वक़्त बेवक़्त ही सही फुर्सतों में तराशा है पन्नों पर,
लिखी हुई इबारतों को इत्मीनान से ,आहिस्ता से सुनो।
ख्यालों में आते हो चुपके से हमें खबर मिली है,
बारीकियों पर ग़ौर फरमाओ,बस हमारे ख़्वाब बुनो।
महफ़िल सजी है तो नज़रे इनायत इक हमीं पर हो,
शख़्स और भी हैं जहां में, मगर तुम हमें ही चुनो..
कुछ गुनगुनाने का भी आज बहाना मिल गया,
आज महबूब ने साज संभाला है बस साथ देना धुनों।- Saini sudhir
14 DEC 2020 AT 16:05