आईना पूछता है,
क्या ग़म है,
किसे खोजते रहते हो,
किन ख्यालों में रंग उड़ा है ये,
क्या फिक्र है,
क्या सोचते रहते हो-
कुछ शब्द चुरा के ज़िन्दगी के साज लिखती हूं,
सिर्फ सांसों से एक जीवन का सफर
'मैं' से होना 'हम' का सफर
तय होता है
जब साथ हो 'हमसफर'-
जिंदगी की राह में उलझनों के किस्से तमाम आते है
अपनो के चेहरे तब ही पहचान आते है
हां फिर,
हम ही खुद अपने काम आते है।-
कभी ज्यादा कभी कम भी भुला देती है,
चाय की चुस्की थोड़े ग़म भी भुला देती है।-
तन्हाई को आंसुओं में बाहना सीख रहे है,
आखिर हम भी तौर ए जमाना सीख रहे है,
चल ही पड़े है तो मंजिल मिलेगी एक दिन,
डगमगाते कदमों को जमाना सीख रहे है,
मतलबी दुनिया में तो सभी एक जैसे है,
हम भी अब नज़रें रे चुराना सीख रहे है,
आंखें भले जाहिर कर दे दर्द की कहानी को,
हम तो होंठो से मुस्कुराना सीख रहे है।-
मिला जो भी गमों से चूर मिला
मिला भी तो होके मजबूर मिला,
वक्त वे वक्त काम आते रहे सबके हम,
मेरी बारी पर हर अपना मुझसे दूर मिला।-
मिला नहीं तो कुछ खोया भी नहीं,
हुआ सब यूं की कुछ हुआ भी नहीं,
बात हो ही गई लफ्जों से भी न काम लिया,
सुन लिया वो जो किसीने बोला भी नहीं,
होश में भी यूं बेहोश सा हर शक्श यहां,
जागा नहीं हैं लेकिन ये सोया भी नहीं,
धागे उम्मीद के कब टूट कर बिखर ही गए,
जोड़कर फिरसे उन्हें मैंने पिरोया भी नहीं।-
ढूंढता फिरता है मुझको ही ये वजूद मेरा,
आइना रख के क्यों न आज मिलाया जाए।
कर कोशिश की जहां में करेगा कौन ?
लाज़िम है की खुद ही हौसला बढ़ाया जाए।
गुनहगार मान बैठा है मुझे हर शक्श यहां,
सच कैसे आखिर सामने लाया जाए।
इल्जामों का वक्त के वक्त ही जवाब भी देगा,
आखिर दिल खोलकर हर किसी को क्यों दिखाया जाए।-