Swati   (©agrwalswati)
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Joined 12 February 2017


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Swati 22 MAR AT 21:59


Chandni

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Swati 21 MAR AT 20:50

तुमने प्रेम गढ़ा,
मैंने तुम्हें चुना...
मैं ढलती गई उसके अनुसार,
और तुम्हारे प्रतिमान बदलते गए...
मेरी कोशिशें जारी रही,
तुम्हारी परिभाषाएं भी बदलती रहीं...
और अंत में;
जब तक मैं पूरा बदल पाई खुद को
तुम्हारा गढ़ा प्रेम कुछ और ही था...

फिर मैंने जाना;
कि... प्रेम का कोई प्रतिमान नहीं होता,
कोई नियम कोई परिभाषा नहीं होती,
वह अनंतकाल से केवल प्रेम ही था, है और रहेगा!

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Swati 16 MAR AT 21:35


फिर वही अज़ाब, पशेमानी और वही तारीकीयां
ऐ इश्क़, तेरी कैद से अब रिहाई दरकार है...!

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Swati 12 MAR AT 0:28

मेरा लिखना कुछ और नहीं,
चंद एहसासों की मौजूदगी भर है.....
बस इतना सा लिख पाती हूं कि सांस लेने में आसानी बनी रहे...

ये कुछ बातें हैं... फ़िज़ूल सी
जो उन लोगो के लिए कतई नहीं
जो धीरे से ज़िन्दगी से फिसल गए हैं रेत की तरह...
ये उन लोगों के लिए हैं
जो मानते हैं इस काबिल मुझे कि
छोड़कर जाने लायक अभी तक नहीं हुई हूं!

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निबाह कर सकने वालों 🙏(आभार सदैव)

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Swati 10 MAR AT 22:26

जानते हो,
कितनी ही छोटी छोटी बातें थीं,
जो करनी थीं तुमसे...
बहुत कुछ था जो कहना था...
पर कभी तुम नहीं थे और कभी समय नहीं था...
और अब;
उन सब बातों के,
मेरे भीतर... कुछ दरख़्त उग आए हैं,
जिनमें गुम हूं मैं...

पता है, अब तुम सामने भी आते हो
तो भी कुछ नहीं सूझता कहने को...

...और अब तुम कहते हो कि मै इतनी ख़ामोश क्यों हूं,
किसी वीरान जंगल में तन्हा चिड़िया सी।

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Swati 8 MAR AT 21:44

तुम पौरुष के प्राण शिखर
तृणमात्र एक अविचल मैं...
तुम पूर्वाचल सम्पूर्ण दिवाकर
अस्तगामी रश्मि किरण मैं...

तुम सिंधु महाविशाल
और सलिला सी अविरल मैं...
क्षुधा तृप्ति का साधन हूं
नारी एक अकिंचन मैं...

जीवन का कारक व पूरक तुम
अनंतस्वरूपा जीवनदायिनी मैं...
स्मरण रहे सदा ये साथी
सर्वस्व समर्पित तुम पर मैं।

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Swati 12 FEB AT 21:15

तुम,
जैसे किसी शेर का अधूरा सा मिसरा
दिल की बैचैनी और रतजगों का सबब,

जैसे कोई उलझी सी ग़ज़ल की तक़रीर
ज़हन की गहराईयों में डूबती उतरती हुई,

आओ क़रीब ......
कि अब नज़्म-ए-जीस्त मुकम्मल हो!

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Swati 9 FEB AT 22:57

When you look at me
Like I am the 'World'
Oh dear ;
...My heartbeat
Skips just there...

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Swati 3 FEB AT 20:38

दुःख सराय के जैसे थे,
जिसके दर पे ठहरना हर सफ़र की नियति रही...
और सुख ;
साथ की कंदील के तेल जैसा,
जिसे कितना ही भरा खाली होता रहा !

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Swati 2 FEB AT 21:14


तुझ तक पहुंच सकने वाला
या कहूं कि
तुझे छू भी सकने वाला
हर दुःख पहले मुझसे हो के गुजरता है...
मुझे सौ बार बेधता है...

ये नहीं कहती कि,
कभी कोई दर्द नहीं होगा...
लेकिन मैं हूं तेरे साथ, तेरे लिए!



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