Sankalp Raj Tripathi   (संकल्प)
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Joined 4 March 2017


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Joined 4 March 2017
Sankalp Raj Tripathi 11 AUG AT 14:49

A Director who wants to be respected by all, should first learn to respect the Writer.

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Being Director

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Sankalp Raj Tripathi 3 AUG AT 20:32

इंकार करेंगे बग़ावत से,
जो मोहब्बत में दाग़ी हुए।
दग़ाबाज़ी की ख़िदमत कैसे करेंगे वो,
जो ख़ुद ही इश्क़ में बाग़ी हुए।

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बाग़ी

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Sankalp Raj Tripathi 31 JUL AT 16:10

आवाज़ उठाना छोड़ दो,
अगली बार ट्रक दिखे तो अपना पहिया मोड़ दो,
फिर भी, मरोगे तो तुम भी -
चुप्पी तुम्हारी चैन से जीने देगी तुम्हे,
ये भ्रम, हो सके, तो तोड़ दो।

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आवाज़

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Sankalp Raj Tripathi 9 JUL AT 10:59

कुछ लोगों से प्यार करते हैं हम,
वो हमसे प्यार नहीं करते।
बस, इसी को प्यार कहते हैं।


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प्यार

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Sankalp Raj Tripathi 8 JUL AT 14:05

काग़ज़ कोरा था,
कोरे थे हम,
फिर कहानी मिली,
बस, तबसे पूरे हैं हम।

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कोरे - पूरे

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Sankalp Raj Tripathi 28 JUN AT 20:10

आवाज़ दबाए गर कोई तो चुप हो जाना।
ऊंची आवाज़ में डराए कोई, तो डर जाना।
बोलने देना उन्हें,
खोलने देना इज्जत की परतें।
परतें जब सब खुल जाएंगी,
इज्जत जब धूल जाएगी,
तब तुम्हारी बारी आएगी।
तब कहना।

उन्हें इल्म है तुम्हारी शक्सियत की ताकत का,
इसीलिए दबाया था आवाज़ को।
जब तुम खामोश थे,
वो तब भी बोल रहे थे, तेज़ तेज़,
खामोशी तपा रही थी उन्हें,
विनम्रता छका रही थी उन्हें।
बोलने दो उन्हें,
उन्हें छकने दो,
अपनी कमजोरी में उन्हें,
खुद ब खुद -थकने दो।
तब तुम्हारी बारी आएगी।
तब कहना।

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बोलने दो उन्हें

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Sankalp Raj Tripathi 24 JUN AT 1:38

कुछ होने या ना होने की बहस में,
हम हैं, ज़िंदा -
इस सच को तहस नहस मत कर देना।
तुम हो, हम हैं,
ये बहुत है,
हमारे बहुत कुछ होने के लिए।

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होना।
कुछ होना।

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Sankalp Raj Tripathi 21 JUN AT 16:09

किसी के लिए खुश होना,
खुद के लिए उदास होना,
इंसान और हालात यही होते हैं।
दोनों साथ चलते हैं,
उम्मीद का बोरा लादे।
हालातों को समेटे,
महत्वाकंक्षाअों को बटोरे।

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इंसान और हालात

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Sankalp Raj Tripathi 20 JUN AT 13:03

सोचा था, फ़ुर्सत मिलेगी तो नज़्म लिखूंगा।
फ़ुर्सत ढूंढ़ते ढूंढ़ते, नज़्म खो गई।
मिल गई तो लिखूंगा।
नहीं मिली, तो फ़ुर्सत है ही,
ढूंढूंगा।

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फ़ुर्सत और नज़्म

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Sankalp Raj Tripathi 11 JUN AT 2:19

शोर से भरा सन्नाटा है।
बारिश से सड़कें सराबोर है।
पहली बारिश में बहके से कदम,
थोड़ी सी मदिरा की बू में -
मिट्टी की खुशबू में छप छप करते बहके से कदम,
पूछ रहे हैं बूंदों से -
अरे बता तो ज़रा!
आखिर मेरा घर किस ओर है।

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बारिश

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