Sarika Singh   (Sarika Singh ( SASSY ))
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Assistant Commissioner, GST , Govt of UP

I am not a writer, I just love to pen down
Joined 14 November 2016


Assistant Commissioner, GST , Govt of UP

I am not a writer, I just love to pen down
Joined 14 November 2016
28 NOV AT 23:48

When I look for the meaning of life , I look at my goals but then when I achieve my goal , I have another goals.

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11 SEP AT 20:53

भूल गया ऊंचाई पर जाकर
रचना कल की अपनी,
जैसे कभी पर्वत का टीला
धरती पर माटी नहीं था।
छोड़ आया पीछे ठहराव
जीवन का चलते चलते,
जैसे लहरों में बहता पानी
नन्ही सी बूंद नहीं था।
मोड़ आया मुख़ रास्ते पे
एक बेबस को देख
जैसे लाखों का मालिक आज
कल का दीन नहीं था।
गुरूर में लुप्त हुआ
अंधा हुआ मशहूर होकर
जैसे खिलता पीला सूरज
कभी ढलती लाल शाम नहीं था।


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11 SEP AT 19:43

आवारा मन
जैसे भांति किसी भवरे के
हर पुष्प के मधु को
चखता हुआ
हर टेहनी को
झांकता भांपता
जैसे उड़ता कोई बादल सा
लिए बरखा को
धरती पर खेलता
न धीरज धर
बैठता पर घूमता
आवारा मन
जो चाहता वो ढूंढता
फिर छोड़ता और
मूंद ता आंखो को
देखता ख्वाब नया
चाह नई को सोचता
आवारा मन
भागता और खीचता
रंगो को सारे
वो ओड़ता फ़िर
नोचता ख़ुद में से
आवारगी को सोकता
आवारा मन।

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6 SEP AT 23:56

ज़िन्दगी मेरी में
तरीक़े क्यों तुम्हारे हो?
आंखे सोए मेरी
ख़्वाब क्यों तुम्हारे हो?
कोशिश करूं मैं ही
मंज़िल किसी और की को
कदम उठे मेरे
रास्ते क्यों तुम्हारे हो?
ज़िन्दगी मेरी में
तरीक़े क्यों तुम्हारे हो?
बात कोई बोलू तो
बोल क्यों तुम्हारे हों?
गीत कोई गाऊं तो
गुण गान क्यों तुम्हारे हों?
सोचूं गर ख़ुद को तो
ख़ुद को तुमसा देखूं
मुझमें मेरे रंग हैं तो
रूप क्यों तुम्हारे हों?
ज़िन्दगी मेरी में
तरीक़े क्यों तुम्हारे हों?

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6 SEP AT 21:40

रुखसत करो गम को
थोड़ी मुस्कान आने दो,
ढूंढ लाओ अपनी हस्ती
उसे ख़ुद में घर बनाने दो।।

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6 SEP AT 21:34

थक जाएं जब पांव
चाल किसी और की ढोते ढोते
झूम लेना ख़ुद में फ़िर
जीके ख़ुद को, मौत होते होते।।

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2 SEP AT 22:09

ऐ ख़ुदा बस इतना हुनर देदे
दिल में हो चुभन फ़िर भी ज़ुबां को मरहम दे दे।।

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2 SEP AT 22:00

ख़ुद को गलत बता देना आसान था...

ये ख़ुद को सही साबित करते करते समझा।

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6 JUL AT 17:25

पिता अपने को
दिया सम्मान , अच्छा है
पिता दूजे के,को
गर दिया ,तो गर्व है
बहन अपनी को
माना लक्ष्मी ,अच्छा है
बहन दूजे की
जो पाए तुझसे वो स्थान
तो गर्व है
आंसू पोछे मां के
फ़र्ज़ निभाया सच्चा
जो झुकाया शीश
हर मां के आगे,तो गर्व है
बांटी रोटी अपनों
के संग ,सुंदर था
सोचा हर भूख़ का
तो गर्व है
फेंक दिया कचरा
निकाल अपने घर का
ये देख मन प्रसन्न है
पर छोड़ दिया गली
को ऐसे हाल
तो न तुझपर गर्व है
लड़ आए बहन की
आबरू को जंग
तो अच्छा किया
छोड़ आए किसी
बहन को कर बेआबरू
तो बस शर्म है
तो बस शर्म है।।

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7 MAY AT 11:55

दो आँखों ने
साथ मिलकर
लाख ख़्वाब
सजाएं है
एक दिल ने
मन लगा कर
हसरतें शौक
लगाएं है
एक जान है
मग़र फिर भी
सौ जान पे
मरती है
एक ज़िन्दगी
कहाँ पर काफ़ी
ख़ुदा से अर्ज़
दुआ की है।।

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