बोझ समझते हैं मुझे सब, मगर मैं बोझ नहीं हूँ,
आज की नारी हूँ मैं, किसी से कम नहीं हूँ।
बंधन तोड़े हैं मैंने, अब उड़ान भरनी है,
सपनों को सच करके, नई पहचान करनी है।
आँखों में है हिम्मत, दिल में है उजाला,
अब कोई न रोक पाएगा, ये है मेरा इरादा।
जो मुझे दबाना चाहें, वो जान लें यही,
नारी की शक्ति से बड़ी, इस जग में शक्ति नहीं।
सम्मान और हक़ अपना, अब मैं छीन लूँगी,
हर मुश्किल से लड़कर, आसमान छू लूँगी।
बोझ समझते हैं मुझे सब, मगर मैं बोझ नहीं हूँ,
आज की नारी हूँ मैं, किसी से कम नहीं हूँ।-
A person who want to make a smile on everyone face. 😊☺️☺️😄😄
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कोई नहीं है जो मेरी क़द्र कर सके,
कोई नहीं है जो मेरे आँसू पोंछ सके।
सब मुझे गिराना चाहते हैं,
पर मैं न गिरूँगी, न ही टूटूँगी।
अपने दम पर चलना सीखा है,
अब आसमान में उड़ना है।
चाहे कितना भी तोड़ लो मुझे,
फिर से सँभल जाऊँगी मैं,
और उड़ कर दिखलाऊँगी मैं।-
"कब तक"
उन्होंने पहले मेरा बोलना बंद कराया,
फिर मेरा हँसना भी गुनाह बना दिया।
अब ये साँसे भी जैसे उधार की लगती हैं,
हर जज़्बात पर पहरा बिठा दिया।
लेकिन ऐसा कब तक चलेगा,
कब तक मेरी ज़िंदगी कोई और चलाएगा?
कब तक मेरी आवाज़ दबाई जाएगी,
कब तक मेरी हँसी छिनाई जाएगी?
अब वक्त है कि मैं खुद को आवाज़ दूँ,
अपने हिस्से की धूप मांगूँ,
अब किसी और की मर्ज़ी से नहीं,
अपने दिल की आज़ादी से जियूँ।-
क्या होता...
अगर मेरे मन के ख़्यालों को तुम जान पाते,
अगर मेरी ख़ामोशी में भी आवाज़ पहचान पाते।
अगर तुमने मेरे किए हर काम को महसूस किया होता,
तो शायद मेरे जज़्बातों को तुमने भी जिया होता।
क्या होता...
अगर तुमने मुझे वैसे ही अपनाया होता,
जैसा मैं हूं — बिना बदले, बिना परखा।
और क्या होता...
अगर तुम कुछ वादे निभा भी जाते,
तो आज शायद हम इतने दूर ना जाते।-
बढ़ती हुई उम्र के साथ, बचपन हमारा छूट जाता है,
ज़िम्मेदारियों के पहाड़ तले, कहीं दिल सा टूट जाता है।
बस यादों का ही सहारा है, वही कुछ पल बचाते हैं,
वरना तो हम भी इस भीड़ में, बस कुचल दिए जाते हैं।
हर खिलखिलाती मुस्कान अब किताबों में मिलती है,
वो मिट्टी की ख़ुशबू भी अब सिर्फ़ हवा में मिलती है।
बचपन की यादें भी धीरे-धीरे पुरानी हो जाती हैं,
और हम उन्हें तकिये के नीचे छुपा कर सो जाते हैं।-
मोहब्बत एक ऐसा नशा है,
जिसमें खो गए तो प्रभु को भी पा जाओगे,
और इससे दूर हो गए तो...
खुद को तन्हा ही पाओगे।-
वो यारी कहीं छूट गई है,
मित्रों से मिलने की बारी अब छूट गई है।
पहले प्रतिदिन मिला करते थे,
फिर कुछ दिनों के अंतराल में,
फिर सप्ताहों में मिलने लगे थे हम।
परंतु उसके विवाह के पश्चात…
अब तो बातें भी छूट गई हैं।-
Yeh vakalat nahi aasaan,
hum tumko kaise samjhaayein?
Jo ek baar mohabbat ho jaaye,
toh usse chhod paana mushkil ho jaaye.-
बेपनाह दर्द हैं तेरी ज़िंदगी में,
पर हर ज़ख्म यूँ ही नहीं भर जाएँगे।
ज़रा एक बार मुस्कुराकर तो देख,
जिनसे मिला है दर्द तुझे,
वही ख़ुद ही ज़िंदगी से दूर हो जाएँगे।-