Surendra Selwal   (Suku)
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Joined 1 August 2018


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Joined 1 August 2018
Surendra Selwal 17 HOURS AGO

An eighteen year old, student pursuing graduation, desirous to learn martial art and foreign languages alongside preparing for IAS to serve the nation with loyalty is called NEHA.

You see her work at YQ and feel the taste of socialism, patriotism, spirituality, motivating and love. Her way of commenting ones quotes and Thanksgiving words are amazing and wonderful.

This Lord Shiva's Bhakt is fond of old music and a die hard fan of Amitabh Bachchan and Akshay Kumar.

She loves Nation, Indian Army and its actions. She likes Jawans and their gallant.

Best wishes to you Neha!!

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Surendra Selwal YESTERDAY AT 10:58

अभी तो दोपहर है
दो पहर और चलो
तब जाके साँझ होगी
अभी तो कुछ गर्मी सी है
लगता है कुछ नरमी भी है
क्योंकि ढल रहा है दिन।
सुनो, सूरज तो वहीं है
उसको दोष ना देना
ये सब हैं धरती के कारण
जिसपे हम खडे हैं ।
अभी कहीँ सुबह भी है
और कहीं पर साँझ ढली है
रात भी हो चुकी है कहीं ।
फिर से सुबह होगी।

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Surendra Selwal 16 AUG AT 18:58

कुछ खोया सा हूँ
कभी तेरे ख्यालों में
कभी तेरे सवालों में ।

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#YourQuoteAndMine
Collaborating with R K

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Surendra Selwal 16 AUG AT 17:05

थोड़ा इंतज़ार करो बादल बरस भी जाएंगे।
इस शाम को और खुशनुमा कर जाएंगे।

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Surendra Selwal 15 AUG AT 6:40

पास नहीं था कुछ देने को, अपना यौवन दे आया।
किस्मत में थी नहीं शहादत, लौट के मैं घर आया।
हरियाणा से गया फौज में, 17 वर्ष का बालक था।
तन से निर्बल मन से कोमल, नहीं थोड़ा भी चालाक था।
उस्तादों ने ऐसा तरासा, फौलाद बनाकर तैयार किया।
दो साल की ट्रेनिंग के बाद, कश्मीर में तैनात हुआ।
कारगिल में भी हमनें यारो खूब चलाई गोलियां।
कई मर्तबा आया मौका खून से खेली होलियां।
(50°) से (-50°) तक हमनें सब मौसम झेले हैं।
होली दिवाली के दिन भी हम, MMG से खेले हैं।
बहना तेरी रक्षा की खातिर, सरहदों पर ही रहते थे।
राखी तेरी पाने की खातिर, चिट्ठी ढूंढते रहते थे।
हंसना सीखा रोते रोते, खुशी का जीवन जीते थे।
रेडियो टीवी पर क्या देखें, हम मैदान ए जंग में रहते थे।
चौबीस साल के शौर्य काल से पंद्रह कश्मीर गुजारे हैं।
सीना हमारा देखोगे तो लगे हुए मैडल सारे हैं।

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Surendra Selwal 12 AUG AT 19:53

वक्त भरेगा जख्मों को मरहम लगाना छोड दो।
दर्द मिलेगा छूट नहीं कोई, इश्क फरमाना छोड़ दो।

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Surendra Selwal 12 AUG AT 19:33

माँ तो माँ है, माँ ही जहाँ है।
माँ ही गर रुण्ठ गई, बचा ही क्या है।
माँ मान जाएंगी, मनाकर तो देख।
माँ से बढ़कर भाई, कुछ भी ना है।

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Surendra Selwal 12 AUG AT 13:35

महक तेरे जिश्म की पहचानते हैं हम।
हवाओं की फितरत बख़ूबी जानते हैं हम।
ठहर जाओ कुछ पल को आज तो।
आओ कुछ फुरसत के पल गुजारते हैं हम।

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Surendra Selwal 12 AUG AT 7:20

मुझे भी याद तुम्हारी आती तो है।
अभी एक जन्म का फासला जीने दे।
अभी मोहब्बत बहुतों को है मुझसे।
मुझे इनकी दोस्ती के जाम पीने दे।

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Surendra Selwal 4 AUG AT 22:19

ये डगर भी उलझी सी है
चलो प्यार से, सुलझी भी है
दूर तक हम चले आए हैं
पिछली राह भी थी धुंधली सी ।

कुछ काँटे, कुछ फूल हैं
कुछ पत्थर कुछ धूल है
सब यहाँ मशगूल हैं
बस अपने ही सफर में।

हम सब को यह भी पता है
इस सफ़र का अन्त जहाँ है
ना जाने क्यों हम सब फिर भी
करते हैं गुस्ताखियाँ ।

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