Sarthak Kanodia   (सार्थक कानोडिया)
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Joined 3 August 2019


Joined 3 August 2019
31 AUG 2019 AT 13:37

जन्मदिन

लोग कहते हैं १२ बजे दिन शुरू होता,
किसी का मध्यरात्रि से तो किसी का दोपहर!
समय चलता गया,रिश्ते बनते मिटते गए,
दिन ढलता रहा रात होती रही,
ऐसे ही किसी का जन्मदिन खत्म हो गया!

कुछ से आधी रात तक इतंजार न हो सका और पहले ही विश कर गए,
कुछ को नींद इतनी प्यारी थी कि दोपहर तक भी कुछ खबर ना थी !

कुछ को पता था क्या चाहिए उसको, कुछ सोचते ही रह गए!
कुछ को मालुम था क्या कर रहा वो दिनभर, कुछ अनुमान लगाते ही रह गए!

कुछ बहाने बनाते चले गए, कुछ हर किसी के जन्मदिन में दस्तक देते चले गए!
कुछ की एक शहर में ही लाईन न कनैक्ट हुई ,कुछ दूसरे शहर से भी आने को तैयार थे!

कुछ को अपनी समस्याओं से फुरसत न मिलीं, कुछ दूसरों की खुशी सोचते रह गए!
कुछ को दिनभर याद न था किसी का जन्मदिन है, कुछ दिन के हर पल उसकी खुशी चाहते रहे!

दिन ढलता रहा रात होती रही, ऐस ही किसी का जन्मदिन खत्म हो गया!
इन सब के बीच उसने कुछ न खोया, पर लोगों की पहचान करना सीख गया!

और उसने बस यहीं सोचा की,
फिर एक नया साल आयेगा,
फिर कुछ नए रिश्ते बनेंगे!
और कुछ नए उल्लास के साथ,
फिर किसी का जन्मदिन आयेगा...

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15 AUG 2019 AT 19:35

अब मेरी तो दो बहने हैं कुछ तो लोग कहेंगें ही,
अच्छा भी बुरा भी, ऐसे ही कुछ लोग कहतें हैं,
भाई, रक्षाबंधन हो या भाईदूज तेरी जेब ढीली हुई डबल!
मैं पूछता हुं उनसे, क्या है इस रिश्ते का कोई मूल?

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15 AUG 2019 AT 12:45

ल‌‌ड़ते झगड़ते कब बडे़ हो गए पता न चला,
इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में कितने व्यस्त हो गए पता न चला!

पर जब भी मन बहलाने का मन किया,
मेरे स्पीड डायल में एक नहीं, दो नहीं, पूरे चार नम्बर सेव थे,
तीन माँ के नाम से और एक पापा का!

जिस भी नम्बर पर लाईन कनेक्ट हुई, हमेशा सुकून ही पया,
उसमें भी जब माँ से नहीं संभली बात तो तुमने थामा कमान!

मेरी नादानियों को छोटा समझ के टाल दिया तुमने,
मेरे सपनों को अपना लक्ष्य मान लिया तुमने!

मेरी कामयाबियों में मुझसे ज्यादा खुश हुई तुम,
मेरी नाकामियों में मुझसे ज्यादा परेशान हुई तुम!

मैं डगमगाया, गिरा, संभला पर कभी डर ना लगा,
क्योंकि रास्ता दिखाने के लिए माँ बाप के साथ मेरी बहने खडी़ थीं!

अब मेरी तो दो बहने हैं कुछ तो लोग कहेंगें, अच्छा भी बुरा भी,
ऐसे ही कुछ लोग कहतें हैं भाई,
रक्षाबंधन हो या भाईदूज तेरी जेब ढीली हुई डबल!
मैं पूछता हुं उनसे, क्या है इस रिश्ते का कोई मूल?

मैं अक्सर सोचता हूं क्या नाम दूं इस रिश्ते को,
क्या है ये भाई बहन का रिश्ता या है कोई मिशाल!

क्योकिं लोग कहते हैं कि माँ एक होती हैं,
पर तुम तो‌ दूसरी माँ बन गई!
पर तुम तो‌ दूसरी माँ बन गई!!

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