SATYAM TIWARI   (satyam tiwari)
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Joined 29 September 2019


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Joined 29 September 2019
7 JUN 2021 AT 14:47

ऐ जिंदगी!! तुझे मैं अब क्या मान लूं ,
किसे हमदर्द और किसे खुदा मान लूं।

आरजुओं के बादलों को बरसात मान लूं,
या किस्मत की लकीरों का जाल मान लूं।

क्या ठहराव को मैं मुकाम मान लूं ,
या बेबसी को इत्मीनान मान लूं।

क्या इल्म को मैं महान मान लूं,
या फितरतों को जहान मान लूं।

क्या हर शख्स को मैं शोर मान लूं ,
या अपने क्रोध को ही गैर मान लूं।

क्या मुसीबतों को मैं डोर मान लूं ,
या आस को मैं छोर मान लूं।

क्या डर को मैं पाप मान लूं ,
या खुशी को मैं साथ मान लूं।

अब‌ निकलते हुए को मैं वक्त मान लेता हूं ,
ऐ जिंदगी!! तुझे मैं यही मान लेता हूं।।
_satyam tiwari

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5 JUN 2021 AT 12:49

उल्फत की मोहब्बत का तूने सुनेहरा किस्सा बना दिया।
पाक मोहब्बत करके तूने मुझे जावेदा बना दिया ।
और जलने लगी होगी सारी वो इश्क की गुलाबी शामे़ं ,
जब तूने मुझ पर आई हुई कयामत को भी जन्नत बना दिया।

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30 MAY 2021 AT 13:05

तेरे हर दर्द को मैं अब जान बैठा हूं।
तुझे मैं अपना खुदा मान बैठा हूं।

अब जिन्दगी में कोई गम आए तो फर्क नही पड़ता
क्योंकि तुझे मैं अपनी खुशी मान बैठा हूं।

सबसे हसीन लम्हों की किताब है तू
इसे पढ़कर मैं तुझे अपनी जान मान बैठा हूं।

तू एक सुकून देने वाली हवा सी है मेरे लिए
इस हवा में उड़ने वाला पंछी खुद को मान बैठा हूं।

मेरे हाथों की लकीरों पे बस तेरा नाम रहे
बस यही दुआ खुदा से मैं मांग बैठा हूं।

हर एक लम्हा कैद कर लिया तेरी यादों का
अब इन लम्हों को ही अपनी ज़िंदगी मान बैठा हूं।

लिख कर तुझे मैं जहान में मशहूर कर दूं
बस इसी खातिर खुद को मैं शायर मान बैठा हूं। --satyam tiwari

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18 NOV 2020 AT 13:44

आशिकी में तेरी खुद को साहिल कहता हूं..
तू हासिल नहीं है फिर भी तुझे हासिल कहता हूं!
और कतल तूने किया हैं मेरा ये मैं बखूबी जानता हूं..
फिर भी खुद को मैं अपना कातिल कहता हूं!

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1 NOV 2020 AT 15:25

मोहब्बत में खुद को नाकाम कर बैठे हैं,
आंसुओं को पीकर जाम कर बैठे हैं!
और वो हो चुकीं हैं किसी और की,
फिर भी ये ज़िन्दगी उनके नाम कर बैठे हैं!

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2 SEP 2020 AT 14:07

जब प्यार नहीं तो क्या करोगे हमारा हाल जान कर,
अब सुनो तुम मुझे भूल जाओ एक सपना सा मान कर,
भुला कर मुझे खुश रह तू, बस यही एक एहसान कर
मैं हर रोज सो जाया करूंगा तेरी यादों का चादर तान कर।

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1 JUL 2020 AT 19:06

अब तेरी जिंदगी के खुशी और गम में शामिल नहीं हूं,
तेरा ही था तेरा ही रहूंगा और किसी को हासिल नहीं हूं,
तेरा मेरी मोहब्बत को ना कबूल करना बिल्कुल सही है,
शायद मैं ही एक आसमान की परी को पाने के काबिल नहीं हूं!


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19 JUN 2020 AT 18:52

मैं अपनी ज़िन्दगी के सारे राज बेनकाब रखता हूं,
अपने माता पिता को खुश रखूं, बस यही एक ख्वाब रखता हूं!
और मुझसे नज़रें मिलाने की भूल मत कर बैठना,
मैं अपनी आंखों में पूरे मयखाने की शराब रखता हूं!

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11 JUN 2020 AT 22:13

थोड़ी शरारती थोड़ा क्यूट थोड़ा शैतान हो तुम
ना कोई सितारा ना चांद पूरा आसमान हो तुम

मौसमों में बारिश और खड़ी धूप में मेघ हो तुम
नदियों में गंगा और ग्रंथों में वेद हो तुम

सुबह की मीठी धूप और फूलों में गुलाब हो तुम
अरिजीत सिंह के सोंग की आवाज हो तुम

हमारे कॉलेज की शहजादी और लखनऊ की शान हो तुम
दिल को सुकून देने वाली गुलाबी शाम हो तुम

हर किसी के दिल में धड़कने वाली जान हो तुम
जो हर कोई खुदा से मांगता हैं ऐसा इनाम हो तुम

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10 JUN 2020 AT 20:57

तेरी नूरानी हँसी खिलखिलाती देख ,
हर मौसम-ए-शाम दीवानी बन जाए!

जहाँ जाए बस तेरा ही जिक्र हो तू ,
लखनऊ की ऐसी तहजीब बन जाए!

दीवाली की तू पूजा और जो हर किसी के,
मन को भाए ऐसा तू ईद का चाँद बन जाए!

मुकम्मल हो तेरी हर ख्वाहिश जो कभी,
कोई भूल ना सके ऐसा तू इतिहास बन जाए!

तेरे अल्फाजों का तिलिस्म हर कहीं मशहूर हो,
जो हर कलम रोक दे ऐसी तू कलम बन जाए!

रूमी दरवाजा जैसी खूबसूरती और अम्बेडकर पार्क,
जैसा सुकून ऐसे ही तू पूरा लखनऊ शहर बन जाए!
__ satyam tiwari




















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