ खोया है,
ओर मुझसे जुड़ा हर शख्स इस दरमियां बहुत रोया है।
खेर......
तुम बेफिक्र रहना में तुमसे नफरत करना कभी नही छोडूंगी,
ओर तुम तो तोड़ चुके हो एक रिश्ता
लेकिन जनाब ये वाला में कभी नही तोड़ूंगी।👍-
मुखोटे हटे तो आज
कुछ चेहरे साफ नजर आए मुझे..
जैसे अब तक तो भर्म में थी।-
महज नींद टूट जाये तो दुबारा लगने में वक्त लग ही जाता है,
फिर यहाँ तो बात दिल की आ गई है....
तो सोचिए कितना वक्त लगेगा।-
ख्यालों में यूँही तेरा अहसास कर लेती हूं,
तेरी तस्वीर देखकर अक्सर तुझसे बात कर लेती हूं
ओर तुझे महसूस भर करने के लिए.....
में अपनी सारी हदें पार कर लेती हूं
अब तेरा आना तो नामुमकिन है,
पर इन्तज़ार में तेरे में अब भी घंटों बरबाद कर लेती हूं।-
कल मेने दिल को ही अपना दोस्त बनाया
ओर बैठा के सामने पूरा माज़रा समझाया,
की गया हुआ शख्स लौटा नही करते,
हर बात पे यूँ रोया नही करते
बातों को यूं गले से ना लगाया करो,
तुम भी दुनिया की तरह पल भर में भुल जाया करो
थोड़ा मुश्किल है में जानती हूं
तुम्हारी सारी बात मानती हूं
पर यूँ खामोश रहना सही है क्या
तुमने जिसे चहा था ये वही है क्या,
जाने भी दो...
क्यों इतना सोच रहे हो,
क्यों खुद को खरोच रहे हो,
सुनो....
अब तुम बिल्कुल समझदारी से काम लेना,
जो सही हो वो वक़्त रहते बात देना।
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