मेरे दिल का स्टेशन वेट करता रहा,
उनके प्रेम की इंटरसिटी दूसरे रूट पर चली गई।-
कविता पूरन मासी
कलम ही मेरी तीर्थ
पाठक मथुरा काशी
जीवन में कैसे रंग भरूँ?
यूं ही कब तक धैर्य धरूँ?
खुद की असफलता से डरूं,
या आशा छोड़ मरूं,
ऐ जिंदगी तू ही बता क्या करूँ???-
दुनियावालों के लिए तो मैं गूढ़ रहा हूँ,
पर दुनिया को समझने में मूढ़ रहा हूँ।
चढ़ गई है दिमाग पर कई परत चूने की,
साफ करने रेतमार कागज ढूँढ़ रहा हूँ।।-
हम उनकी चाहत में जिंदगी वार देते हैं,
वो मुस्कुराकर हमें बेइंतहा प्यार देते हैं।
जान न ले किसी दिन ये कातिल अदाएं,
वो नजरों से सीने में खंजर उतार देते हैं।-
"जिद है तो हम जीतेंगे ही,
अभी व्यस्त हैं, रीतेंगे ही।
लगे बनाने में हैं खुद को
दुख के दिन हैं बीतेंगे ही।।"
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शून्य से नीचे तापमान में, खून जमे हालात हैं,
सियाचीन में देश की सेना, देती सबको मात है।
प्राण न्यौछावर कर जाते है,सीमाओं की रक्षा में,
हे सेना, हे सेना नायक नमन तुम्हें दिन रात है।
थल सेना दिवस की शुभकामनाएं-
जो जिंदगी भर मिलने का आमंत्रण ठुकराते रहे,
आज वो अपनी शादी का निमंत्रण दे बैठे।
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विश्वास की डोर से बंधी है मेरे मोहब्बत की पतंग,
श्वांस की डोर टूटने से ही कटेगी-
सबर नहीं है थोड़ा भी अब इंतजार नहीं,
कह क्यों नहीं देती अब तुझसे प्यार नहीं।-
जारी रहेगा सफर अनवरत,रास्ते भले अनेक हैं।
वो कितने भी टेढ़े मेढ़े हों,मंजिल सबकी एक है।।-