Tapasya saxena   (तpasya)
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ना किस्सा ना शेर ना नस्मे-ए-राज लिखती हूं,
कुछ शब्द चुरा के ज़िन्दगी के साज लिखती हूं,
Joined 9 April 2021


ना किस्सा ना शेर ना नस्मे-ए-राज लिखती हूं,
कुछ शब्द चुरा के ज़िन्दगी के साज लिखती हूं,
Joined 9 April 2021
11 JAN AT 22:23

आईना पूछता है,
क्या ग़म है,
किसे खोजते रहते हो,
किन ख्यालों में रंग उड़ा है ये,
क्या फिक्र है,
क्या सोचते रहते हो

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11 JAN AT 22:09

सिर्फ सांसों से एक जीवन का सफर
'मैं' से होना 'हम' का सफर
तय होता है
जब साथ हो 'हमसफर'

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10 JAN AT 20:02

एक चेहरे में चेहरे हज़ार है,
देखिए
ये संसार है

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9 JAN AT 15:18

इस पल में उस पल सा नहीं
आज में कुछ कल सा नहीं

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9 JAN AT 15:12

जिंदगी की राह में उलझनों के किस्से तमाम आते है
अपनो के चेहरे तब ही पहचान आते है
हां फिर,
हम ही खुद अपने काम आते है।

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9 JAN AT 13:56

कभी ज्यादा कभी कम भी भुला देती है,
चाय की चुस्की थोड़े ग़म भी भुला देती है।

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18 JUN 2024 AT 22:44

तन्हाई को आंसुओं में बाहना सीख रहे है,
आखिर हम भी तौर ए जमाना सीख रहे है,
चल ही पड़े है तो मंजिल मिलेगी एक दिन,
डगमगाते कदमों को जमाना सीख रहे है,
मतलबी दुनिया में तो सभी एक जैसे है,
हम भी अब नज़रें रे चुराना सीख रहे है,
आंखें भले जाहिर कर दे दर्द की कहानी को,
हम तो होंठो से मुस्कुराना सीख रहे है।

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28 MAY 2024 AT 14:08

मिला जो भी गमों से चूर मिला
मिला भी तो होके मजबूर मिला,
वक्त वे वक्त काम आते रहे सबके हम,
मेरी बारी पर हर अपना मुझसे दूर मिला।

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7 FEB 2024 AT 20:56

मिला नहीं तो कुछ खोया भी नहीं,
हुआ सब यूं की कुछ हुआ भी नहीं,

बात हो ही गई लफ्जों से भी न काम लिया,
सुन लिया वो जो किसीने बोला भी नहीं,

होश में भी यूं बेहोश सा हर शक्श यहां,
जागा नहीं हैं लेकिन ये सोया भी नहीं,

धागे उम्मीद के कब टूट कर बिखर ही गए,
जोड़कर फिरसे उन्हें मैंने पिरोया भी नहीं।

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29 JUN 2023 AT 22:17

ढूंढता फिरता है मुझको ही ये वजूद मेरा,
आइना रख के क्यों न आज मिलाया जाए।

कर कोशिश की जहां में करेगा कौन ?
लाज़िम है की खुद ही हौसला बढ़ाया जाए।

गुनहगार मान बैठा है मुझे हर शक्श यहां,
सच कैसे आखिर सामने लाया जाए।

इल्जामों का वक्त के वक्त ही जवाब भी देगा,
आखिर दिल खोलकर हर किसी को क्यों दिखाया जाए।

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