Sourav Banerjee   (अंजान)
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एक इंजीनियर लेखक बनने की कतार में।।!!!
An engineer in queue to be a writter!!!
Joined 18 November 2019


एक इंजीनियर लेखक बनने की कतार में।।!!!
An engineer in queue to be a writter!!!
Joined 18 November 2019
27 AUG AT 20:59

हम बाहर‌ मुस्कुराहटें लगाए बैठें है ,आस पास सबको हसाए बैठे हैं ।।
मगर अंदर ,दुखों का कब्रिस्तान भी ,बसाए बैठें हैं ।।
तेरे जाने का ग़म, यूं छिपाएं बैठें हैं, के मानो।।
तेरे बेवफाई भरे खंजर के घावों को ,सिने से लगाए बैठे हैं ।।
ये मुस्कुराहटें नहीं दर्द हैं, ये खिलखिलाता चेहरा नहीं तेरे दिए खंजरों का ज़ख्म हैं।।





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13 AUG AT 20:31

हजार बार उसे इशारों में समझाया, मगर उसे तो मेरे झूठ से मोहोबात थी।।
मना लिया उसे फिर उसी की शर्तों पर, ता उम्र किसे मनाने की फुरसत थी।।
भटक रहे हैं जहां आज अजनबी की तरह ,कभी
इसी गली में हमारी जन्नत थी।

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21 JUL AT 20:47

मेरे नींद से होके जाता है ,तेरे सपने का रस्ता ।
बंद आंखों में दिखता है ,तेरा वो चेहरा हस्ता ।।
यूं कुछ बातें क्या हुईं , यूं रूठ गए तुम ।
अब मनाने जाए भी कैसे ,मेरा रस्ता ही भूल गए तुम।।
हमारे चाहतों की बेपनाहियत की हदें भी देखो ,
जो तुम बेवफा भी निकले तो, हम उफ़ तक ना किए ।।
तेरे आजकल मिलने पे भी नहीं दुख इतना ।।
बस एक ख्वाइश है,के तेरे बाहों में सुला देना।।
आंख अगर खुले तो उठा देना ,और जो ना खुले तो दफना देना।।


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2 JUL AT 11:55

अनछुए अनकहे से थे, वो खुले आसमान के नीचे बिताए पल।
हम तो जी ही रहे थे आज में ,बिना सोचे क्या होगा कल।।

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26 JUN AT 21:59

हम अपने लिखे में तेरा ,ज़िक्र होने नहीं देते।।
चाहे जो भी हो ,तेरी यादों को ,फिंका होने नहीं देते।।
अपने आंखों से तेरे नाम का आंसू छलकने नहीं देते।
थोड़े से बचे ,इन ज़ज्बातों को ज़ाहिर ,होने नहीं देते।।
कहानियां तो कई है ,लेकिन अपने ज़ुबां पर ,ज़ाहिर होने नहीं देते।।
बात कुछ अपनी भी हैं ,बेगैरत हम इतने ,के लबे -इश्क़ को ज़ाहिर होने नहीं देते।।


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23 JUN AT 22:28

जब वक़्त ढलने लगे,और सांसें थमने लगे।
छाव की खोज़ में पेड़ चलने लगे।।
वक़्त दर वक़्त,ये आसमां पिघलने लगे।।
तो ये समझना के हम,दीवानगी के कश्ती में सवार होकर ,तेरे इश्क़ के अोर बढ़ने लगे।।
हम चाहे न चाहे ,तेरे हर मुस्कुराहटों पे मरने लगे।।
तेरे हर रंज को अपने ,खुशी के सर्फ़ से बदलने लगे।।
कुछ यूं ,हमारे मरासिम के पायाब दरिया में
ना-तवॉ होकर बह गए।।


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14 JUN AT 17:10

हर खुदख़ुशी कत्तल होती है।
बस कातिल का पता नहीं होता।।

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8 JUN AT 20:46

छोटा सा दिल था,जिसमें सपने थे कम और बोहोत अंधेरा।।
हसरतें थी बोहोत,थोड़ी थी खुशियां,जिनको था दुख ने घेरा।
इतनी तन्हाई थी,जिसमे जागता था दिल मेरा।।
बोहोत कड़वी याद थी जिसके,एक मुकर्रर हद से आगे सोचता भी कैसे।
ऐसी सूरते-हाल में खयाल आता भी कैसे तेरा।।
राज़ की भी हदें थी,खुद से मुलाकात करता भी कैसे।
सपना था,सपने की भी हद थी,आखिर सपना आगे जाता भी तो जाता कैसे।।




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2 JUN AT 17:31

कुछ खुशनसीब थे ,जो खुद खुशी कर बैठे।
हम बद-नसीब निकले जो शायरी कर बैठे।।

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18 MAY AT 22:16

माना ये इश्क़ नहीं, तुम्हें याद करने की आदत है।।
मेरा इश्क़ तो इश्क़ ही नहीं, तेरे आहटों की इबादत है।।
तू अपने बेवफाई के हुनर को ना कर ज़ाया ।
हम तो आईना हैं, हमें टूटने की आदत हैं।।

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