उसपर धूप पड़ रही थी, मैं मुस्कुरा रहा था
वो अपना नाम बता रही थी मैं दोहरा रहा था-
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मैं उसे छोड़ कर जाने वाला था,
और वो मेरे बगल ही सो रही थी।
मैं कुछ कह नहीं पा रहा था
और उसे देखकर
मुस्कुराते हुए रो रहा था
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आज भी याद है
वो तेरी हर एक मुस्कान की चमक,
वो तेरे झल्लाकर रूठने का अंदाज़,
वो कुछ कारण से निकले अश्कों का सफर,
रुदन से उभरी उन आंखों की नमी,
वो मुझे प्यार जताने के अनूठे तरीके,
आज भी याद हैं।
(न्याय्य - justifiable, right तर्जनी - index finger)
वो तेरे बालों से छनकर निकलती धूप,
वो तेरे कंधे पर उस शाम बैठी तितलियों की बारीकियां,
नर्म फूलों की पंखुड़ियों को तोड़ती तेरी न्याय्य तर्जनी,
वो तेरी मेरे करीब आने की शाजिषें,
वो तेरी आंखो का मुझपर भरोसा करके बन्द हो जाना,
आज भी याद है।
( व्यग्रता - nervousness)
मूझपर हक जता के डांटने का अंदाज़,
भीड़ में तेरी आंखो का मुझ पर आकर ठहरना,
व्यग्रता में मेरे हाथों को ज़ोर से दबा देना,
वो अपनी धड़कनों से मेरी धड़कनों को बढ़ा देना,
वो अपनी निगाहों से चांद को भी शर्मशार कर देना,
आज भी याद है मुझे।
मेरे कदमों को अपने कदमों से रोक देना,
या मेरे अश्कों को अपने अश्कों से रोक देना,
मेरी खुशियों को अपनी खुशियों से बढ़ा देना,
या मेरे बेजान शरीर को अपनी रूह से जगा देना,
आज भी याद है मुझे।
भूला कुछ भी नहीं हूं मैं,
तेरी आंखों के नीचे वो तिल..
आज भी याद है मुझे।-
Use baat karane ke lie kuch samajh mein nahin aaya to usne mujhse hi puchha ki tumhen kya karna ya kya pasand hai?
ab savaal uska hai to javaab bhi usee ke lie hona chaahie.
maine kehna shuru kiya ...
Tumhe sang-e-marmar ikattha karana pasand hain, aur mujhe tumhari dp
Tumhe series dekhna pasnd hai, aur mujhe tumhare last seens
Tumhe gaane sunna pasnd hai, aur mujhe tumhari awaz
Tum kitabon ka bhi shauk rakhti ho, aur mai tumhari ankho ka
Tumhe tasveeren pasnd hai, aur mujhe har tasveer me tum
Tumhe baal sawarna pasnd hai, aur mujhe balon ko sawarti tum
Agr tumhe muskurana bhi pasnd hai, to mujhe muskurati hui tum.-
सब आंखो का काम है
काम हो तो कोई और बता दो
एक उम्र बीत गई उनसे बात हुए
कहो फोन करें, मेरा नाम बता दो-
वो मेरे सामने भी था, और मैं देख ना सका ,
बात मुझे कहनी भी थी, और मैं कह ना सका।
वो पास मेरे आता और जाता भी रहा,
पर निगाहें जिसपर टिकानी थी टिका ना सका।-
Darkness
Darkness all over, stretching around the space
If I am the light may I efface
Turn me into a void
O Nothing, brighten my dim face-
ये आइनें फरेबी हैं,
ये शब्द मॉन हैं।
अंधेरों में सत्य है,
शांति वाचाल है।-
बहुत पास आ गए हो, थोड़ा दूर जा रहे हो, नहीं तो
लफ्ज़-ए-दिल छुपा कर यूंही बयां कर रहे हो, नहीं तो
अभी भी सब बैठे हैं चराग जलाकर महफ़िल में
तुम अकेले कहीं अंधेरा जला रहे हो, नहीं तो
इरादे-ए-इश्क़ के ख़िलाफ़ केवल मेरे शब्द थे मैं नहीं
मुझे जानने के बाद भी तुम रुक जाओगे? नहीं तो
मोहब्बत में शीरीन( मिठास) अभी बहुत बाकी है.. हां
तो तुम बातों से रूठ जाओगे? नहीं तो
हम हर बार तुम्हे उसी आवाज़ से बुलाएंगे
क्या तुम इस बार भी पलट पाओगे?, नहीं तो
चलो हटाओ सब जाने दो
पर जब मिलोगे तो गले से वापस लगाओगे ना? नहीं तो।-
• बस पसंद है •
किसी ने पूछा उसके चेहरे में क्या पसंद है?
उसके बाल, उसके होंठ
उसकी मुस्कराहटें, उसकी आंखे
बस पसंद है।
उसमें क्या पसंद है?
उसकी चाल, उसकी अदाएं
उसका रूठना, उसका मनाना
उसकी तारीफें, उसकी शिकायतें
उसका हसना, उसका झल्लाना
उसकी आवाज़, उसकी बातें
बस पसंद है।
क्यूं पसंद है वो?
उसके सपने, उसकी ख्वाहिशें
उसकी बुराइयां, उसकी अच्छाइयां
उसकी नादानी, उसकी समझदारी
उसका ठहरना, उसका भागना
बस पसंद है।
उससे क्या चाहते हो?
उससे क्या चाहता हूं?, कुछ नहीं
बस पसंद है।-