पति मर गया
सिंदूर मिट गया
चुड़िया टूट गयी
मंगलसूत्र छीन गया
पैर से पायल भिखर गयी
साड़ी का रंग बदल गया
एक औरत विधवा हो गयी
क्या समाज से इज्ज़त ख़तम हो गया-
फिर सोचा क्या फायदा सोचने से तुम तो मिलोगे नहीं
यार मेरा वो सब कुछ छीन लेगा
अहंकार मेरे जिंदगी का हिस्सा है
जिस सख्स से आप कर रही थी मोहब्बत-ए-इश्क़
वो शख्स तो अभी बच्चा है-
जब भी मै छुट्टियों मे घर जाता हु
थोड़ा घर बदल जाता है
थोड़ा मै बदल जाता हु
घर के लोग मुझे बुड्ढे नज़र आते है
खुद को मै बड़ा नज़र आता हु
माँ मुझे पहले से जादे भोली लगती है
मै खुद को समझदार पाता हु
शिकायतें अब कम सुने को मिलती है
अब मै उनका लड़ला बन जाता हु
पापा पैसे हाथ पे तो रख देते है
मगर मै खर्च नहीं कर पाता हु
जब मै छुट्टियों मे घर जाता हु
माँ बाप अब औलाद लगते है
मै खुद मे माँ बाप पाता हु
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पूछे हाल अगर
तो चुप चाप मत बैठ जाना
मुस्कुराना थोड़ा सरमाना और उसे अपना हाल बताना
दर्द को अपने छुपाना वो जो पूछे सारे सच मत बताना
मगर तुम मुस्कुराना
ये सोच के जाना की है आज उसको अपना बनाना
भले करना पड़े सारी हदो को पार
और तुम किसी भी परिस्थितियों से गुजर जाना
मगर तुम मुस्कुराना
अच्छा जब उसे मिलने जाना तोह हमे भी भूल जाना
उसे सक ना हो जाये ऐसा पेश आना
फिर भी वो पूछे तो कुछ मत बताना
मगर तुम मुस्कुराना
हो हाथो मे गुलाब तो उसे देते हुए ये बताना
कीमत कितनी है इन रिस्तो की ये सब कुछ समझाना
मगर तुम मुस्कुराना
कर दे हा अगर तो रोने मत लग जाना
छुपा लेना अपने आँसुओ को कस के लगे लगाना
मगर तुम मुस्कुराना
मगर तुम मुस्कुराना
मगर तुम मुस्कुराना
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कहा गया वो आशिक़
वो कही नहीं गया वो चाली गयी....
यही तक थी मेरी उसकी कहानी
देहक के हो चुकी है आग पानी
अधर मे सारे सपने जा चुके है
निमंत्रण पत्र लिखे जा चुके है
लगे हाथो सगाई हो चुकी है
वो लड़की अब परायी हो चुकी है
अब पराई होके गयी कहा ?
पता ससुराल का जब सखियो ने पूछा
वो महल जो सबसे उचा
कोई इंजीनियरीर है वो ऐसा सुना है
जो मुझसे हैसियत मे दस गुना है
एक लम्भी कोठी और बड़ी बड़ी कार भी है
किसी मन्त्रि का रिस्तेदार भी है
मेरी छोटी सी दुनिया मे वो रहती तो रो देती
मेरे जैसे हज़ारो दुख दर्द सहती
मिली हर चीज़ उसके काबिल
मै देता भी तो क्या मामूली सा अपना दिल
इस दिल से उसकी रिहाई हो चुकी है
वो लड़की अब ..........
वो लड़की अब परायी हो चुकी है
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ना कह सकते है ना सह सकते है
अपनी बातो को बस दिल मे रख सकते है
ना समझ सकते है ना समझा सकतें
सारे दर्द को छुपा सकतें है
एक कमरे मे मेरी उदास सी ये जिंदगी
उसी कमरे मे सारे राज़ छुपा लेत
दुसरो के सहारे की जरूरत नहीं हमे
हम खुद को संभाल लेते
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अब छोड़ा गया है मुझे फिर से आजमाने के लिए
समझाया था की ख्याल रखना
क्युकी बहुत वक्त लगा था इस टूटे दिल को दिल बनाने मे-