Suhas Kamble SK   (suhask247)
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Joined 7 July 2020


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21 HOURS AGO

A piece of mirror grabbed by me.
Broken like my heart or not may be.
Circle is always without corners, breakfree.

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21 HOURS AGO

हर बात जज़्बात।

मिट नहीं पाती हैं यादें, इतनी आसानी से कभी,
लिखकर जमाना हो गया, लगती मिटाई हो अभी।

दिल हर घड़ी और हर समय बस ताकता रहता तुझे,
बहती आँखें, कहती मुझे, गलती दिल करे, सज़ा मुझे।

गया सीख मैं हर सीख को, इश्क इम्तिहान लेगा क्या?
इम्तिहान सफ़ल होगा तो, शाबाशी तू भी देगा क्या?

तू रात मुझमें बीतकर, बनती नई फिर एक सुबह,
मैं उस सवेरे संग तेरे, मौजूद रहता हर एक जगह।

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16 JAN AT 19:41

हर सांस एहसास।

सपनों में मिलने तुम आओगे, तेरे लिए सोना मुझे,
नहीं होश में आना हैं फिर, ना चाहता मैं, खोना तुझे।

उसे ढूंढकर किसी जगह, तसल्ली दिल को दे देता,
पर जाता मैं किस जगह, मेरे ही दिल में वह रहता।

मैं छू लेता उसे कभी, पर मुझसे जुदा वह हुआ नहीं,
पुकारता उसका नाम भी, पर साथ वह हर वक्त यहीं।

वह एक नेक दिल अच्छाई सी धुंधली मगर सच्चाई हैं,
उसके बगैर मैं कुछ नहीं, इतना उसे समझ पाया हूँ मैं।

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14 JAN AT 21:59

He was dark alone,
she moved curtains
to show flawless light.

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13 JAN AT 21:56

She shouts aloud,
he didn't get any idea.
A raindrop from cloud,
and he got the umbrella.
For her for him, for their bound.

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13 JAN AT 0:03

एक परवाह लापरवाह।

इस घड़ी या उस घड़ी, यूं कहें तो हर घड़ी,
मुझे मेरी नहीं पड़ी और वह मेरे साथ खड़ी।

दिल हो या जिस्मपर, खाकर देखी हर ठोकर,
फिर एक दिन उसे पाया मैंने हर गम खोकर।

पर वह भी हैं इंसान ही, होता उसको दर्द भी,
हर दर्द को छिपाना ही, आदत मेरे हमदर्द की।

ज़ख्म कुछ पुराने से उस प्यारे दिल में जो गहरे,
मैं देख नहीं पाया हूं आंसू, आँखों में ही वह ठहरे।

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11 JAN AT 21:47

He found a great way,
to meet her, sent letter.
She migrated: he remained
wrapped within letters in that letter.

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10 JAN AT 21:58

The scrolling of social sites,
increased day by day, today.
We can't tour in colonies,
so moving fingers on cellphone.
Mask, sanitizer and distance! Alone.

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10 JAN AT 20:38

जुर्रत और ज़रूरत।

वह नहीं तो कुछ नहीं, वह साथ हैं तो सब सहीं,
अनसुनी और अनकही, जो खो गई हैं बात कहीं।

जब पा लिया उसको तब, जीना सीख गए हैं हम,
अब जाकर खुद में खुद को महसूस करने लगे हम।

झुकाएं आँखें वह बैठा करीब, सच हुआ सपना मेरा,
आज छा गया सवेरा, खो गया कहीं, तेरा मेरा अंधेरा।

नज़रे हटा लेना उनसे कहीं, यह जुर्रत हमने की नहीं,
हम कोशिश तो करते मगर, ज़रूरत दिल की थी वहीं।

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10 JAN AT 19:47

तू समोर दिसावं.
अन स्वप्न हे माझं,
एकदा सत्यात उतरावं.
तुझा हात मी हाती घेवून,
असं कौतुक करावं.
ते कौतुक तू ऐकून,
कसं गोंडस हसावं.
एकमेकांत आपणं,
इतकं मग्न होऊन जावं.
सोबत जगणं असो वा नसो,
हे नातं आजीवन संलग्न रहावं.

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