Tarkash Pradeep   (Tarkash Pradeep)
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An Artist and an Educator
Joined 7 December 2016


An Artist and an Educator
Joined 7 December 2016
14 MAR 2019 AT 8:37

इक उम्र तक चलाए गए ख़ूब हाथ-पाँव
जब आई मेरी लहर तो बहना पड़ा मुझे

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14 SEP 2018 AT 17:40

آپ نے اس کے فسانے ہی سنے ہوتے ہیں
اور اچانک یہ بلا آپ کے سر ہوتی ہے

आपने इसके फ़साने ही सुने होते हैं
और अचानक ये बला आपके सर होती है

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15 AUG 2018 AT 17:23

ना-उमीदी में तो कुछ और बड़ी बात है ये
ज़िंदगी नाम की इक शै जो तेरे साथ है ये

ناامیدی میں تو کچھ اور بڑی بات ہے یہ
زندگی نام کی اک شے جو تیرے ساتھ ہی یہ

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13 FEB 2018 AT 12:08


मैं उनको फिर से लगा आया उनकी टहनी पर
अजीब फूल थे मुरझाने में लगे हुए थे

میں ان کو پھر سے لگا آیا ان کی ٹہنی پر
عجیب پھول تھے مرجھانے میں لگے ہوئے تھے

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25 SEP 2020 AT 9:31

वक़्त पर कोई काम आता नहीं
हमने ख़ुद को भी आज़माया है

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20 APR 2018 AT 23:16

किनारे बैठे बैठे थक गए हैं
उतरता ही नहीं दरिया हमारा

کنارے بیٹھے بیٹھے تھک گئے ہیں
اترتا ہی نہیں دریا ہمارا

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