Sourav Banerjee   (अंजान)
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एक इंजीनियर लेखक बनने की कतार में।।!!!
An engineer in queue to be a writter!!!
Joined 18 November 2019


एक इंजीनियर लेखक बनने की कतार में।।!!!
An engineer in queue to be a writter!!!
Joined 18 November 2019
Sourav Banerjee 14 FEB AT 22:00

देखोगे सपने तो,अपने को छोड़ना होगा।
सपनों के साथ,शहर को भी छोड़ना होगा।
मां में हाथो के निवालों के भी छोड़ना होगा।।
अंजान शहर में खुद को खोजना होगा,भरे अनजानों में अपनी को खोजना होगा।

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Sourav Banerjee 9 FEB AT 17:16

कितनी अजीब है दोस्ती।
बिन कहे हो जाती हैं दोस्ती।।
बिन कहे टूट जती हैं दोस्ती।
दूर रह के भी तिक जाती हैं दोस्ती।
हर रिश्ते से अर्जमन्द है,दोस्ती।
मुशिल में साथ हैं,दर्द में करीब हैं दोस्ती।
हर अफत में, हौसला देती हैं दोस्ती।
हर मर्ज की दवा है दोस्ती।


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Sourav Banerjee 8 FEB AT 14:48

ज़रा सा मन था के अकेले में रो लूं,तेरे चले जाने के गम को ओढ़ के सो लूं।।
फिर याद थी बांकी जिसने सोने न दिया,मेरे हर खुशी को जीने ना दिया।।
मन था बोहोत के जी लू,और उन फटे ज़ख्मों को सी लूं,उन कड़वे यादों को पी लूं।।
बस दुख हैं इतना के तुम चले गए,अब दम नहीं इतना के उन यादों के भरोसे जी लूं।


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Sourav Banerjee 5 FEB AT 14:40

कभी सोचा न था,के फासले ऐसे भी होंगे।
के पास तुम होगी,पर हम तुम्हारे न होंगे ।।
देखेंगे हम तुम्हे,पर तुम निहारती किसी और को होगी।।
नजदीकियां तो हमसे होगी,पर बांहे किसी और की होंगी।
होंठो पे किसी और का नाम होगा,पर दिल में सिर्फ मेरा ही आवाज़ होगा।
पता नहीं इस दूरी का क्या अंजाम होगा।।

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Sourav Banerjee 26 JAN AT 21:51

बस अब इंतज़ार ही हैं,अब तो रुकना लिखा है।तेरा दीदार हुआ,पता नहीं मिलना कब लिखा हैं।
तेरी उन्हीं,पलकों को उठते देखा,अब पता नहीं उन फूलों सी होंठ से पुकार सुनना कब लिखा हैं।
बस रुका ही हूं,पता नहीं अगली बार तेरा दीदार कब लिखा हैं।
तेरा इंतज़ार है,पता नहीं किस मोड़ पे मिलना लिखा है।

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Sourav Banerjee 17 JAN AT 23:01

रुके रुके इंतज़ार में ही मर गए,हम तो खड़े रहे। तुम्हारे चाहने वाले कतार में ही मर गए।।
हम देखते,देखते ही रह गए,बेचारे कितने थे बिना दीदार किए ही मर गए।।
थी कितनी ख्वाइश की ज़रा,आवाज़ ही सुनी ले।
उन बेगैरों का सोच के रुक गए ,जो बेगैरत में ही कफ़न में लिपट गए।।

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Sourav Banerjee 17 JAN AT 16:10

नफ़रत तो हम तुमसे सिगरेट की तरह करते हैं।
के हाथ आओ तो जला दे,और पास आओ तो फुख दे।।
बस इस नफ़रत का एक ही,अंजाम हैं।।
जलने फूंकने में हमारा ही नुकसान हैं।

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Sourav Banerjee 16 JAN AT 22:03

ज़रा सी देर को बहाना मान लिया।
मेरी चुप्पी की इरादा मान लिया।।
ज़रा रुक के तो देखती,ना जाने अंजाने में क्या क्या मान लिया।
खबर थी तेरी मुझे हर पल की,बस चुप्पी को अपना ठिकाना मान लिया।
मान लिया की तुम थी बेवफा,पर हमें तो तुमने कायर मान लिया।।

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Sourav Banerjee 8 JAN AT 21:44

जैसा दौर था वैसा बन गया था,पता नहीं खामोश क्यूं हो गया था मै।
आस पास की आहटे सुनाई देना बंद सी हो गई थी,पता नहीं सुनाई देते हुए भी बेहरा हो गया था मैं।
पता नहीं किसके इंतज़ार में खो गया था,एक तरफ ज़माना दौड़ रहा था,रुके रुके खड़ा रह गया मैं।
रुके रुके सुस्त सा बन गया था,पता नहीं क्यूं कोई रुका नहीं,अब चल रहा हूं तो,कोई मुड़ा नहीं,थोड़ी दूर तक मिले कुछ,पर अंत तक कोई रुका नहीं।

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Sourav Banerjee 3 JAN AT 21:33

वो तेरी बाते थी,जिसने बांध कर रखा,खूबसूरत तो कई थे।

वो तेरी मासूमियत थी,वरना खूबसूरती के पीछे तो हैवान छिपे देखे थे।

मैं रुका इसीलिए नहीं के तुम दिखती अच्छी थी,फिदा तो हम तुम्हारी इंसानियत पे थे।

भूल नहीं सके तुम्हे,ना कोई मिला तेरे जैसा।
सूरज की रोशनी,सी तुम्हारी यादें,चिपने को भागे तो कहा भागे।

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