Sankalp Raj Tripathi   (संकल्प)
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Joined 4 March 2017


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Joined 4 March 2017
Sankalp Raj Tripathi 16 APR AT 19:37

शहर किसी को नहीं बदलता,
लोग खुद ही बदल जाते हैं।
शहरों के साथ तुकबंदी बैठाने की फर्जी कोशिश में,
रिश्तों की जुगलबंदी, यारी दोस्ती सब स्वाहा कर डालते हैं।
बिना लाग लपेट के कह देता हूं,
कुछ लोग पगला जाते हैं।
हर रोज़ नए रिश्ते बनाते हैं,
जो बढ़िया बात है, लेकिन -
पुराने रिश्ते खुद मार कर मौत का तमाशा देखते हैं,
फिर नए रिश्ते की तलाश में निकल लेते हैं।
शहर उन्हें रिश्ते देता रहता है,
वो शहर का बड़प्पन है।
वो शहर का खून चूसते रहते हैं,
ये उनकी हकीकत है -
वो, जो उनके छोटे शहरों में बाहर नहीं आती थी,
गंदगी के लिए जगह बची नहीं थी
आखिर वापस क्यों नहीं चले जाते।
लेकिन जाएंगे कैसे,
वो उस शहर के रहे नहीं,
इस शहर के हुए नहीं।
ऐसे लोग, शहर है, खुदमे।
गन्दा, मैला, बेजार सा शहर।

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लोग, रिश्ते और शहर

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Sankalp Raj Tripathi 14 APR AT 21:15

वो, मैं और टी वी।

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Sankalp Raj Tripathi 14 APR AT 15:25

.....

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Sankalp Raj Tripathi 2 APR AT 16:40

गरीब बस दो जगह मिलते हैं-
अमीरों के ज़िक्र में,
नेताओं की फ़िक्र में।
दिवालिया है जो, वो कहा मिलता है?
जो ज़िक्र और फ़िक्र करते हैं,
वो दिवालिया है, दिल से।

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गरीबी और दिवालियापन

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Sankalp Raj Tripathi 1 APR AT 1:26

अकेले रहना आदत नहीं है, ज़रूरत है।
खुद में शांत रहता हूं, लोगों के बीच बातें करता हूं,
बातें करता तो हूं, पर बात करनी आती नहीं,
सबमें रहता हूं जब, अकेले रहने की तलब जाती नहीं।
खुद में जितना हूं मैं,
उतना सबके बीच नहीं।
सबके बीच रह सकूं जिससे,
शब्दों के बीच, ख्यालों के साथ-
अकेले रहना आदत नहीं है, ज़रूरत है।
अपना ना हुआ अगर, किसका होऊंगा?
सबके बीच जागा, सबके बीच सोऊंगा -
जैसे जेल में सोते हैं कैदी।
मै कैदी नहीं, ग़ुलाम भी नहीं -
आज़ाद हूं, इसीलिए लेखक हूं।

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अकेला

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Sankalp Raj Tripathi 30 MAR AT 7:46

कहानी मलबों में बसती है,
कमाई बंगलों में -
वहीं बंगले जो मलबों में दबी कहानियां सुनाकर बनाते हैं-
हम।

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कहानी कमाई मलबे और बंगले

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Sankalp Raj Tripathi 21 MAR AT 23:53

कहानी खत्म हो जाती है जहां,
वहीं से कविता शुरू होती है।
ख़ालिस जज़्बातों से लबरेज़।

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कविता

#worldpoetryday

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Sankalp Raj Tripathi 18 MAR AT 17:37

हर रोज़ बन रही है कहानी मेरी,
इतिहास बन जाएगा जिस दिन, उस दिन सुनाऊंगा।
किस्से सुना देता हूं,
तो कहानी बुरा मान जाती है।

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ऐतिहासिक कहानी

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Sankalp Raj Tripathi 18 MAR AT 2:03

A leader should have the patience to handle his own impatience as an individual. That's when he knows how to handle his team. He never loses in front of his team, he loses in himself. A leader is one who has the ability to accumulate a lot of anger and vent it out on his work and not his team, no matter how bad form they might be in. At the end of the day, if leader performs, everyone else automatically gets introspective and buckles up to perform better. A leader is one who never tells himself that he has to lead, but knows how to smile in the worst of the times. A leader cannot afford to be frustrated, he has to be the one with a strong, straight spine and keep going in the worst of the times. And, most importantly, a leader becomes a leader not because he is the best player, but because he has a goal which looks like a mirage to everyone else in his team. A leader is one who has the ability to believe in times of utter disbelief.
A LEADER IS HUMAN.

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Leader

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Sankalp Raj Tripathi 15 MAR AT 22:10

तुम और मैं डोर के दो छोर हैं,
बीच में गांठें नहीं है, बस लोगों का शोर हैं।
आओ गांठें खोल देते हैं,
जो बोलना है, एक दूसरे से बोल देते हैं।

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डोर

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