Humne Hooto se hassi koi kuch iss tarh
Mitta diya jab khuda ne hume humare yaar se juda kiya-
वक़्त की उम्दा कलाकारी रही होगी ओर कुछ नही ,
वरना दिल की बातों में आना मुनासिब नहीं था ,
जानते थे वो सब के , मरवाएगा ये इश्क़ एक दिन ,
मगर बढ़ाकर कदम पलट जाना वापिस ,
परवानों के किरदार के लिए वाज़िब नहीं था ।
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छोटी सी उम्मीद थी बस ,
मन में आया विचार ही था ,
आस थी मेरी कि तुम रुक जाओ ,
पर तुम रुकने को कहाँ तैयार थे ,
फिर टूटी यारियां , थोड़े टूटे हम भी ,
ठहर गया जहां मेरा , सब आगे निकल गए ,
अब वक़्त पलटा फिर ,पलट गए हम भी ,
कर्मा है ढूंढ लेता है बेघरों को भी ,
फिर वहीं महक फिर वहीँ समां आया है ,
दस्तक दी तूने फिर दिल पे अरसे बाद ,
इस बार भी मुस्कान लिए होठों पे ,
हाथों में लिए खंजर तुम तैयार थे
भूले थे वक़्त जरूर मगर तुम याद थे ,
और इस बार हम पहले से ही होशियार थे ।
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ना तो अब तू है कहीं , ना ही तेरी कोई ख़्वाहिश है ,
बस मैं हूँ , ये वक़्त है , और इस वक़्त से मेरी आजमाइश है ।-
ग़लतफ़हमियों से मुलाकात जरूरी थी ,
यहां हकीकत को जानने के लिए ,
सोचता हुं खुद की मैंने क्या खोया क्या पाया ,
एक तेरे किरदार को बस पहचानने के लिए ।-
जब भी आएंगे कुछ न कुछ तो कमाल करेंगे ,
अंदाजा था मुझे मेरे ये ख़यालात फिर बवाल करेंगे
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जो चला गया वक़्त , वो कभी याद नहीं करते ,
सोचके जख्मों के बारें में ,वक़्त बर्बाद नहीं करते ,
अगर रहोगे दोस्त तो कर लेंगे मिन्नतें भी हजार ,
वरना खुदा से भी अक्सर हम फरियाद नहीं करते
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बोलते भी नहीं हो आजकल ,
राज़ खोलते भी नहीं हो आजकल ,
मेरी मानते भी नहीं हो और ,
कभी मुझे पहचानते भी नहीं हो ,
जिंदा रखा है खुद को या भीड़ में कहीं ,
शामिल हो गए हो दुनिया की तुम भी ,
निकल के मुझ में से एक दिन ,
मैंने मुझ से ही पूछा ।।
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अंदाज़ सलाम का एक सा रहता है ,
फिर चाहे रंक हो या राजा ,
परवाह नही किसी की यहां उनको ,
जिनके खैरख्वाह है खुद ख्वाजा-
आएंगे दौर कैसे भी , जमीर की थामे कमान रखना ,
वो है ऊपर , सब देख रहा है , बस तू ध्यान रखना |
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