Upasana Gupta   (Upasana)
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Joined 23 September 2016


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Joined 23 September 2016
18 HOURS AGO

Out of the 1000 thoughts on my mind
I choose to write the one
Which I am not even thinking about.

And they still think, they can read my mind
By what I write.

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19 HOURS AGO

And here I am
Thinking about you

On December 1st
The first day of the last month.

I wonder, if you ever think of me
On any day of any month.

And we both know the answer.
Like we did, earlier.

Season change, Months change.
You & me, stay the same.

-


19 HOURS AGO

The time, after 2 am, is magical.
And only the ones, with love in their heart
& fire in their soul, can feel the vibe.

-


19 HOURS AGO

The time, after 2 am, is magical.
It's silent,
Yet speaks a lot.

It's the time, when your heart takes over your mind

It's the time, when desire takes over the limitations.

It's dark, yet inspiring.

On some nights, it's heart breaking
Where as, on some, it's healing.

The 2 am, is vulnerable, yet has the strongest feelings

The 2 am, is pure,
And to feel the essence of that mystical time

You should have a heart
Full of love, and
Soul full of fire.

And maybe then
You can actually feel
The magic of 2 am.

-


29 NOV AT 19:50

Sometimes, you don't know
What are you fighting for
And why.

And sometimes,
You just want to crawl on the bed
And wish for it to be over soon.

-


23 NOV AT 23:48

Main dhoondh lungi tumhe
Tum bas ek bar aawaz to do.

-


23 NOV AT 23:21

इक घुटन सी है
जैसे कि सांस लेना भी मुश्किल हो
कुछ सोचों तो आंखें भर जाती है

कभी लगता है
शायद ये एक बुरा सपना हो
और मैं शायद अब जाग जाऊं
कभी कभार खुद को चुटकी ली कर भी देखी
सपना नही है, हकीकत है

कभी कभी सोचती हूं
कुछ बदलता भी है क्या
या ज़िन्दगी यूँ ही गुज़र जाती है

ऐसा लोग बोलते तो हैं
कि धीरे धीरे सब ठीक हो जाता है
मगर, कितना धीरे
सालों तो बीत गए, उम्र बीत गई

ये घुटन तो अभी भी है।
जैसे अस्तमा हो गया हो।

-


21 NOV AT 23:33

तुम उस ख़्वाब से हो
जो ख़्वाब देखना मैंने अब बंद कर दिया

तुम उस रास्ते से हो
जहां अब आना जाना नहीं होता

तुम उस पते की तरह हो
जो कभी मिला ही नहीं

तुम उस ज़िन्दगी से हो
जिसे ना जी सके और ना ही छोड़ा गया।

-


19 NOV AT 0:32

अमावस की रात थी, हर तरफ बस अंधेरा था,
और थोड़ा सा उसके दिल के अंदर।
खिड़की से झांकते हुए उसे सड़क की ओर जाते सैकड़ो लोग दिखे।
कोई अकेला जा रहा था तो कोई किसी के साथ।

लोगों को घर की ओर जाते देख,
उसे याद आया कि उसे भी घर की तरफ निकलना चाहिए।
दुकान की लाइट्स बंद करके वो जैसे ही बाहर की तरह बढ़ी
इक जाना पहचाना चेहरा सामने खड़ा था।

एक लम्हे को उसके चेहरे पर उसे देख कर सुकून आया
मगर अगले ही पल,
उसे वो बातें याद आई जो आज दोपहर को हुई थीं।

कितना आसान होता है,
कुछ शब्द बोल देना और ये भी नही सोचना की उसका प्रभाव क्या पड़ेगा।
वो जैसे ही सिर झुका कर आगे बढ़ने को हुई,
उसने उसका हाथ पकड़ा और बोला

घर चलें।

और फिर ना जाने क्यों ,
सुबह का सारा गुस्सा, तकलीफ जैसे छूमंतर हो गई।
शायद घर ऐसे ही तो बनते हैं।

-


18 NOV AT 14:07

ये हुनर है हमारा
कि हर काम हम
नज़ाकत से करते हैं

उनसे इश्क़ करना हो
या खुद से मोहब्बत

हर काम हम शराफत से करते हैं।

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