श्रीमान लेखक   (Hitesh Thakur)
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Joined 21 April 2020


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यूँ ही तन्हा एक रात जब बैठा था मैं,
एक अजब सी कसक सीने में हुई !
ये कैसे मुकाम पर आ गया हूँ मैं,
अंजानी रास्तों पर चलते चलते ।

बस यूँ ही अकेला तन्हा बैठा था जो मैं ऐसे !
मोती-रूपी आँसूं मेरे आँखों से टपक पड़ा,
कोई नन्हा बालक खिलौने के लिए रोता है जैसे ।
खुद ही अपना सिर बाहों में रख रो पड़ा,


-



,
About how much I miss you !
I know they don't reply ,
But neither do they make fun of me .
They make me feel like ,
Someone is there who listens to me !
Neither do the stars or I know ,
About how much I love you !

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मेरी यादों से मैं कभी
तुझे मिटा नहीं पाऊंगा !
मैं चाह के भी कभी तुझे,
इन यादों से भुला नहीं पाऊंगा ।

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हज़ारों डिगरियां ले लो ,
ये ज्ञान नहीं मिलता !
ये इंसानियत की सीख है साहब
किताबों में नहीं मिलता ।

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धर्म बचे , जाति बचे
या कोई भेश बचना चाहिए ,
इससे ज्यादा जरूरी है
के देश बचना चाहिए ।

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खेल जगत में अपने आप को देखा था
भारत का विश्व में नाम देखा था
हाँ उसने एक ख्वाब देखा था ।

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आज फिर एक दिन के लिए ,
देश को देश समझा जाएगा !
तिरंगा सिर्फ कपड़ा नहीं ,
भारत माता के भेष समझा जाएगा ।

-



!
उन बातों को , उन यादों को !
क्या सब कुछ भूल गए ?
मेरे ज़ज़्बातों को .

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I can't live without you ,
Because I wanna live for you !
I don't want to fight with you ,
Because I wanna fight for you !

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भूखे कई सोते हैं यहाँ ,
जिन के नसीब में खाना नहीं !
तुम्हारे नसीब में रोटी है
लेकिन तुम्हें खाना नहीं ?

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