वाक़िये तो अनगिनत हैं ज़िंदगी के,
समझ नहीं आता कि किताब लिखूँ या हिसाब लिखूँ.....!
सौरभ वर्मा--
कोई तो बुक ऐसी मिलती जिस पे दिल लुटा देते,,
हर सब्जेक्ट ने दिमाग खाया किसी एक को तो निपटा देते,,
अब Syllabus देख कर ये सोचते हैं कि....................काश
एक महीना ओर होता तो दुनिया हिला देते।।
सौरभ वर्मा-
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#जब टूटने लगे हौसले तो यह याद रखना,
बिना मेहनत के हासिल तख्तो ताज नहीं होते।
ढूंढ़ लेना अंधेरे में ही मंजिल अपनी,
क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज नहीं होते।
सौरभ वर्मा --
तारीख और वक़्त एक ही था उससे मिलने और जुदा होने का,,
ख़ुशी मनाये उसे पाने की या गम मनाये उसे खोने का,,
अरे.......वादा तो हम ही कर बैठे थे कि नहीं खटखटायेगे दरवाजा अब तेरे दिल के किसी कोने का,,
क्योंकि अब फर्क ही कहाँ पड़ता हैं तुझे मेरे होने या न होने का....!
सौरभ वर्मा --
दुनिया की सच्चाई नजर आती है,
चश्मा पहन के तो दुनिया रंगीन ही दिखाई पड़ती है सच्चाई नहीं।-
मत कूदो उस समुंदर में जिसका कोई साहिल न हो !
आज हम तुम्हारे काबिल नहीं
शायद कल तुम हमारे काबिल न हो l
सौरभ वर्मा--
Your thoughts are the architects of your destiny.
आपके विचार आपके भाग्य के निर्माता है।
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स्कूल की कुछ यादें जो शायद अब वक्त की धूल से सनकर आँखों से ओझल हो चुकी है।
तब नाम तो छोड़ो, दोस्तो के रोल नंबर याद रहते थे।
आज उन्ही दोस्तों के मोबाइल नंबर तक याद नही।
कौन कहाँ बैठता था, सबके जगह सटीक याद रहते थे।
आज कौन किस शहर में है, किसी को खबर नही।।
तब जेब मे पैसे तो कम रहते थे, मगर वक़्त खूब रहता था।
आज जब जेब पर कुछ रहमत बरसी, तो वक़्त ने करवट ले ली।
तब साइकिल पर दो लोगो के बैठने के बाद भी तीसरे की लिए जगह बचती थी।
आज बाइक की पिछली सीट अक्सर किसी का रस्ता तकती रहती है।।-
भटके हुऐ मुसाफिर का बसेरा बन गया,,
मेरी अंधेरी रातों का तू सवेरा बन गया,,
मेरी ज़िन्दगी में आया है तू कुछ इस तरह.......
जैसे कब्र में पड़ी लाश को सांसों का सहारा मिल गया. !!
सौरभ वर्मा--
कहाँ से लाऊँ वो लफ्ज़,,
जो सिर्फ तुझे सुनाई दे,,
दुनिया देखे अपने चाँद को,,,
मुझे तो बस तू ही दिखाई दे।
करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं--